अधिवक्ताओं ने खोला मोर्चा,कानपुर में पुलिसकर्मी पर मारपीट का आरोप,जानिए पुलिस आयुक्त से क्या की गयी मांग
रिपोर्ट – सर्वेश सोनू शर्मा
कानपुर: कानपुर नगर में एक पुलिसकर्मी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस आयुक्त को शिकायत सौंपी गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 17 जुलाई 2026 को रामादेवी चौराहे पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान चकेरी थाना क्षेत्र में तैनात एक हेड कांस्टेबल ने कथित रूप से एक व्यक्ति और कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया तथा बाद में उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी की गई। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, विभागीय कार्रवाई और संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है।
शिकायत में क्या कहा गया है
पुलिस आयुक्त को दिए गए प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि विधानसभा अध्यक्ष के एक बयान के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा रामादेवी चौराहे पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने कथित रूप से प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और एक व्यक्ति के साथ मारपीट की।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता धारा 171 के अंतर्गत कार्रवाई की गई, जिसे शिकायतकर्ता ने दुर्भावनापूर्ण और अनुचित बताया है।
निष्पक्ष जांच की मांग
अधिवक्ता प्रतीक शर्मा (चेयरमैन विधि विभाग – कानपुर मण्डल उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी) द्वारा शिकायत में मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मी के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा शिकायतकर्ता ने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी अनुरोध किया है ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।
मानवाधिकार और संवैधानिक अधिकारों का हवाला
शिकायत में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 सहित विभिन्न न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन और विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप व्यवहार का अधिकार प्राप्त है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। हालांकि, इन दावों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस का पक्ष आना बाकी
समाचार लिखे जाने तक संबंधित पुलिस अधिकारी या पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी थी।
यदि पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो उसे भी समाचार में समान महत्व के साथ शामिल किया जाएगा।
जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे तथ्य
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही की जा सकती है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा।
यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो उसके अनुसार भी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
कानपुर में पुलिसकर्मी के विरुद्ध प्रस्तुत यह शिकायत फिलहाल जांच की मांग के चरण में है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच, विभागीय कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है।
दूसरी ओर, पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

