कानपुर में 15 वर्षीय किशोरी की जटिल सर्जरी हुई सफल, एलएलआर अस्पताल में निकाला गया इम्प्लांट – विभाग में हो रही यह चर्चा
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर अस्पताल के अस्थि रोग विभाग के डॉक्टरों ने एक जटिल शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक पूरा किया है। करीब चार साल पहले चोट लगने के बाद किशोरी की जांघ की हड्डी में लगाया गया इम्प्लांट बाद में परेशानी का कारण बन गया था। दूसरे अस्पताल में इम्प्लांट निकालने का प्रयास सफल नहीं होने के बाद मरीज को एलएलआर अस्पताल रेफर किया गया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए इम्प्लांट निकाल दिया।
अस्पताल के अनुसार, ऑपरेशन के बाद किशोरी की स्थिति बेहतर है और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों की टीम ने मामले को चुनौतीपूर्ण मानते हुए सावधानीपूर्वक उपचार की प्रक्रिया पूरी की।
चार साल पहले सीढ़ियों से गिरने पर लगी थी चोट
जानकारी के अनुसार, कानपुर कैंट के जाजमऊ पुरानी चुंगी निवासी मोहम्मद नफीस की 15 वर्षीय बेटी रिम्शा खान करीब चार वर्ष पहले घर की सीढ़ियों से गिर गई थीं। हादसे में उनकी जांघ की हड्डी में चोट आई थी।
इसके बाद रिम्शा का उपचार उर्सला अस्पताल में कराया गया। वहां प्रारंभिक ऑपरेशन के बाद उनकी जांघ की हड्डी में इम्प्लांट लगाया गया था। ऑपरेशन के बाद कुछ समय तक उनकी स्थिति संतोषजनक रही और वह सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ कर रही थीं।
हालांकि, समय बीतने के साथ इम्प्लांट से संबंधित परेशानी सामने आने लगी। किशोरी को दर्द और अन्य असुविधाओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद परिजन उन्हें दोबारा उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।
इम्प्लांट निकालने का पहला प्रयास सफल नहीं हुआ
परिजनों ने रिम्शा को इम्प्लांट से जुड़ी परेशानी के उपचार के लिए उर्सला जिला अस्पताल में दिखाया। वहां डॉक्टरों ने इम्प्लांट निकालने का प्रयास किया, लेकिन जटिल स्थिति के कारण यह प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी।
इसके बाद मरीज को आगे के उपचार के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर अस्पताल रेफर किया गया। मामला जटिल होने के कारण यहां अस्थि रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मरीज की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया।
इसके बाद चिकित्सकों ने ऑपरेशन की योजना तैयार की और मरीज को विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय कुमार की देखरेख में भर्ती किया गया।
विशेषज्ञ टीम ने चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को दिया अंजाम
अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ टीम ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन की तैयारी की। इम्प्लांट को निकालना आसान प्रक्रिया नहीं थी, क्योंकि यह करीब चार वर्ष पहले लगाया गया था और समय के साथ मरीज को इससे संबंधित परेशानी हो रही थी।
चिकित्सकों ने पूरी प्रक्रिया के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतीं। विशेषज्ञ टीम के अथक प्रयास और कुशल शल्य चिकित्सा के बाद इम्प्लांट को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया।
ऑपरेशन पूरा होने के बाद मरीज को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। अस्पताल के अनुसार, फिलहाल उसकी स्थिति बेहतर है और उपचार के बाद स्वास्थ्य में सुधार देखा जा रहा है।
डॉक्टरों की टीम ने मिलकर किया उपचार
इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में अस्थि रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय कुमार के नेतृत्व में चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की रणनीति तैयार की।
ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। इसमें डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, डॉ. रत्नेश, डॉ. अरीबा, डॉ. आकांक्षा और डॉ. प्रशांत शामिल रहे।
सभी चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों के समन्वित प्रयास से जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को निगरानी में रखते हुए आगे की चिकित्सकीय देखभाल जारी रखी जा रही है।
एलएलआर अस्पताल में सफल उपचार से परिवार को राहत
रिम्शा के सफल उपचार से उनके परिजनों को काफी राहत मिली है। लंबे समय से इम्प्लांट से जुड़ी परेशानी का सामना कर रही किशोरी के लिए यह उपचार महत्वपूर्ण रहा।
परिजनों ने सफल ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों और एलएलआर अस्पताल की टीम का आभार जताया। उन्होंने चिकित्सकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जटिल परिस्थिति के बावजूद विशेषज्ञ टीम ने पूरी गंभीरता और सावधानी के साथ इलाज किया।
परिजनों ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और एलएलआर अस्पताल के चिकित्सकों की प्रशंसा की तथा बेहतर उपचार के लिए उनका धन्यवाद किया।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने टीम को सराहा
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. संजय काला के सहयोग से इस जटिल मामले के उपचार को पूरा किया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने चुनौतीपूर्ण स्थिति का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया।
अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय कुमार और उनकी टीम के प्रयासों को इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के जरिए गंभीर और जटिल मामलों का उपचार करने की दिशा में यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
मरीज की हालत अब बेहतर
ऑपरेशन के बाद रिम्शा को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। अस्पताल के अनुसार, उनकी स्थिति वर्तमान में बेहतर है। डॉक्टरों की टीम मरीज के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रही है और आवश्यक उपचार एवं देखभाल की जा रही है।
चिकित्सकों के मुताबिक, किसी भी जटिल ऑर्थोपेडिक प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति की निगरानी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए रिम्शा को भी विशेषज्ञों की देखरेख में रखा गया है, ताकि स्वास्थ्य में सुधार की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से जारी रहे।
जटिल मामलों में विशेषज्ञ उपचार की भूमिका अहम
यह मामला इस बात को भी सामने लाता है कि लंबे समय से शरीर में मौजूद किसी इम्प्लांट से परेशानी होने पर मरीज को विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। विशेष रूप से जब पहले किसी अस्पताल में उपचार या इम्प्लांट निकालने की प्रक्रिया सफल नहीं हुई हो, तब विशेषज्ञ केंद्र पर उचित जांच और उपचार की आवश्यकता होती है।
रिम्शा के मामले में भी प्रारंभिक उपचार के करीब चार वर्ष बाद इम्प्लांट से संबंधित परेशानी सामने आई। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्हें उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा वाले केंद्र पर भेजा गया, जहां विशेषज्ञ टीम ने मामले का प्रबंधन किया।
इस सफल उपचार के बाद मरीज की स्थिति बेहतर बताई जा रही है। वहीं, डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन ने मरीज को आगे भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार देखभाल जारी रखने की बात कही है।
कुल मिलाकर, एलएलआर अस्पताल में 15 वर्षीय रिम्शा खान की जटिल इम्प्लांट रिमूवल सर्जरी की सफलता मरीज और उसके परिवार के लिए राहत की खबर है। साथ ही, यह जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के समन्वित प्रयास का भी उदाहरण है।

