कानपुर के घाटमपुर में नीम के पेड़ों की कटान पर सवाल, दो पेड़ों की अनुमति के बाद वन विभाग ने शुरू की जांच

669f0906-8e8a-470b-8d5f-bfd3a0259a84

घाटमपुर, कानपुर: घाटमपुर तहसील क्षेत्र के कोरिया गांव में हरे नीम के पेड़ों की कटान को लेकर मामला सामने आया है। आरोप है कि वन विभाग से दो पेड़ों की कटान की अनुमति मिलने के बावजूद मौके पर इससे अधिक पेड़ों को काटा गया। इसके अलावा, काटी गई लकड़ी के परिवहन और उसे बिक्री के लिए भेजे जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

वन विभाग के अनुसार, कोरिया गांव में दो नीम के पेड़ों की लकड़ी काटने के लिए अनुमति दी गई थी। ऐसे में अब जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि वास्तव में कितने पेड़ों की कटान हुई, क्या कटान अनुमति की शर्तों के अनुरूप की गई और लकड़ी के परिवहन में निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं। फिलहाल, अतिरिक्त पेड़ों की कटान और लकड़ी के परिवहन को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

रिपोर्ट: शुभम साहू, घाटमपुर

कोरिया गांव में नीम के पेड़ों की कटान का मामला

घाटमपुर क्षेत्र में पेड़ों की कटान और लकड़ी के परिवहन से जुड़े मामलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ताजा मामला कोरिया गांव का है, जहां किसान के नाम पर नीम के दो पेड़ों की कटान के लिए वन विभाग से अनुमति लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, मौके पर निर्धारित संख्या से अधिक पेड़ों की कटान किए जाने की शिकायत के बाद मामला चर्चा में आ गया। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि अनुमति केवल दो पेड़ों के लिए जारी हुई थी, तो उससे अधिक पेड़ों की कटान कैसे हुई।

इसके साथ ही, काटी गई लकड़ी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने और बिक्री के लिए भेजे जाने के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों के मद्देनजर यह जांच जरूरी हो गई है कि पेड़ों की कटान से लेकर लकड़ी के परिवहन तक सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की गई थीं या नहीं।

दो पेड़ों की अनुमति, अतिरिक्त कटान पर जांच

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु वन विभाग की ओर से जारी अनुमति और मौके पर हुई वास्तविक कटान के बीच संभावित अंतर है। यदि अनुमति दो पेड़ों के लिए ही दी गई थी, तो जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि कितने पेड़ काटे गए और कटान के दौरान अनुमति की शर्तों का पालन हुआ या नहीं।

इसके लिए संबंधित अनुमति पत्र, पेड़ों की संख्या, मौके की स्थिति और अन्य उपलब्ध अभिलेखों का मिलान किया जाना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ कर यह जानकारी जुटाई जा सकती है कि कटान किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में की गई।

हालांकि, केवल शिकायत या स्थानीय स्तर पर उठे सवालों के आधार पर किसी व्यक्ति को नियमों का उल्लंघन करने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि अनुमति से अधिक कटान हुई थी या नहीं।

लकड़ी के परिवहन को लेकर भी उठे सवाल

पेड़ों की कटान के साथ-साथ लकड़ी के परिवहन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कटाई के बाद लकड़ी को दूसरे स्थान पर ले जाकर बिक्री के लिए भेजा गया। ऐसे में वन विभाग की जांच में परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और लागू नियमों की स्थिति भी स्पष्ट करना जरूरी होगा।

यदि लकड़ी का परिवहन किया गया है, तो यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित मामले में आवश्यक अनुमति या अन्य दस्तावेजों की जरूरत थी या नहीं और उनका पालन किया गया या नहीं। इसके अलावा, लकड़ी की मात्रा और कटान से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि पेड़ों की कटान और लकड़ी के परिवहन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई थी या उसमें किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है।

वन क्षेत्राधिकारी राकेश पांडे ने क्या कहा?

मामले को लेकर वन क्षेत्राधिकारी राकेश पांडे ने बताया कि प्रकरण वन विभाग के संज्ञान में आया है और इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से दो पेड़ों की लकड़ी काटने के लिए अनुमति दी गई थी।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में लकड़ी के परिवहन या अनुमति से अधिक पेड़ों की कटान की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग के इस बयान के बाद अब जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी।

वन क्षेत्राधिकारी के अनुसार, आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग मौके की स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार करता है।

जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

कोरिया गांव में नीम के पेड़ों की कटान का मामला अब वन विभाग की जांच पर निर्भर है। जांच के दौरान पेड़ों की वास्तविक संख्या, जारी अनुमति की शर्तों और लकड़ी के परिवहन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करना आवश्यक होगा।

यदि जांच में नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो विभाग को तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कुल मिलाकर, इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या कोरिया गांव में नीम के पेड़ों की कटान वन विभाग की अनुमति के दायरे में हुई या उससे अधिक कटान की गई। फिलहाल विभाग ने जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट तथा सत्यापित तथ्यों के आधार पर तय होगी।

You may have missed