सोनभद्र में 2.37 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार
रिपोर्ट – ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, SATYA SANATAN TRUST के नाम से पंजीकृत बैंक खाते से करीब 2 करोड़ 37 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आया है। इसके अलावा, इस बैंक खाते से संबंधित साइबर फ्रॉड की 35 शिकायतें भी दर्ज पाई गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज करते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के प्रयासों के तहत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, मामले में संदिग्ध लेन-देन और शिकायतों की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को नियमानुसार न्यायालय में पेश किया गया है।
साइबर फ्रॉड की जांच में सामने आया 2.37 करोड़ रुपये का मामला
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों की निगरानी और जांच के दौरान इस मामले का पता चला। समन्वय (JMIS) पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी की जांच करते समय 16 अक्टूबर 2026 को SATYA SANATAN TRUST के नाम से पंजीकृत बैंक खाते से जुड़ी 35 शिकायतें सामने आईं।
इन शिकायतों और खाते से संबंधित लेन-देन की पड़ताल के दौरान करीब 2 करोड़ 37 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाना प्रभारी की ओर से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि बैंक खाते के माध्यम से हुए संदिग्ध लेन-देन का पूरा स्वरूप क्या था और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। साथ ही, शिकायतों में सामने आए तथ्यों और बैंक खाते से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
दुद्धी पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसी दौरान दुद्धी पुलिस को आरोपियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए रविवार सुबह करीब 6:40 बजे रेलवे स्टेशन परिसर रोड, दुद्धी से तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में चंदौली जिले के निवासी हरिकेश पाण्डेय उर्फ ऋषिकेश को पुलिस ने मुख्य आरोपी बताया है। वहीं, अन्य दो आरोपियों की पहचान दुद्धी क्षेत्र के निवासी अंजनी कुमार और वेदान्त मौर्या के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी साइबर फ्रॉड से जुड़े मामले की जांच के क्रम में की गई है। हालांकि, मामले में उनकी कथित भूमिका, संदिग्ध लेन-देन से संबंध और अन्य पहलुओं की पुष्टि जांच के आधार पर की जानी बाकी है।
आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। साइबर अपराध से जुड़े मामलों में मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन उपकरणों में उपलब्ध जानकारी से संबंधित गतिविधियों और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, बरामद मोबाइल फोन से क्या जानकारी मिली है, इस संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए डिजिटल उपकरणों की जांच के निष्कर्षों को लेकर अभी किसी तरह का अंतिम दावा करना उचित नहीं होगा।
पुलिस मामले में बैंक खाते से जुड़े दस्तावेजों, शिकायतों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही संदिग्ध लेन-देन की प्रकृति और उसमें शामिल अन्य लोगों के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में की गई। अभियान की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) ऋषभ रुणवाल, क्षेत्राधिकारी साइबर हर्ष पाण्डेय और क्षेत्राधिकारी दुद्धी विनय प्रभाकर साहनी कर रहे थे।
पुलिस की ओर से साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों की जांच और संदिग्ध खातों पर कार्रवाई के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में JMIS पोर्टल पर सामने आई शिकायतों के आधार पर संबंधित खाते की जांच की गई और बाद में आरोपियों की गिरफ्तारी की गई।
इसके अतिरिक्त, पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े तथ्यों को सामने लाना और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की पूरी जानकारी जुटाना है। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
न्यायालय में पेश किए गए आरोपी, जांच जारी
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को नियमानुसार न्यायालय में पेश किया गया। फिलहाल पुलिस मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। करीब 2.37 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन और 35 शिकायतों के बीच संबंधों की पड़ताल इस मामले का प्रमुख हिस्सा है।
पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित बैंक खाते का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, संदिग्ध लेन-देन किन परिस्थितियों में हुए और शिकायतकर्ताओं को कथित तौर पर किस प्रकार की आर्थिक क्षति पहुंची।
साइबर अपराध के ऐसे मामलों में आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते, एटीएम कार्ड, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। इसी तरह, किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते का इस्तेमाल संदिग्ध लेन-देन के लिए नहीं होने देना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए।
फिलहाल, सोनभद्र के इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। आगे की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही संदिग्ध लेन-देन, शिकायतों तथा आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।

