कानपुर देहात में फर्जी बैंक गारंटी का मामला आया सामने, चार फर्मों पर FIR और कार्रवाई – पढ़िए नाम
रिपोर्ट – विशाल मिश्रा
कानपुर देहात: बेसिक शिक्षा विभाग में मैन पावर आउटसोर्सिंग सर्विसेज के माध्यम से नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया में फर्जी बैंक ईएमडी/एफडीआर प्रस्तुत किए जाने का मामला सामने आया है। जिलाधिकारी कपिल सिंह के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई, जिसमें चार फर्मों द्वारा प्रस्तुत बैंक दस्तावेज सत्यापन के दौरान फर्जी एवं कूटरचित पाए गए। इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित चारों फर्मों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें जेम (GeM) पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पूरी की है। साथ ही, फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
नियुक्ति संबंधी पत्रावली में सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मैन पावर आउटसोर्सिंग सर्विसेज के माध्यम से नियुक्ति किए जाने से संबंधित अनुमोदन की पत्रावली जिलाधिकारी कपिल सिंह के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। इस पत्रावली के साथ संबंधित फर्मों द्वारा बैंक ईएमडी/एफडीआर से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए थे।
पत्रावली का अवलोकन करते समय जिलाधिकारी को इन बैंक दस्तावेजों की प्रमाणिकता को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला अग्रणी प्रबंधक तथा उपायुक्त, राज्य कर के माध्यम से बैंक ईएमडी/एफडीआर की जांच कराई गई।
सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आया कि चार फर्मों द्वारा प्रस्तुत बैंक ईएमडी/एफडीआर वास्तविक नहीं थे। जांच में इन दस्तावेजों को फर्जी एवं कूटरचित पाया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले में नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी।
इन चार फर्मों के दस्तावेज पाए गए फर्जी
जांच में जिन चार फर्मों द्वारा प्रस्तुत बैंक ईएमडी/एफडीआर फर्जी पाए गए, उनमें M/s Weaversoft Solutions Private Limited, 101&C संजय गांधी पुरम, फैजाबाद रोड, लखनऊ; M/s SBNK Enterprises, प्लॉट नंबर-123, संजय गांधी पुरम, लखनऊ; M/s AS Infratech, C-4/14, सुलभ आवास, गोमती नगर विस्तार, उत्तर प्रदेश तथा M/s Gangotri Manpower & Security Agency, 554-A गैंगोट्री टावर, मेरठ रोड, प्रथम तल, करनाल शामिल हैं।
इन सभी फर्मों के संबंध में प्रस्तुत किए गए बैंक ईएमडी/एफडीआर की जांच कराई गई थी। सत्यापन के दौरान दस्तावेजों की प्रमाणिकता सही नहीं पाई गई। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित फर्मों के विरुद्ध कार्रवाई आगे बढ़ाई।
जिलाधिकारी ने दिए कार्रवाई के निर्देश
मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिलाधिकारी कपिल सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित फर्मों को GeM पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किए जाने के साथ ही फर्जी एवं कूटरचित बैंक ईएमडी/एफडीआर प्रस्तुत करने के मामले में विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके बाद संबंधित विभागों ने जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में कार्रवाई शुरू की। चारों फर्मों को जेम पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पूरी की गई। वहीं, फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के मामले में संबंधित फर्मों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई गई है।
इस कार्रवाई के बाद अब संबंधित मामले में विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जांच में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
सरकारी प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच पर जोर
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ है कि सरकारी विभागों से जुड़ी निविदा, आउटसोर्सिंग और नियुक्ति जैसी प्रक्रियाओं में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से बैंक गारंटी, ईएमडी, एफडीआर और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सकता है।
इस मामले में भी जिलाधिकारी द्वारा दस्तावेजों पर संदेह होने के बाद सत्यापन कराया गया। परिणामस्वरूप कथित तौर पर फर्जी पाए गए दस्तावेजों का मामला सामने आया और संबंधित फर्मों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जा रहा है। इससे सरकारी प्रक्रियाओं में नियमों के पालन को सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
फर्जी दस्तावेजों पर प्रशासन का स्पष्ट रुख
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि शासकीय कार्यों, नियुक्ति प्रक्रियाओं अथवा किसी भी सरकारी प्रक्रिया में फर्जी या कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि जांच के दौरान कोई फर्म अथवा संबंधित व्यक्ति ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने में संलिप्त पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए किसी भी संस्था या फर्म द्वारा दस्तावेजों के संबंध में गलत जानकारी देने अथवा कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने की स्थिति में उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
वर्तमान मामले में चार फर्मों के बैंक ईएमडी/एफडीआर के सत्यापन में फर्जी होने की पुष्टि होने के बाद ब्लैकलिस्टिंग और एफआईआर की कार्रवाई की गई है। आगे की विधिक प्रक्रिया संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
नियुक्ति प्रक्रिया से पहले सामने आया फर्जीवाड़ा
यह पूरा मामला बेसिक शिक्षा विभाग में मैन पावर आउटसोर्सिंग सर्विसेज के माध्यम से नियुक्ति से संबंधित अनुमोदन प्रक्रिया के दौरान सामने आया। यदि जिलाधिकारी स्तर पर दस्तावेजों की प्रमाणिकता को लेकर संदेह नहीं किया जाता और उनका सत्यापन नहीं कराया जाता, तो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना बन सकती थी। हालांकि, समय रहते सत्यापन कराए जाने से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ गई।
इसके बाद प्रशासन ने बिना देरी किए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। परिणामस्वरूप चारों फर्मों को जेम पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की गई और एफआईआर दर्ज कर विधिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई।
जिला प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। साथ ही, इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि सरकारी कार्यों में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों की प्रमाणिकता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी का संदेश
जिलाधिकारी कपिल सिंह ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों और नियुक्ति प्रक्रियाओं में फर्जी अथवा कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने को किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले फर्मों अथवा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल, चारों फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। संबंधित दस्तावेजों और प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

