ऑपरेशन सिंदूर पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का बड़ा बयान, बोले- कोई लक्ष्य पहुंच से बाहर नहीं

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Digital UP News

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की सामरिक क्षमता और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किए गए सटीक हमलों को लेकर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य बाहर नहीं है। उनके मुताबिक, इस अभियान के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर लगभग 1,200 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में और 200 किलोमीटर तक की गहराई में सुनियोजित एवं सटीक हमले किए गए।

एपी सिंह की यह टिप्पणी भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता, आधुनिक युद्ध तकनीक और विभिन्न रक्षा प्रणालियों के बीच तालमेल के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि अभियान की सफलता किसी एक विमान या हथियार प्रणाली पर निर्भर नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सटीक खुफिया जानकारी, आधुनिक हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली का संयुक्त योगदान रहा।

ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई भारतीय वायुसेना की क्षमता

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि की। इस दृष्टिकोण में किसी एक विमान या हथियार की क्षमता के बजाय विभिन्न संसाधनों को एक साथ जोड़कर अभियान की प्रभावशीलता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी मोर्चे पर व्यापक क्षेत्र में की गई सटीक कार्रवाई ने वायुसेना की पहुंच और परिचालन क्षमता को प्रदर्शित किया। उनके बयान के अनुसार, लगभग 1,200 किलोमीटर चौड़े और 200 किलोमीटर गहरे क्षेत्र में लक्ष्यों को ध्यान में रखकर कार्रवाई की गई।

दरअसल, आधुनिक सैन्य अभियानों में केवल हथियारों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि यह भी मायने रखता है कि खुफिया जानकारी, निगरानी प्रणाली, संचार नेटवर्क और हथियार कितनी प्रभावी तरह से एक-दूसरे के साथ काम करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भी वायुसेना प्रमुख ने इसी एकीकृत व्यवस्था की भूमिका को रेखांकित किया।

खुफिया जानकारी और आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका

एपी सिंह ने अभियान की सफलता के पीछे कई महत्वपूर्ण क्षमताओं का उल्लेख किया। इनमें सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, आधुनिक सटीक मार करने वाले हथियार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली शामिल हैं।

इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य अभियान के दौरान उपलब्ध जानकारी का प्रभावी उपयोग करना और विभिन्न रक्षा संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होता है। इसके अलावा, मानवरहित हवाई प्रणालियों यानी ड्रोन से निपटने की क्षमता भी आधुनिक युद्ध व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी है।

वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को किसी एक हथियार या प्लेटफॉर्म का परिणाम मानना उचित नहीं होगा। इसके बजाय, अलग-अलग प्रणालियों के संयुक्त उपयोग ने अभियान को प्रभावी बनाने में भूमिका निभाई।

स्वदेशी हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन का भी किया जिक्र

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अभियान के दौरान स्वदेश में विकसित हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, कुछ स्वदेशी प्रणालियों ने प्रभावी प्रदर्शन किया और अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

यह पहलू भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के संदर्भ में भी अहम है। स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास से देश को अपनी परिचालन जरूरतों के अनुरूप हथियार, सेंसर और अन्य सैन्य प्रणालियां तैयार करने में सहायता मिलती है। साथ ही, घरेलू उत्पादन और तकनीकी क्षमता मजबूत होने से भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

हालांकि, किसी भी सैन्य अभियान के आकलन में आधिकारिक बयानों और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी के बीच अंतर समझना आवश्यक है। इसलिए अभियान से जुड़ी विशिष्ट उपलब्धियों और प्रभावों को वायुसेना प्रमुख के बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

वायु रक्षा और ड्रोन से निपटने की क्षमता पर जोर

आधुनिक युद्ध में हवाई हमलों से सुरक्षा और ड्रोन जैसी मानवरहित प्रणालियों का मुकाबला करना लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। एपी सिंह ने भारत की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि अभियान में विभिन्न रक्षा क्षमताओं ने एक-दूसरे को मजबूत किया।

नेटवर्क आधारित वायु रक्षा का उद्देश्य अलग-अलग सेंसर और रक्षा प्रणालियों से मिलने वाली जानकारी को आपस में जोड़ना है, ताकि संभावित खतरों की पहचान और उनसे निपटने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके।

इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर भी आधुनिक सैन्य अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों से संबंधित क्षमताओं का उपयोग किया जाता है, जो संचार, निगरानी और अन्य परिचालन गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। इन तकनीकों का प्रभावी समन्वय किसी अभियान की समग्र क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

भविष्य के लिए क्षमताएं मजबूत करने पर जोर

वायुसेना प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख के आधार पर भविष्य में क्षमताओं को और मजबूत करना आवश्यक है। उनके मुताबिक, किसी अभियान में सफलता मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मौजूदा व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत समाप्त हो गई है।

उन्होंने बदलती परिस्थितियों के अनुरूप तेजी से रणनीति अपनाने और एक से अधिक परिचालन विकल्प उपलब्ध रखने के महत्व पर जोर दिया। आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों में विरोधी की रणनीति बदलने पर उसके अनुरूप प्रतिक्रिया देने की क्षमता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इसके अलावा, खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, ड्रोन रोधी प्रणालियों, मजबूत संचार नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय सहायता को बेहतर बनाना भी भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल है। लंबे समय तक सैन्य अभियान जारी रखने के लिए रसद, रखरखाव, बुनियादी ढांचे और स्वदेशी उत्पादन को मजबूत करना भी आवश्यक है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा वायुसेना का दृष्टिकोण

एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना की दीर्घकालिक दिशा को विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य से भी जोड़ा। उनके अनुसार, विकसित भारत के निर्माण के लिए देश का सुरक्षित और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होना आवश्यक है।

इस लक्ष्य के तहत वायुसेना को आधुनिक तकनीक, बेहतर नेटवर्क, स्वदेशी प्रणालियों और विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय से लैस करने पर जोर दिया जा रहा है। भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों में हवाई क्षेत्र के साथ-साथ अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

कुल मिलाकर, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की क्षमता और एकीकृत सैन्य प्रणालियों के महत्व को रेखांकित करता है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी विकास, आत्मनिर्भरता और बदलती परिस्थितियों के अनुसार तेजी से निर्णय लेने की क्षमता को लगातार मजबूत करना होगा।

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