मुरादाबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच, लाल चटनी और दाल के 2 नमूने मानकों पर फेल
रिपोर्ट – मोहम्मद अरशद
मुरादाबाद: लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मुरादाबाद के गुलाबबाड़ी चुंगी क्षेत्र में जांच, जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान चलाया। इस दौरान मोबाइल फूड सेफ्टी वैन (एमएफएसडब्ल्यू) की मदद से खाद्य पदार्थों के कुल 20 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 2 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। जांच में लाल चटनी और दाल में रंग से संबंधित अनियमितताएं सामने आईं।
विभाग की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी रखना, खाद्य कारोबारियों को सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करना और आम लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। इसके साथ ही कारोबारियों को खाद्य सामग्री की खरीद, भंडारण और तैयार करने की प्रक्रिया में स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।
गुलाब बाड़ी चुंगी क्षेत्र में मोबाइल वैन से हुई जांच
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से चलाए गए अभियान का नेतृत्व खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिपाल सिंह ने किया। अभियान के अंतर्गत एमएफएसडब्ल्यू वाहन के माध्यम से मौके पर ही खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच की गई। इस प्रक्रिया से कारोबारियों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े मानकों की जानकारी देने में भी मदद मिली।
जांच के दौरान कुल 20 नमूनों को परखा गया। इनमें से 18 नमूने जांच में मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि 2 नमूनों में निर्धारित मानकों से जुड़ी कमियां सामने आईं। संबंधित नमूने लाल चटनी और दाल के थे, जिनमें रंग से जुड़ी अनियमितताएं पाई गईं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन नमूनों में इस्तेमाल किए गए रंग के प्रकार या उसकी मात्रा का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए जांच के निष्कर्षों को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने तक ही सीमित रखना उचित है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है।
23 खाद्य कारोबारियों को किया गया जागरूक
जांच अभियान केवल नमूनों की गुणवत्ता परखने तक सीमित नहीं रहा। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा विभाग ने क्षेत्र के 23 खाद्य कारोबारियों को जागरूक और प्रशिक्षित भी किया। उन्हें खाद्य सुरक्षा नियमों, स्वच्छता और सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता से जुड़े जरूरी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई।
विभाग ने कारोबारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे खाद्य सामग्री केवल एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत स्रोतों से ही खरीदें। इससे खाद्य सामग्री की आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और उसकी गुणवत्ता पर निगरानी रखने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, खाद्य पदार्थों में कृत्रिम रंगों का अनधिकृत इस्तेमाल नहीं करने की हिदायत दी गई। खाद्य पदार्थों में रंगों का प्रयोग निर्धारित नियमों और अनुमत सीमाओं के अनुसार ही किया जाना चाहिए। नियमों के विपरीत रंगों का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंता पैदा कर सकता है। इसलिए कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने की सलाह दी गई।
रसोई और खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता पर जोर
अभियान के दौरान खाद्य पदार्थ तैयार करने वाले स्थानों और रसोई में साफ-सफाई बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। विभाग ने कारोबारियों को निर्देशित किया कि खाद्य पदार्थों को तैयार करने, रखने और परोसने के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन किया जाए।
इसके साथ ही कर्मचारियों को काम करते समय हेड कैप, मास्क, एप्रन और दस्तानों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए। इन उपायों का उद्देश्य खाद्य पदार्थों को बाहरी गंदगी और संभावित संदूषण से बचाना है।
वहीं, कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों को ढककर रखने की सलाह भी दी गई। खाद्य सामग्री को खुले में रखने से उसमें धूल, गंदगी या अन्य बाहरी तत्व पहुंच सकते हैं। ऐसे में उचित भंडारण और साफ-सुथरे वातावरण का ध्यान रखना जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा लाइसेंस को प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए। इससे ग्राहकों को प्रतिष्ठान की खाद्य सुरक्षा संबंधी स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकती है और नियामकीय नियमों के पालन को प्रोत्साहन मिलता है।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन कारोबारियों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। एक ओर कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित मानकों के अनुसार खाद्य पदार्थ तैयार करें और बेचें। दूसरी ओर, विभाग की नियमित जांच से नियमों के अनुपालन की निगरानी की जा सकती है।
मुरादाबाद में चलाया गया यह अभियान भी इसी दिशा में एक कदम है। नमूनों की जांच के साथ कारोबारियों को प्रशिक्षण देने से खाद्य सुरक्षा संबंधी कमियों को समझने और उनमें सुधार करने का अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त, साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण के नियमों का पालन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होता है।
हालांकि, अभियान की प्रभावशीलता का आकलन केवल जांच किए गए नमूनों की संख्या से नहीं, बल्कि आगे नियमों के पालन और गुणवत्ता में होने वाले सुधार से भी किया जाना चाहिए। इसके लिए नियमित निरीक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और आवश्यकतानुसार नियमानुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण हैं।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी जरूरी
खाद्य सुरक्षा विभाग के इस अभियान का उद्देश्य खाद्य पदार्थों में अनियमितताओं पर रोक लगाना, कारोबारियों को नियमों के प्रति जागरूक करना और आम जनता को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में मदद करना है। लाल चटनी और दाल के दो नमूनों में रंग से संबंधित अनियमितताएं सामने आने के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी की जरूरत एक बार फिर सामने आई है।
इसके साथ ही, कारोबारियों के प्रशिक्षण से स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। अब अभियान के प्रभाव का आकलन नियमित जांच और नियमों के अनुपालन के आधार पर किया जा सकेगा।
खाद्य पदार्थ खरीदते समय उपभोक्ताओं को भी साफ-सफाई, पैकेजिंग, निर्माण एवं समाप्ति तिथि और उपलब्ध लाइसेंस संबंधी जानकारी पर ध्यान देना चाहिए। इस प्रकार विभागीय निगरानी और उपभोक्ताओं की सतर्कता मिलकर सुरक्षित खाद्य वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

