यूपी में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 से जुड़े अधिकारियों के तबादलों पर रोक, आयोग की अनुमति जरूरी

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रिपोर्ट – डिजिटल उप्रन्यूज़

लखनऊ, 21 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 को पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण पर रोक रहेगी। मतदाता सूची के आलेख्य प्रकाशन से लेकर अंतिम प्रकाशन तक संबंधित अधिकारियों का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि आयोग के निर्देशों का उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य को निर्धारित समयसीमा में सुचारु रूप से पूरा कराना है। इसके साथ ही निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारियों और प्रशासनिक निरंतरता को बनाए रखना भी इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

12 नवंबर को होगा मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन

भारत निर्वाचन आयोग ने अर्हता तिथि 1 जनवरी, 2027 के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम निर्धारित किया है। इस कार्यक्रम के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एकीकृत मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन 12 नवंबर, 2026 को किया जाएगा।

आलेख्य मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नागरिकों को अपने नाम और अन्य विवरणों की जांच करने का अवसर मिलेगा। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है या किसी प्रविष्टि में सुधार की आवश्यकता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराई जा सकेगी।

इस प्रकार, पुनरीक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि आगामी निर्वाचन प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

11 दिसंबर तक स्वीकार किए जाएंगे दावे और आपत्तियां

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 के तहत मतदाता सूची के आलेख्य प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियां प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर से 11 दिसंबर, 2026 तक दावे एवं आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी।

इस अवधि में मतदाता सूची से संबंधित मामलों को नियमानुसार प्रस्तुत किया जा सकेगा। इसके बाद निर्वाचन अधिकारियों द्वारा प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच करते हुए उनका निस्तारण किया जाएगा। आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, इस प्रक्रिया को 28 दिसंबर, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए 4 जनवरी, 2027 की तारीख निर्धारित की गई है। यानी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, नए वर्ष की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

आयोग की अनुमति के बिना नहीं होगा अधिकारियों का तबादला

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के अनुसार, मतदाता सूची के आलेख्य प्रकाशन से अंतिम प्रकाशन तक संबंधित अधिकारियों को आयोग की पूर्व अनुमति के बिना स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा।

इस व्यवस्था के दायरे में जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी समेत पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अन्य अधिकारी शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, आयोग ने निर्देश दिया है कि पुनरीक्षण अवधि के दौरान इन अधिकारियों के पद रिक्त नहीं रखे जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची तैयार करने, दावों और आपत्तियों की जांच करने तथा उनके निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो।

दरअसल, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कई स्तरों पर प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता होती है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की तैनाती में निरंतरता बनाए रखने से निर्धारित समयसीमा का पालन करने में मदद मिल सकती है।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत आयोग का नियंत्रण

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के अंतर्गत मतदाता सूची की तैयारी, पुनरीक्षण और संशोधन से जुड़े अधिकारी संबंधित अवधि में भारत निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माने जाते हैं।

इस प्रावधान के अनुसार, जिस अवधि में अधिकारी मतदाता सूची से संबंधित इन कार्यों के लिए तैनात रहते हैं, उस दौरान वे आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के अधीन कार्य करते हैं।

इसी कानूनी व्यवस्था के तहत आयोग ने पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण को अपनी पूर्व अनुमति से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इससे निर्वाचन संबंधी कार्यों में प्रशासनिक जवाबदेही और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है।

संबंधित विभागों को दिए गए निर्देश

नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों से संबंधित विभागों को अवगत करा दिया गया है। अधिकारियों को निर्धारित कार्यक्रम और दिशा-निर्देशों के अनुरूप पुनरीक्षण कार्य संपन्न कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी।

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 के दौरान मतदाता सूची के प्रकाशन, दावे एवं आपत्तियों की प्राप्ति, उनके निस्तारण और अंतिम सूची जारी करने तक विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जाएगा। इसलिए संबंधित अधिकारियों की उपलब्धता और जिम्मेदारियों का निरंतर निर्वहन महत्वपूर्ण रहेगा।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक व्यवस्था को स्पष्ट कर दिया है। 12 नवंबर, 2026 को आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन से शुरू होने वाली प्रक्रिया 4 जनवरी, 2027 को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ पूरी होगी। इस पूरी अवधि में पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए आयोग की पूर्व अनुमति अनिवार्य रहेगी। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन बनाने की प्रक्रिया को सुचारु, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखना है।