आजमगढ़ सगड़ी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लगा निशुल्क नेत्र शिविर, 190 मरीजों की हुई जांच
आजमगढ़: सगड़ी विधानसभा क्षेत्र के उत्तरी बाढ़ प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक निशुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। पोखरा ग्राम पंचायत स्थित आदर्श इंटर कॉलेज बरडीहा के सामने आयोजित इस शिविर में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। शिविर में करीब 190 मरीजों की निशुल्क नेत्र जांच की गई। जांच के बाद जरूरत के अनुसार मरीजों को दवाएं वितरित की गईं, जबकि कुछ जरूरतमंद मरीजों को चश्मे भी उपलब्ध कराए गए।
यह शिविर रमामल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर नरौली, आजमगढ़ के सौजन्य से आयोजित किया गया। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में शिविर लगने से उन ग्रामीणों को विशेष सुविधा मिली, जिन्हें आंखों की जांच और उपचार के लिए आजमगढ़ मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
गांव के पास स्वास्थ्य सुविधा मिलने से ग्रामीणों को राहत
सगड़ी विधानसभा क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में घाघरा नदी के किनारे बसे कई गांव हर वर्ष बाढ़ की स्थिति से प्रभावित होते हैं। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाती है। खासकर बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आंखों की जांच कराने के लिए दूर जाना आसान नहीं होता।
इसी को ध्यान में रखते हुए गांव के नजदीक निशुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में पोखरा, सेठाकोली, बरडीहा, सिवान, रैचंद पट्टी, गागेपुर और बनियापार समेत आसपास के गांवों से ग्रामीण पहुंचे।
ग्रामीणों ने बताया कि आजमगढ़ मुख्यालय की दूरी उनके गांवों से करीब 40 से 50 किलोमीटर या उससे भी अधिक है। ऐसे में आने-जाने में ही करीब 200 रुपये या उससे अधिक किराया खर्च हो जाता है। इसके अलावा दवा और उपचार का खर्च अलग से उठाना पड़ता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई लोग आंखों से जुड़ी परेशानी होने के बावजूद समय पर जांच नहीं करा पाते।
ऐसे में गांव के समीप निशुल्क जांच की सुविधा मिलने से ग्रामीणों को काफी राहत मिली।
190 मरीजों की हुई आंखों की जांच
शिविर में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने करीब 190 मरीजों की आंखों की जांच की। जांच के दौरान अलग-अलग तरह की समस्याएं सामने आईं। चिकित्सकों ने मरीजों की शिकायतों को सुनने के साथ ही उनकी आंखों की जांच की और आवश्यक सलाह दी।
जांच के बाद जिन मरीजों को दवाओं की जरूरत थी, उन्हें निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई गईं। वहीं, जिन मरीजों को चश्मे की आवश्यकता थी, उन्हें चश्मे भी उपलब्ध कराए गए।
इस पहल से ग्रामीणों को एक ही स्थान पर आंखों की जांच, चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक दवाएं उपलब्ध हो सकीं। इससे लोगों को दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने की परेशानी से भी राहत मिली।
नजदीक दिखाई न देने और मोतियाबिंद की शिकायतें
शिविर में मरीजों की जांच करने वाले डॉ. नीरज सिंह ने बताया कि कई मरीजों में नजदीक दिखाई न देने की समस्या सामने आई। इसके अलावा आंख में माड़ा आने, पुरानी चोट और मोतियाबिंद जैसी समस्याएं भी देखने को मिलीं।
वहीं, कई लोग आंखों में खुजली, जलन और कीचड़ आने की शिकायत लेकर भी शिविर में पहुंचे। चिकित्सकों ने मरीजों की समस्या के अनुसार आवश्यक परामर्श दिया और उन्हें आंखों की देखभाल के प्रति जागरूक किया।
डॉ. नीरज सिंह ने कहा कि आंखों से जुड़ी समस्याओं को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच कराने से कई परेशानियों की पहचान शुरुआती स्तर पर की जा सकती है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को लगातार धुंधला दिखाई दे, आंखों में जलन या खुजली हो अथवा अन्य परेशानी महसूस हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
मोबाइल और टीवी के अधिक इस्तेमाल से आंखों पर असर
शिविर के दौरान चिकित्सकों ने लोगों को मोबाइल फोन और टीवी के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी जागरूक किया। डॉ. नीरज सिंह ने बताया कि लगातार और नजदीक से मोबाइल या टीवी देखने की आदत आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
