घाटमपुर आबकारी कार्यालय की जमीन पर बाउंड्री वॉल को लेकर विवाद बढ़ा, बार एसोसिएशन में नाराजगी
रिपोर्ट – शुभम साहू
घाटमपुर : घाटमपुर में आबकारी कार्यालय की जमीन पर बाउंड्री वॉल निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आबकारी विभाग की ओर से जमीन पर बाउंड्री वॉल बनवाने का काम शुरू कराए जाने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। विभाग के जिला आबकारी अधिकारी (DEO) ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवसिंह परमार पर आबकारी विभाग की जमीन पर कथित रूप से अवैध स्टैंड और कैंटीन संचालित करने का आरोप लगाया है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर बार एसोसिएशन में नाराजगी की बात सामने आ रही है।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ आबकारी विभाग अपनी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कह रहा है, तो दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि उक्त स्थान पर लंबे समय से वाहन स्टैंड और कैंटीन संचालित होने से लोगों को सुविधा मिल रही थी। ऐसे में बाउंड्री वॉल निर्माण को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आबकारी विभाग ने अतिक्रमण का लगाया आरोप
आबकारी विभाग के अनुसार, घाटमपुर स्थित कार्यालय की जमीन पर लंबे समय से कथित रूप से अतिक्रमण किया जा रहा है। विभाग का आरोप है कि परिसर की जमीन का इस्तेमाल वाहन स्टैंड और कैंटीन चलाने के लिए किया जा रहा था। इससे विभागीय कार्यों के संचालन और जमीन के उपयोग में परेशानी उत्पन्न हो रही थी।
इसी के मद्देनजर विभाग ने जमीन को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्री वॉल बनवाने का निर्णय लिया। विभाग का कहना है कि सरकारी भूमि की सुरक्षा करना और उस पर अनधिकृत गतिविधियों को रोकना उसकी जिम्मेदारी है। इसलिए जमीन की सीमाओं को सुरक्षित करने के उद्देश्य से निर्माण कार्य शुरू कराया गया है।
हालांकि, जमीन पर कथित अतिक्रमण और स्टैंड व कैंटीन के संचालन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
बाउंड्री वॉल निर्माण से बढ़ी नाराजगी
आबकारी विभाग की ओर से बाउंड्री वॉल निर्माण शुरू कराए जाने के बाद बार एसोसिएशन में नाराजगी की बात सामने आई है। इस मामले में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवसिंह परमार का नाम चर्चा में है। विभाग की ओर से उन पर जमीन पर अवैध रूप से स्टैंड और कैंटीन संचालित करने का आरोप लगाया गया है।
दूसरी ओर, विवाद के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित जमीन का वास्तविक उपयोग क्या रहा है और वहां वाहन स्टैंड तथा कैंटीन के संचालन की स्थिति क्या थी। इन बिंदुओं पर राजस्व अभिलेखों, जमीन की सीमाओं और संबंधित पक्षों के दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।
इसके अलावा, यदि जमीन के इस्तेमाल या निर्माण कार्य को लेकर किसी पक्ष को आपत्ति है, तो प्रशासनिक स्तर पर उसका समाधान निकाला जाना आवश्यक है। इससे विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिल सकता है।
स्थानीय लोगों ने बताई सुविधा की बात
स्थानीय लोगों के अनुसार, संबंधित जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी और यहां वाहन स्टैंड तथा कैंटीन संचालित होने से लोगों को सुविधा मिलती थी। उनका कहना है कि इस स्थान का इस्तेमाल आसपास आने-जाने वाले लोगों की जरूरतों के लिए किया जा रहा था।
हालांकि, स्थानीय लोगों की इस दलील से जमीन के स्वामित्व या उसके व्यावसायिक उपयोग की वैधता अपने आप साबित नहीं होती। सरकारी जमीन पर किसी गतिविधि का संचालन नियमानुसार हो रहा था या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
ऐसे में विवाद का समाधान निकालने के लिए जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, उपयोग की अनुमति और निर्माण की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि किसी पक्ष के पास वैध दस्तावेज या आपत्ति है, तो उसे भी उचित मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए।
पुलिस की मौजूदगी में निर्माण कार्य की चर्चा
मिली जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग ने बाउंड्री वॉल निर्माण का काम शुरू करा दिया है। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल की मौजूदगी की बात भी कही जा रही है। हालांकि, पुलिस की तैनाती और निर्माण कार्य से संबंधित आधिकारिक विवरण की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
ऐसे मामलों में निर्माण कार्य के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी पक्ष को आपत्ति है, तो उसे कानून के दायरे में रहते हुए अपनी शिकायत संबंधित अधिकारियों के सामने रखनी चाहिए। इससे मौके पर किसी प्रकार के तनाव की स्थिति बनने से बचाया जा सकता है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की उठ रही मांग
घाटमपुर आबकारी कार्यालय की जमीन पर बाउंड्री वॉल को लेकर बढ़ते विवाद के बीच प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग उठ रही है। स्थानीय स्तर पर यह अपेक्षा की जा रही है कि संबंधित अधिकारी जमीन के दस्तावेजों, सीमांकन और उपयोग की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराएं।
इसके साथ ही, आबकारी विभाग और बार एसोसिएशन से जुड़े पक्षों की बात सुनकर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की जरूरत है। यदि जमीन की सीमा या उसके उपयोग को लेकर कोई भ्रम है, तो आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर उसे दूर किया जा सकता है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में आबकारी विभाग की कार्रवाई, बार एसोसिएशन की नाराजगी और स्थानीय लोगों की दलीलें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है और बाउंड्री वॉल निर्माण को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।

