मेरठ: जमीन कब्जाने के लिए महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति रखने और खंडित करने का आरोप, एसएसपी से लगाई न्याय की गुहार

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रिपोर्ट – मनीष पराशर

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के खड़ौली गांव में जमीन और मकान पर कब्जे को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले में दो महिलाओं ने कुछ लोगों पर जमीन कब्जाने की नीयत से महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति रखने, बाद में उसे खंडित कर नाले के पास फेंकने और विरोध करने पर धमकियां देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित महिलाओं ने ग्रामीणों के साथ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

मामले को लेकर गांव में चर्चा का माहौल है। वहीं, धार्मिक आस्था से जुड़े आरोप सामने आने के बाद विवाद ने संवेदनशील रूप ले लिया है। हालांकि, महिलाओं की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस का कहना है कि जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा है और मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

जमीन और मकान पर कब्जे का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खड़ौली गांव निवासी अंजलि और ज्ञानवती ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ लोग उनकी जमीन और मकान पर कब्जा करने के उद्देश्य से लगातार दबाव बना रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद के बीच उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया जा रहा है।

महिलाओं के मुताबिक, विवाद केवल जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दौरान धार्मिक आस्था से जुड़े विषय को भी इसमें शामिल किए जाने का आरोप है। उनका दावा है कि जमीन पर कब्जे की कोशिश के तहत पहले वहां महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति रखी गई और बाद में उसे खंडित करके नाले के पास फेंक दिया गया।

इन आरोपों के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर नाराजगी की बात कही जा रही है। हालांकि, मूर्ति किसने रखी, उसे किस परिस्थिति में हटाया गया और उसे खंडित करने की घटना में कौन शामिल था, इन सभी बिंदुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पीड़ित महिलाओं ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर मांगा न्याय

मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर अंजलि और ज्ञानवती ग्रामीणों के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखते हुए आरोप लगाया कि जमीन के विवाद में उनके परिवार को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने स्थानीय स्तर पर पर्याप्त सहायता नहीं मिलने की बात भी कही।

पीड़ित महिला अंजलि के अनुसार, उनके परिवार पर संपत्ति विवाद को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने पर बच्चों को झूठे मुकदमों में फंसाने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। अंजलि का कहना है कि स्थानीय थाने से अपेक्षित मदद नहीं मिलने के कारण उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचना पड़ा।

अंजलि ने अधिकारियों से मांग की कि उनके परिवार की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ जमीन पर कब्जे से जुड़े आरोपों की जांच की जाए।

ज्ञानवती ने भी लगाए साजिश के आरोप

वहीं, ज्ञानवती ने आरोप लगाया कि उनके घर और जमीन पर कब्जा करने के लिए साजिश रची जा रही है। उनका कहना है कि विवाद के दौरान धार्मिक प्रतीकों और समाज की भावनाओं से जुड़े मामलों को भी शामिल किए जाने की आशंका है।

ज्ञानवती के मुताबिक, परिवार को संपत्ति से जुड़े मामले में न्याय चाहिए और प्रशासन को सभी पक्षों की बात सुनकर उचित कदम उठाना चाहिए। उन्होंने आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।

पीड़ित महिलाओं की शिकायत के बाद अब मामले में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जमीन के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज, घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयान विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच की बात कही

मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी (सीओ) दौराला ने बताया कि खड़ौली गांव में जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच पुराना विवाद चल रहा है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, पुलिस की ओर से सामने आई जानकारी के आधार पर आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता। जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संबंधित आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।

निष्पक्ष जांच और शांति बनाए रखना जरूरी

खड़ौली गांव का यह मामला जमीन के विवाद के साथ धार्मिक आस्था से जुड़े आरोपों के कारण भी महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे मामलों में प्रशासन के लिए आवश्यक है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए और किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव किए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई हो।

इसके अलावा, ग्रामीणों से भी अपील की जाती है कि वे किसी अपुष्ट सूचना के आधार पर निष्कर्ष न निकालें और गांव में शांति बनाए रखें। संपत्ति विवाद का समाधान संबंधित दस्तावेजों, उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

फिलहाल, पीड़ित महिलाओं ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर न्याय की मांग की है, जबकि पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने और आरोपियों की तलाश किए जाने की जानकारी दी है। अब जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्य ही स्पष्ट करेंगे कि जमीन विवाद, मूर्ति रखने और उसे खंडित करने के आरोपों में क्या सच्चाई है।