कानपुर देहात में दिव्यांगजनों की 52 शिकायतें दर्ज, मौके पर प्रमाण पत्र जारी और सहायक उपकरण किये गए वितरित
रिपोर्ट – विशाल मिश्रा
कानपुर देहात: दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विकास भवन सभागार, माती में राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन उत्तर प्रदेश प्रो. हिमांशु शेखर झा की अध्यक्षता में मोबाइल कोर्ट का आयोजन किया गया। इस दौरान कुल 52 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें आवास, शौचालय, राशन कार्ड और मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल से संबंधित समस्याएं प्रमुख रहीं। राज्य आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मोबाइल कोर्ट के दौरान कुछ समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया। दिव्यांग बोर्ड ने दो लाभार्थियों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए, जबकि जिला पूर्ति विभाग ने दो लोगों के राशन कार्ड में यूनिट से संबंधित समस्या का निस्तारण किया। इसके अलावा, जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और कान की मशीन जैसे सहायक उपकरण वितरित किए गए।
दिव्यांगजनों की समस्याओं के समाधान पर जोर
मोबाइल कोर्ट का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उनकी शिकायतों का समाधान करना और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की मूल भावना के अनुरूप शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं में दिव्यांगजनों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
राज्य आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि दिव्यांगजनों से संबंधित शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र व्यक्ति को सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मोबाइल कोर्ट में प्राप्त 52 शिकायतों के माध्यम से दिव्यांगजनों ने अपनी विभिन्न समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। इनमें आवास, शौचालय, राशन कार्ड और मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल की मांग से संबंधित मामले शामिल थे। राज्य आयुक्त ने संबंधित विभागों को शिकायतों की प्रकृति के अनुसार कार्रवाई करने और निर्धारित समयसीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सप्ताह में तीन दिन दिव्यांग बोर्ड आयोजित करने के निर्देश
मोबाइल कोर्ट के दौरान दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र और विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया गया। राज्य आयुक्त ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद में सप्ताह में तीन दिन दिव्यांग बोर्ड का आयोजन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए पहले से लंबित आवेदनों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। इसके साथ ही, यूडीआईडी जारी करने की प्रक्रिया भी निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जाए, ताकि पात्र दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में अनावश्यक देरी न हो।
दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी दिव्यांगजनों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। इनके माध्यम से पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, सुविधाओं और सहायता कार्यक्रमों का लाभ प्राप्त करने में मदद मिलती है। ऐसे में लंबित आवेदनों का निस्तारण और नियमित दिव्यांग बोर्ड का आयोजन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दो लाभार्थियों को मौके पर जारी हुए प्रमाण पत्र
मोबाइल कोर्ट के दौरान दिव्यांग बोर्ड की ओर से विनय और रामविलास को मौके पर ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए। इससे संबंधित लाभार्थियों को प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ा।
इसी तरह, जिला पूर्ति विभाग ने रामजी और मान सिंह के राशन कार्ड में यूनिट से संबंधित समस्या का मौके पर ही समाधान किया। इस कार्रवाई से दोनों लाभार्थियों को तत्काल राहत मिली।
इन मामलों के निस्तारण से मोबाइल कोर्ट की उपयोगिता सामने आई। इस तरह के आयोजन का उद्देश्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराकर दिव्यांगजनों की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
हालांकि, मोबाइल कोर्ट में दर्ज सभी 52 शिकायतों का मौके पर निस्तारण होने की जानकारी नहीं दी गई है। अधिकारियों को शेष शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जरूरतमंदों को ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और कान की मशीन वितरित
कार्यक्रम के दौरान राज्य आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा ने जरूरतमंद दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण भी वितरित किए। इसके तहत सर्वेश कुमार को ट्राईसाइकिल प्रदान की गई। वहीं, कु. सेजल और रामलखन को कान की मशीन दी गई। इसके अतिरिक्त अंश को व्हीलचेयर प्रदान की गई।
सहायक उपकरण दिव्यांगजनों की दैनिक गतिविधियों को आसान बनाने और उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने में सहायक होते हैं। ट्राईसाइकिल और व्हीलचेयर से आवागमन में सुविधा मिल सकती है, जबकि कान की मशीन सुनने में कठिनाई का सामना करने वाले लाभार्थियों के लिए उपयोगी होती है।
इस दौरान पात्र लाभार्थियों तक आवश्यक उपकरण पहुंचाने और उनकी जरूरतों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिलाने पर जोर
राज्य आयुक्त ने कहा कि दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
इसके साथ ही, शिक्षा, शैक्षणिक संस्थानों और रोजगार में आरक्षण से संबंधित प्रावधानों, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ पात्र दिव्यांगजनों तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया।
उन्होंने दिव्यांगजनों के प्रति समाज में व्याप्त भेदभाव समाप्त करने और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन जीने, शिक्षा प्राप्त करने, रोजगार के अवसरों से जुड़ने और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी करने के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है।
कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
मोबाइल कोर्ट के दौरान मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जयगोविन्द, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी विनय उत्तम सहित विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि दिव्यांगजनों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समयसीमा में उनका निस्तारण किया जाए। साथ ही, प्रमाण पत्र जारी करने, राशन कार्ड संबंधी समस्याओं और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने जैसी आवश्यक सेवाओं को सरल और सुलभ बनाया जाए।
कुल मिलाकर, कानपुर देहात में आयोजित मोबाइल कोर्ट दिव्यांगजनों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही। इस दौरान 52 शिकायतें दर्ज की गईं, दो लाभार्थियों को मौके पर दिव्यांगता प्रमाण पत्र मिले, दो राशन कार्डों की समस्या सुलझाई गई और जरूरतमंदों को सहायक उपकरण वितरित किए गए। अब संबंधित विभागों के सामने शेष शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।

