बागपत में MLC चुनाव के दौरान हंगामा, BJP जिलाध्यक्ष की मांग पर CO ने मांगी माफी, वीडियो हो रहा वायरल

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रिपोर्ट – हैदर मलिक 

बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में शिक्षक-स्नातक एमएलसी चुनाव के मतदान के दौरान भाजपा नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। खेकड़ा में मतदान के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष नीरज गुप्ता को बूथ में जाने से रोके जाने पर विवाद शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि क्षेत्राधिकारी (सीओ) खेकड़ा रोहन चौरसिया ने उन्हें बूथ के अंदर जाने से रोका, जिसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष नाराज हो गए। इसकी जानकारी मिलते ही भाजपा कार्यकर्ताओं और विधायक योगेश धामा सहित पार्टी के अन्य नेता मौके पर पहुंच गए और धरने पर बैठ गए।

भाजपा नेताओं ने मांग रखी कि सीओ रोहन चौरसिया उनसे माफी मांगें या उन्हें निलंबित किया जाए। वहीं, मामला बढ़ने पर अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सहित कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने भाजपा नेताओं को समझाने और विवाद को शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि, काफी देर तक धरना जारी रहा। बाद में सीओ को भाजपा नेताओं के बीच बुलाया गया और उनसे माफी मंगवाई गई। इसके बाद एएसपी बागपत प्रवीण कुमार चौहान ने भी भाजपा जिलाध्यक्ष से हाथ जोड़कर माफी मांगी। अंततः विवाद शांत हुआ और भाजपा नेताओं ने धरना समाप्त कर दिया। अब इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आ रही है।

मतदान के दौरान बूथ पर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, शिक्षक-स्नातक एमएलसी चुनाव के मतदान के दौरान खेकड़ा क्षेत्र में यह घटनाक्रम हुआ। मतदान केंद्र पर भाजपा जिलाध्यक्ष नीरज गुप्ता और सीओ रोहन चौरसिया के बीच उस समय विवाद हो गया, जब सीओ ने उन्हें बूथ के अंदर जाने से रोक दिया।

इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष ने इस पर नाराजगी जताई। घटना की जानकारी जैसे ही भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय विधायक योगेश धामा तक पहुंची, पार्टी के कई नेता मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और भाजपा नेताओं ने धरना शुरू कर दिया।

इस दौरान पार्टी नेताओं ने पुलिस अधिकारी के व्यवहार पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि विवाद का समाधान किया जाना चाहिए और संबंधित अधिकारी को अपनी बात स्पष्ट करनी चाहिए। हालांकि, बूथ में प्रवेश को लेकर लागू नियमों और संबंधित अधिकारी की कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

भाजपा नेताओं ने रखी माफी या निलंबन की मांग

घटना के बाद भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, वे धरना समाप्त नहीं करेंगे। पार्टी नेताओं की मांग थी कि सीओ रोहन चौरसिया सार्वजनिक रूप से माफी मांगें या उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए।

विवाद के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष और कार्यकर्ता धरने पर डटे रहे। दूसरी ओर, स्थिति को नियंत्रित करने और मतदान केंद्र के आसपास शांति बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों ने मोर्चा संभाला।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी सहित कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने भाजपा नेताओं से बातचीत की और विवाद को सुलझाने का प्रयास किया। हालांकि, शुरुआत में समझाने-बुझाने के प्रयासों से बात नहीं बनी और प्रदर्शन जारी रहा।

भाजपा नेताओं के बीच बुलाए गए सीओ

जब बातचीत से विवाद का समाधान नहीं निकला, तब सीओ रोहन चौरसिया को भाजपा नेताओं के बीच बुलाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दौरान सीओ से माफी मंगवाई गई।

बताया जा रहा है कि जब सीओ माफी मांग रहे थे, तब कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें उनकी आवाज सुनाई नहीं दी। इसके बाद उनसे दोबारा माफी बोलने के लिए कहा गया। घटनाक्रम के दौरान खेकड़ा के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ने भी सीओ के माफी मांगने की पुष्टि की।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के संबंध में संबंधित अधिकारियों का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आना जरूरी है, ताकि विवाद की परिस्थितियों और उसके समाधान को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

एएसपी प्रवीण कुमार चौहान ने भी संभाला मोर्चा

विवाद को शांत कराने के लिए एएसपी बागपत प्रवीण कुमार चौहान ने भी हस्तक्षेप किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष को बड़ा भाई बताते हुए हाथ जोड़कर माफी मांगी और उनसे धरना समाप्त करने का आग्रह किया।

इसके बाद माहौल शांत होने लगा। काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद भाजपा नेताओं ने अपना धरना समाप्त कर दिया। इस तरह मतदान के दौरान शुरू हुआ विवाद बातचीत और अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ।

हालांकि, घटना के दौरान किस स्तर पर क्या निर्णय लिया गया और क्या किसी अधिकारी के खिलाफ आगे कोई विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित है, इसकी पुष्टि अभी उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो

इस घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात कही जा रही है। वीडियो को लेकर लोगों के बीच चर्चा हो रही है। मतदान के दौरान पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के बीच हुए इस विवाद ने चुनावी प्रक्रिया के समय प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद के महत्व को भी सामने रखा है।

ऐसे मामलों में मतदान केंद्रों पर लागू नियमों का पालन कराना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। दूसरी ओर, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संवाद भी संयमित तथा नियमों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि मतदान प्रक्रिया प्रभावित न हो।

इसके अलावा, किसी भी वायरल वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले पूरे घटनाक्रम, संबंधित नियमों और अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष की जानकारी लेना जरूरी है।

मतदान केंद्रों पर नियमों का पालन महत्वपूर्ण

चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित नियम लागू होते हैं। इसलिए बूथ में प्रवेश को लेकर किसी भी विवाद की स्थिति में संबंधित दिशा-निर्देशों और अधिकृत व्यक्तियों की भूमिका की जांच करना आवश्यक है।

बागपत के खेकड़ा में सामने आए इस मामले में भाजपा नेताओं ने सीओ के व्यवहार पर आपत्ति जताई, जबकि विवाद के समाधान के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। फिलहाल, धरना समाप्त हो चुका है और वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में बना हुआ है।

निष्कर्ष: बागपत में शिक्षक-स्नातक एमएलसी चुनाव के मतदान के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष को बूथ में जाने से रोकने के मामले ने विवाद का रूप ले लिया। भाजपा नेताओं ने माफी या निलंबन की मांग करते हुए धरना दिया। बाद में सीओ रोहन चौरसिया और एएसपी प्रवीण कुमार चौहान की ओर से माफी मांगने के बाद धरना समाप्त हो गया। अब इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आ रही है।

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