इंदौर में स्वाइन फ्लू से महिला की मौत, अस्पताल को नोटिस, जांच के लिए तीन डॉक्टरों की टीम गठित
Digital UP News Desk
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में स्वाइन फ्लू संक्रमण से उज्जैन निवासी 60 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। महिला का इलाज इंदौर के कोकिलाबेन अस्पताल में चल रहा था। जांच के दौरान उसके स्वाइन फ्लू संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। उपचार के बाद अस्पताल ने 18 अगस्त को महिला को छुट्टी दे दी, जिसके बाद वह उज्जैन स्थित अपने घर चली गई। हालांकि, अगले ही दिन यानी 19 अगस्त को उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग को मामले की जानकारी मिली। इसके बाद विभाग ने कोकिलाबेन अस्पताल प्रबंधन से मरीज के उपचार और संक्रमण से संबंधित जानकारी मांगी। स्वास्थ्य विभाग का आरोप है कि महिला की जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बावजूद अस्पताल की ओर से इसकी सूचना समय पर विभाग को नहीं दी गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
स्वाइन फ्लू की जानकारी नहीं देने पर अस्पताल से जवाब तलब
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 60 वर्षीय महिला को बीमारी के उपचार के लिए इंदौर के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उसकी चिकित्सकीय जांच की गई, जिसमें स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद उसका उपचार किया गया। उपचार पूरा होने के बाद 18 अगस्त को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद महिला उज्जैन स्थित अपने घर पहुंची। लेकिन अगले दिन 19 अगस्त को उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग को जब स्वाइन फ्लू संक्रमण की जानकारी मिली तो अधिकारियों ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया।
विभाग का कहना है कि संक्रामक बीमारी के मामलों में समय पर सूचना मिलना बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी मिलने पर मरीज के संपर्क में आए लोगों की पहचान, उनकी निगरानी और आवश्यकता के अनुसार स्वास्थ्य संबंधी कदम उठाने में मदद मिलती है। इसलिए यदि किसी मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी, तो इसकी जानकारी संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंचाना जरूरी था।
तीन डॉक्टरों की टीम करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने तीन डॉक्टरों की जांच टीम गठित की है। टीम को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान अस्पताल में महिला के उपचार से जुड़े सभी दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी।
इसके अलावा महिला की जांच रिपोर्ट, स्वाइन फ्लू की पुष्टि से संबंधित चिकित्सकीय रिकॉर्ड, उपचार के दौरान उसकी स्थिति और अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के समय उसकी स्वास्थ्य स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत क्या-क्या कदम उठाए गए थे।
जांच टीम यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि यदि अस्पताल के रिकॉर्ड में स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि दर्ज थी, तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। इसके अलावा अस्पताल से छुट्टी देने के निर्णय और मरीज को घर भेजे जाने के समय अपनाई गई प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा सकती है।
महिला की मौत के बाद सामने आया मामला
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, महिला उज्जैन की रहने वाली थी और उपचार के लिए इंदौर आई थी। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी जांच की गई थी। जांच में स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उसका उपचार किया गया। इसके बाद 18 अगस्त को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
वहीं, 19 अगस्त को उज्जैन स्थित घर पर उसकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग को उसके स्वाइन फ्लू संक्रमित होने की जानकारी मिली। इसके बाद विभाग ने अस्पताल प्रबंधन से पूरे मामले से संबंधित रिकॉर्ड और जानकारी मांगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन को अपना पक्ष रखना होगा। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के संबंध में निर्णय लिया जा सकता है।
संक्रामक बीमारी में समय पर सूचना क्यों जरूरी?
स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन संबंधी बीमारी है। ऐसे मामलों में मरीज की पहचान होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के लिए संक्रमण की निगरानी करना महत्वपूर्ण होता है। खासतौर पर जब कोई मरीज अस्पताल से उपचार के बाद अपने घर या दूसरे शहर लौटता है, तब उसके संपर्क में आए लोगों की जानकारी और स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखना जरूरी हो सकता है।
इसी वजह से संक्रामक रोगों से जुड़े मामलों में अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग के बीच समय पर सूचना का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे संभावित संक्रमण की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में सहायता मिलती है।
यदि किसी संक्रमित मरीज की जानकारी समय पर स्वास्थ्य विभाग तक नहीं पहुंचती, तो संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी में देरी हो सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में अस्पताल से स्पष्टीकरण मांगा है।
जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है और तीन डॉक्टरों की टीम मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल की ओर से सूचना देने में किस स्तर पर देरी हुई और इसके पीछे क्या कारण था।
जांच समिति अस्पताल के दस्तावेजों और मरीज से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड का परीक्षण करेगी। साथ ही संक्रमण की पुष्टि से लेकर अस्पताल से छुट्टी दिए जाने तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपेगी।
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि संक्रामक बीमारियों से जुड़े मामलों में समय पर रिपोर्टिंग से संक्रमण की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिलती है। फिलहाल सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

