आजमगढ़ में शिवम पाल की मौत की उच्चस्तरीय जांच और परिवार को 50 लाख मुआवजे की मांग – पढ़िए पूरा घटनाक्रम

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रिपोर्ट – पित्तेश्वर कुमार 

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में शिवम पाल की सड़क दुर्घटना में मौत और नितिन यादव के गंभीर रूप से घायल होने के मामले को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने न्याय की मांग तेज कर दी है। शनिवार को मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने, मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने और घायल नितिन यादव का उपचार सरकारी खर्च पर कराने की मांग की। इसके अलावा, प्रदर्शन के बाद दर्ज मुकदमे वापस लेने और गांवों में की जा रही छापेमारी बंद करने की मांग भी उठाई गई।

किसान संगठनों का कहना है कि दुर्घटना के बाद पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा था। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि दुर्घटना की परिस्थितियों का पता चल सके और प्रभावित परिवार को न्याय मिल सके। वहीं, मुकदमे और गिरफ्तारी को लेकर लगाए गए आरोपों पर पुलिस एवं प्रशासन का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।

शिवम पाल की मौत के मामले में जांच की मांग

जानकारी के अनुसार, तहबरपुर थाना क्षेत्र के चिरावल गांव निवासी शिवम पाल की 9 अक्टूबर 2026 को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस घटना में नितिन यादव गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना के बाद घटना की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए और पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग करते हुए 10 अक्टूबर को तहबरपुर के टीकापुर मोड़ पर धरना शुरू किया था।

संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र के लोगों ने भी पीड़ित परिवार का समर्थन करते हुए प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी थीं। बताया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से आश्वासन मिलने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया था।

हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि उच्चस्तरीय जांच से घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने और पीड़ित परिवार की शिकायतों का उचित समाधान करने में मदद मिल सकती है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और घायल नितिन यादव के इलाज का खर्च सरकार द्वारा उठाने की मांग प्रमुखता से शामिल रही।

इसके साथ ही, मोर्चा ने दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने और मामले में न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना से प्रभावित परिवारों को आर्थिक और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

विशेष रूप से, गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के उपचार में आर्थिक कठिनाई न आए, इसके लिए सरकारी स्तर पर आवश्यक मदद उपलब्ध कराने की मांग की गई। वहीं, मृतक के परिवार को उचित मुआवजा मिलने से उन्हें इस कठिन परिस्थिति में आर्थिक सहारा मिल सकता है।

31 नामजद और 50 अज्ञात लोगों पर मुकदमे का आरोप

जय किसान आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष राजनेत यादव ने ज्ञापन सौंपने के बाद मामले को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने करीब 10 गांवों में जाकर घटना और उससे जुड़े हालात की जानकारी जुटाई है।

राजनेत यादव के अनुसार, धरना समाप्त होने के बाद स्थानीय पुलिस ने 31 लोगों को नामजद करते हुए 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद रात के समय कई गांवों में छापेमारी की गई और आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

हालांकि, ये आरोप संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों की ओर से लगाए गए हैं। मुकदमे में दर्ज धाराओं, गिरफ्तारी की परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आने पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

युवाओं की गिरफ्तारी को लेकर जताई चिंता

राजनेत यादव ने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में कई युवा ऐसे हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। उनके मुताबिक, पुलिस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के लोगों में चिंता का माहौल है और गिरफ्तारी की आशंका के चलते कुछ ग्रामीण अपने घरों से दूर रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि यदि लोग अपनी समस्याओं और न्याय की मांग को लेकर आवाज उठाते हैं, तो उनकी शिकायतों पर निष्पक्षता से विचार किया जाना चाहिए। किसान नेता ने प्रशासन से आग्रह किया कि मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई हो और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इसके अलावा, उन्होंने क्षेत्र में शांति बनाए रखने और ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। संगठन का कहना है कि संवाद के माध्यम से स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

मुकदमा वापस लेने और छापेमारी बंद करने की मांग

संयुक्त किसान मोर्चा ने ज्ञापन के माध्यम से दर्ज मुकदमे वापस लेने, छापेमारी बंद करने और क्षेत्र में शांति बहाल करने की मांग की। संगठन का कहना है कि दुर्घटना के मामले में न्याय की मांग कर रहे लोगों की शिकायतों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

मोर्चा ने यह भी मांग की कि शिवम पाल के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और नितिन यादव का इलाज सरकारी खर्च पर कराया जाए। साथ ही, दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच कराकर तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

हालांकि, मुकदमे वापस लेने या मुआवजा देने के संबंध में प्रशासन की ओर से किसी निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन मांगों पर आगे की कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन का पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

किसान संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में संयुक्त किसान मोर्चा के अध्यक्ष विनोद सिंह, जय किसान आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष राजनेत यादव, दुखहन सत्यार्थी, आशीष पटेल और गोबिन्द कुमार सहित विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और क्षेत्र में उत्पन्न तनाव को दूर करने की मांग की।

फिलहाल, इस मामले में दुर्घटना की परिस्थितियों, दर्ज मुकदमे और पुलिस कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। साथ ही, पुलिस एवं जिला प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

निष्कर्ष: आजमगढ़ में शिवम पाल की मौत के मामले को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने उच्चस्तरीय जांच, 50 लाख रुपये मुआवजे और घायल नितिन यादव के सरकारी खर्च पर उपचार की मांग उठाई है। इसके अलावा, संगठन ने मुकदमा वापस लेने और छापेमारी बंद करने की मांग भी की है। अब इस मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें रहेंगी।

महत्वपूर्ण संपादकीय नोट: मुकदमे, गिरफ्तारी और छापेमारी से जुड़े आरोप संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों के बयानों पर आधारित हैं। प्रकाशन से पहले पुलिस या जिला प्रशासन का पक्ष प्राप्त कर शामिल करना उचित होगा।

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