कानपुर में धूमधाम से मनाया गया सावन झूला उत्सव: श्री जगन्नाथ मंदिर में फूलों के झूले पर विराजे भगवान

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: सावन माह के पावन अवसर पर कानपुर के श्री जगन्नाथ महाराज मंदिर, बिरजी भगत में गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ झूला उत्सव मनाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी, बहन सुभद्रा तथा भ्राता बलभद्र जी को रंग-बिरंगे फूलों से सजे झूले में विराजमान कराया गया। शाम छह बजे आयोजित कार्यक्रम में भक्तों ने विधिवत आरती की और धार्मिक गीतों के बीच भगवान को झूला झुलाया।

सावन के महीने में धार्मिक परंपराओं के अनुसार मंदिरों में झूला उत्सव का विशेष महत्व माना जाता है। इसी क्रम में श्री जगन्नाथ महाराज मंदिर में भी भक्तों ने उत्साह के साथ इस धार्मिक आयोजन में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।

फूलों से सजाया गया झूला

झूला उत्सव के लिए मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की गई थीं। भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी, बहन सुभद्रा और भ्राता बलभद्र जी को रंग-बिरंगे फूलों से सजाए गए झूले पर विराजमान कराया गया। इसके बाद आरती की गई और श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

शाम करीब छह बजे शुरू हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। भक्तों ने श्रद्धापूर्वक झूले की रस्सी खींचकर भगवान को झूला झुलाया। इस दौरान मंदिर परिसर में सावन से जुड़े भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही।

सावन के गीतों से भक्तिमय हुआ वातावरण

झूला उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने सावन के मनभावन धार्मिक गीत गाए। इनमें भगवान श्री जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र के साथ झूला उत्सव से जुड़े गीत शामिल रहे।

भक्तों ने सावन की फुहार, झूले और भगवान की भक्ति से जुड़े पारंपरिक गीतों का गायन किया। गीतों के बीच श्रद्धालु भगवान की भक्ति में शामिल होते रहे और बारी-बारी से झूले की रस्सी खींचकर भगवान को झूला झुलाया।

इससे मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने धार्मिक गीतों के माध्यम से सावन की पारंपरिक संस्कृति और भक्ति भावना को भी जीवंत किया।

श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

कार्यक्रम में मंदिर से जुड़े भक्तों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भगवान को झूला झुलाने वालों में ज्ञानेन्द्र कुमार गुप्त, गोपाल गुप्त, अभिषेक गुप्त, अम्बरीष गुप्त, ज्ञानेन्द्र कुमार विश्नोई, पुष्कर गुप्ता, ऋषि अग्रवाल, श्रीमती आयुषी गुप्ता, पदमनी गुप्ता, मिताली विश्नोई, आकांक्षा गुप्ता और तृप्ति गुप्ता शामिल रहे।

इसके अलावा सुश्री नैना, पलक और आराध्या गुप्ता सहित कई अन्य भक्तों ने भी झूला उत्सव में हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं ने भगवान को झूला झुलाने के साथ आरती और पूजा में भी सहभागिता की।

सावन में झूला उत्सव की धार्मिक परंपरा

सावन का महीना भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है। इस महीने में भगवान की पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न मंदिरों में झूला उत्सव और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भक्त भगवान को फूलों से सजे झूले पर विराजमान कराते हैं और भक्ति गीतों के साथ झूला झुलाते हैं।

कानपुर के श्री जगन्नाथ महाराज मंदिर में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा। आयोजन में फूलों से सजाए गए झूले को विशेष रूप से तैयार किया गया था। भगवान के विग्रहों को झूले पर विराजमान कराने के बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा और आरती की।

धार्मिक गीतों ने बढ़ाई उत्सव की शोभा

कार्यक्रम के दौरान सावन और झूला उत्सव से जुड़े गीतों ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। भक्तों ने सामूहिक रूप से गीत गाकर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। सावन की हरियाली, ठंडी फुहार और झूलों की परंपरा से जुड़े गीतों ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।

इस दौरान श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते हुए नजर आए। मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों ने पूरे श्रद्धा भाव से कार्यक्रम में हिस्सा लिया। धार्मिक गीतों और आरती के बाद भक्तों ने भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी, माता सुभद्रा और भ्राता बलभद्र जी के दर्शन किए।

मंदिर में दिखी श्रद्धा और परंपरा की झलक

श्री जगन्नाथ महाराज मंदिर में आयोजित झूला उत्सव के माध्यम से धार्मिक परंपराओं के साथ सामूहिक सहभागिता की भावना भी देखने को मिली। स्थानीय भक्तों ने आयोजन में सहयोग किया और पूरे कार्यक्रम को श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया।

आयोजन के दौरान भक्तों ने भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए झूला उत्सव में भाग लिया। वहीं, सावन के धार्मिक गीतों ने कार्यक्रम को पारंपरिक रंग दिया।

इस प्रकार, कानपुर के बिरजी भगत स्थित श्री जगन्नाथ महाराज मंदिर में सावन झूला उत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक परंपरा के बीच संपन्न हुआ। फूलों से सजे झूले पर श्री जगन्नाथ स्वामी, माता सुभद्रा और भ्राता बलभद्र जी के विराजमान होने के बाद भक्तों ने आरती की और भक्ति गीतों के साथ भगवान को झूला झुलाया।

कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने “जय जगदीश” के जयकारे लगाए और भगवान से सुख-शांति की कामना की।

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