एटा में बंदर के झपटने से छत से गिरा 40 वर्षीय व्यक्ति, मेडिकल कॉलेज में मौत; परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
रिपोर्ट-नन्द कश्यप
एटा: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के मरथरा गांव में छत पर सो रहे 40 वर्षीय हबीब पर अचानक बंदर झपट पड़ा। बंदर से बचने की कोशिश में हबीब छत से नीचे गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए एटा स्थित वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां उनकी मौत हो गई।
हबीब की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। वहीं, परिजनों ने मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि घायल को अस्पताल लाने के बाद करीब एक से डेढ़ घंटे तक उचित उपचार नहीं मिला। परिजनों के मुताबिक, इस दौरान हबीब होश में थे और बातचीत भी कर रहे थे, लेकिन बाद में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
छत पर सो रहे थे हबीब
जानकारी के अनुसार, मरथरा गांव निवासी 40 वर्षीय हबीब पुत्र शौकत अली गर्मी के कारण अपने घर की छत पर सो रहे थे। सुबह के समय अचानक एक बंदर उनके पास आ गया और उनकी ओर झपट पड़ा। अचानक हुई इस घटना से हबीब घबरा गए।
बताया गया कि बंदर से बचने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे गिर गए। ऊंचाई से गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद परिवार के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल हबीब को उपचार के लिए जिला मुख्यालय स्थित वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज ले गए।
परिजनों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के समय हबीब बातचीत कर रहे थे। परिवार को उम्मीद थी कि तत्काल उपचार मिलने के बाद उनकी हालत में सुधार हो सकता है। हालांकि, कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई।
परिजनों ने उपचार में देरी का लगाया आरोप
हबीब की मौत के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। मृतक के भतीजे राहुल खान ने आरोप लगाया कि उनके चाचा को अस्पताल लाने के बाद काफी देर तक उपचार नहीं मिला।
राहुल खान के मुताबिक, हादसे के बाद हबीब को अस्पताल लाया गया था और उस समय वह बातचीत कर रहे थे। परिजनों ने डॉक्टरों से तत्काल उपचार शुरू करने के लिए कहा, लेकिन उनका आरोप है कि उन्हें बताया गया कि बड़े डॉक्टर के आने के बाद मरीज को देखा जाएगा।
परिजनों का कहना है कि करीब एक से डेढ़ घंटे तक उपचार का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान हबीब की हालत बिगड़ती चली गई। बाद में चिकित्सकों की ओर से उन्हें आईसीयू ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इसी दौरान उनकी मौत हो गई।
हालांकि, उपचार में कथित लापरवाही के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। अस्पताल प्रशासन या संबंधित चिकित्सकों की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
अचानक बिगड़ी तबीयत
परिजनों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद कुछ समय तक हबीब बातचीत की स्थिति में थे। इसलिए परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि चिकित्सकों की निगरानी और उपचार से उनकी स्थिति संभल सकती है।
परिजनों का आरोप है कि उपचार में देरी के बाद अचानक उनकी हालत खराब हो गई। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें आईसीयू ले जाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
मौत की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। घटना के बाद परिवार के लोगों ने मामले की जांच कराने और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई है या नहीं, इसकी निष्पक्ष पड़ताल की मांग की है।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों से संबंधित स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
पुलिस हादसे से जुड़े तथ्यों को भी देख रही है। परिवार के लोगों से घटना की जानकारी ली जा रही है। इसके साथ ही अस्पताल में उपचार के दौरान क्या स्थिति रही, इस संबंध में भी संबंधित तथ्यों की जांच की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
बंदरों के बढ़ते खतरे को लेकर भी सवाल
इस घटना ने गांवों और शहरों में बंदरों के बढ़ते आतंक तथा उनसे जुड़ी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। कई इलाकों में बंदरों के घरों की छतों पर पहुंचने और लोगों को परेशान करने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
मरथरा गांव की घटना में भी अचानक बंदर के झपटने के बाद एक व्यक्ति के छत से गिरने की बात सामने आई है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बंदरों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग भी उठ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घरों की छतों पर बंदरों की मौजूदगी की स्थिति में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होती है। विशेषकर छतों पर सोने या अकेले रहने वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि, इस घटना में हादसे की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही पूरी तरह हो सकेगी।
परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की
हबीब की मौत के बाद परिवार ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि पहले हादसे में हबीब गंभीर रूप से घायल हुए और इसके बाद अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर उचित चिकित्सा सहायता मिल जाती तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि, यह केवल परिजनों का आरोप है और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
परिवार की मांग है कि अस्पताल में उपचार के दौरान हुई पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी स्थिति
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर मौत के कारणों की पुष्टि होगी। वहीं, अस्पताल में उपचार के दौरान कथित देरी और लापरवाही के आरोपों की भी जांच की जरूरत है।
एक ओर जहां परिवार अपने सदस्य की मौत से सदमे में है, वहीं दूसरी ओर घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों की समस्या जैसे दो महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने ला दिया है।
पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि हबीब की मौत किन परिस्थितियों में हुई और अस्पताल में उपचार के दौरान वास्तव में क्या स्थिति रही। फिलहाल परिवार को जांच से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद है।

