कानपुर में जन्म-मृत्यु की सूचना में लापरवाही पर निजी अस्पतालों का पंजीकरण होगा रद्द – पढ़िए पूरी खबर
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शनिवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति के शासी निकाय की बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, आयुष्मान वय वंदना योजना और टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिले के सभी निजी अस्पतालों, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु की सूचना 24 घंटे के भीतर सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय में सूचना दर्ज नहीं करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उनका पंजीकरण निरस्त करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में एक सितंबर से विशेष टीकाकरण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। वहीं, 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाने में कानपुर नगर के प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहने की जानकारी भी बैठक में दी गई।
24 घंटे के भीतर दर्ज करनी होगी जन्म-मृत्यु की सूचना
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रत्येक जन्म और मृत्यु की सूचना समय से दर्ज किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने निजी अस्पतालों, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया कि जन्म-मृत्यु की सूचना 24 घंटे के भीतर सीआरएस पोर्टल के माध्यम से नगर निगम अथवा संबंधित स्थानीय निकाय को उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने बताया कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, मैटरनिटी होम या नर्सिंग होम में होने वाले जन्म और मृत्यु की सूचना संबंधित रजिस्ट्रार को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संस्था के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति की होती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि सूचना समय से उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने में परेशानी होती है। इसलिए अस्पतालों को अपनी जिम्मेदारी का गंभीरता से पालन करना होगा।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियमों का पालन नहीं करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के निर्देश
बैठक में जननी सुरक्षा योजना की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं का प्रसव प्रशिक्षित चिकित्सकीय निगरानी में स्वास्थ्य संस्थानों में कराया जाए।
उन्होंने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देशित किया कि गर्भवती महिलाओं को सीएचसी, पीएचसी, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज या एएचएम जिला महिला चिकित्सालय जैसी स्वास्थ्य संस्थाओं में सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
मंत्रा पोर्टल के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक एएचएम जिला महिला चिकित्सालय में 2,839, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में 1,863, सीएचसी घाटमपुर में 1,188 और सीएचसी कल्याणपुर में 996 संस्थागत प्रसव कराए गए हैं।
जिलाधिकारी ने इन आंकड़ों की समीक्षा करते हुए संस्थागत प्रसव की व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया।
स्त्री रोग विशेषज्ञों के कार्यों की होगी समीक्षा
बैठक में एनएचएम के माध्यम से तैनात स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक विशेषज्ञ के लिए प्रतिमाह न्यूनतम पांच प्रसव कराने का लक्ष्य निर्धारित है।
उन्होंने निर्देश दिया कि निर्धारित संख्या में प्रसव नहीं कराने वाले चिकित्सकों के कार्यों की समीक्षा की जाए और लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने को कहा।
उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं पर विशेष निगरानी
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था यानी एचआरपी की समीक्षा के दौरान योजना के नोडल अधिकारी हरिशंकर सिंह से जानकारी ली गई। जिलाधिकारी को योजना के क्रियान्वयन के संबंध में अपेक्षित जानकारी नहीं मिल सकी।
इस पर उन्होंने कार्य में अपेक्षित रुचि नहीं लेने के संबंध में जिला स्वास्थ्य समिति के माध्यम से नोडल अधिकारी से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एचआरपी दिवस आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय से पहचान कर उनकी नियमित निगरानी करना है।
उन्होंने गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और पूर्व में जटिल प्रसव जैसी स्थितियों वाली गर्भवती महिलाओं को समय से चिह्नित करने के निर्देश दिए। आवश्यकता पड़ने पर ऐसी महिलाओं को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र पर रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
एक सितंबर से नगरीय क्षेत्रों में विशेष टीकाकरण अभियान
बैठक में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। यू-विन पोर्टल के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 12,327 बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है।
जिलाधिकारी ने एसीएमओ डॉ. कैलाश को निर्देश दिए कि ड्यू लिस्ट के आधार पर पात्र बच्चों की पहचान और उनके परिवारों का मोबिलाइजेशन सुनिश्चित किया जाए।
इसके अलावा नगरीय क्षेत्रों में 1 सितंबर से विशेष टीकाकरण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। अभियान के दौरान ऐसे बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा, जो निर्धारित टीकाकरण से वंचित रह गए हैं।
बैठक में नगर निगम का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। इसके चलते नगर क्षेत्र से संबंधित टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा प्रभावित हुई। इस पर जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को पत्र भेजने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की प्रभावी समीक्षा के लिए संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित होना आवश्यक है।
आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाने में कानपुर प्रदेश में प्रथम
बैठक में आयुष्मान वय वंदना योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाने के मामले में कानपुर नगर प्रदेश में प्रथम स्थान पर है।
जनपद में अब तक 1,07,347 आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाए जा चुके हैं। जिलाधिकारी ने योजना के तहत पात्र वरिष्ठ नागरिकों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ने की प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाया जाए, ताकि अधिक से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की भी समीक्षा
बैठक के दौरान टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने उपचाररत टीबी मरीजों को पोषण पोटली समय से उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि मरीजों के उपचार और फॉलोअप की व्यवस्था प्रभावी तरीके से संचालित हो।
जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ जनभागीदारी और जागरूकता भी महत्वपूर्ण है। इसलिए लोगों को बीमारी के लक्षण, जांच और उपचार के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
स्वास्थ्य योजनाओं की नियमित समीक्षा पर जोर
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए योजनाओं की नियमित निगरानी, आंकड़ों की समीक्षा और कमियों को समय से दूर करना जरूरी है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी, सीएमएस कांशीराम अस्पताल सहित स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही बढ़ाने पर जोर
कुल मिलाकर, जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कानपुर नगर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। जन्म-मृत्यु की सूचना समय से दर्ज कराने से लेकर संस्थागत प्रसव, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की निगरानी, टीकाकरण और आयुष्मान वय वंदना योजना तक कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दिशा-निर्देश दिए गए।
वहीं, निजी अस्पतालों द्वारा जन्म-मृत्यु की सूचना दर्ज कराने में लापरवाही को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब 24 घंटे के भीतर सीआरएस पोर्टल पर सूचना दर्ज नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा एक सितंबर से शुरू होने वाला विशेष टीकाकरण अभियान नगरीय क्षेत्रों में पात्र बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