विशेष रूप से बच्चों को लेकर उन्होंने अभिभावकों को सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को लंबे समय तक मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से बचाना चाहिए। लगातार स्क्रीन देखने की आदत के कारण कम उम्र में ही आंखों से जुड़ी परेशानियां सामने आ सकती हैं।
इसलिए बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना, पर्याप्त दूरी से स्क्रीन देखना और बीच-बीच में आंखों को आराम देना जरूरी है। साथ ही, यदि बच्चे को बोर्ड देखने, किताब पढ़ने या सामान्य गतिविधियों में परेशानी महसूस हो तो उसकी आंखों की जांच करानी चाहिए।
सगड़ी क्षेत्र में लगातार जारी रहेगा अभियान
डॉ. अमित सिंह ने बताया कि सगड़ी विधानसभा क्षेत्र की जनता के लिए पूरे क्षेत्र में निशुल्क नेत्र परीक्षण और उचित उपचार की मुहिम शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक शिविर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे भी लगातार जारी रखने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि घाघरा नदी के किनारे बाढ़ से प्रभावित उत्तरी क्षेत्र के ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने से लोगों को समय पर जांच और उपचार मिल सकेगा।
डॉ. अमित सिंह ने कहा कि जनता की सेवा और सहयोग ही उनका धर्म है। इसी उद्देश्य के साथ जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने जताया आभार
शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने निशुल्क नेत्र जांच की सुविधा मिलने पर आयोजकों के प्रति आभार जताया। लोगों का कहना था कि आर्थिक स्थिति और दूरी के कारण कई बार वे आंखों की जांच कराने को टाल देते हैं। ऐसे में गांव के नजदीक शिविर लगने से उन्हें काफी सुविधा मिली।
ग्रामीणों के मुताबिक, बुजुर्गों के लिए लंबी दूरी तय करके अस्पताल जाना विशेष रूप से कठिन होता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित होने से उन्हें समय और पैसे दोनों की बचत होती है।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी क्षेत्र में इस तरह के स्वास्थ्य शिविर आयोजित होते रहेंगे, ताकि बाढ़ प्रभावित और दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से मिल सकें।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कराया परीक्षण
निशुल्क नेत्र शिविर में लकी, सतीश, भारतीय, हरिश्चंद्र, बिंदु शर्मा, नीलम, सपना, मीना देवी, कमल विश्वकर्मा, रामजन्म, पुरुषोत्तम, चंद्रिका, जटाशंकर, विनोद, अनिल सिंह, इंद्रासनी, मुकेश प्रजापति, अभिषेक, सविता, पूनम, सुनीता, राम केवल, कैलाश, वीरेंद्र, झीनकू, सुनील, सरोज और सिकंदर समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी आंखों की जांच कराई।
शिविर में जांच के बाद मरीजों को आवश्यक दवाएं दी गईं और जरूरतमंद लोगों को चश्मे उपलब्ध कराए गए। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिला।
स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में अहम पहल
सगड़ी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आयोजित यह निशुल्क नेत्र शिविर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता की दिशा में एक उपयोगी पहल के रूप में सामने आया। खासकर उन लोगों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण रही, जो दूरी और आर्थिक कारणों से नियमित रूप से आंखों की जांच नहीं करा पाते।
इसके साथ ही, चिकित्सकों ने लोगों को आंखों की नियमित जांच, मोबाइल और टीवी के सीमित इस्तेमाल तथा बच्चों की आंखों की विशेष देखभाल के प्रति जागरूक किया। इस तरह शिविर में केवल मरीजों की जांच ही नहीं हुई, बल्कि ग्रामीणों को आंखों के स्वास्थ्य को लेकर जरूरी जानकारी भी दी गई।
आगे भी यदि ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित होते हैं, तो सगड़ी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों को अपने गांव और आसपास ही जरूरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। खासकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में इस तरह की पहल लोगों के लिए समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकती है।

