मथुरा के सदर में 60 फीट के रावण का दहन, कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने किया रामलीला का उद्घाटन
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: विजयादशमी के अवसर पर मथुरा के सदर बाजार में श्री सदर बाजार रामलीला कमेटी के तत्वावधान में दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। रावण दहन के साथ ही पूरा परिसर भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर रामलीला का उद्घाटन किया। इसके बाद रामलीला मंचन के माध्यम से मेघनाद वध, अहिरावण वध, रावण वध और भगवान श्रीराम के माता सीता से पुनर्मिलन की लीलाओं का मंचन किया गया।
दशहरा उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने रामलीला का आनंद लिया। वहीं, मंचन के जरिए भगवान श्रीराम की विजय, धर्म की स्थापना और अधर्म पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने किया रामलीला का उद्घाटन
श्री सदर बाजार रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने किया। उन्होंने धनुष पर तीर चढ़ाकर रामलीला का उद्घाटन किया। इसके साथ ही धार्मिक आयोजन की शुरुआत हुई और मंच पर रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया।
रामलीला भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खासकर दशहरे के अवसर पर भगवान श्रीराम और रावण के युद्ध का मंचन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसी परंपरा के तहत सदर बाजार में भी रामलीला का आयोजन किया गया।
मेघनाद वध के बाद रावण को लगा बड़ा झटका
रामलीला मंचन के दौरान सबसे पहले मेघनाद वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम की सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध चल रहा था। इसी दौरान लक्ष्मण और मेघनाद के बीच भीषण युद्ध हुआ। अंततः लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया।
मेघनाद की मृत्यु की खबर सुनकर रावण दुखी हो गया। इसके बाद उसने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए पाताल लोक के राजा और अपने पुत्र अहिरावण की सहायता लेने का निर्णय किया। इस प्रसंग के माध्यम से दर्शकों को रामायण के युद्ध से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से परिचित कराया गया।
हनुमान जी ने अहिरावण का किया वध
रामलीला में अहिरावण वध का प्रसंग भी आकर्षण का केंद्र रहा। मंचन के अनुसार, अहिरावण ने छलपूर्वक विभीषण का रूप धारण किया और भगवान श्रीराम तथा लक्ष्मण को मायावी तरीके से पाताल लोक ले गया।
जब हनुमान जी को प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के वहां नहीं होने की जानकारी मिली, तो उन्होंने उनकी खोज शुरू की। इसके बाद उन्हें पता चला कि अहिरावण दोनों को पाताल लोक ले गया है। हनुमान जी तुरंत पाताल लोक पहुंचे और अहिरावण का सामना किया।
कथा के अनुसार, हनुमान जी ने अहिरावण को पराजित कर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को उसके चंगुल से मुक्त कराया। इस प्रसंग ने दर्शकों को हनुमान जी की भक्ति, साहस और अपने आराध्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
राम और रावण के बीच हुआ निर्णायक युद्ध
अहिरावण और मेघनाद के वध के बाद रावण की सेना कमजोर पड़ गई। इसके बावजूद रावण ने हार स्वीकार नहीं की और भगवान श्रीराम की सेना से युद्ध करने पहुंच गया। इसके बाद राम और रावण के बीच निर्णायक युद्ध का मंचन हुआ।
रामलीला के अनुसार, युद्ध के दौरान भगवान श्रीराम के बाणों से रावण के सिर कटते रहे, लेकिन उसके सिर दोबारा प्रकट हो जाते थे। इसी बीच विभीषण ने भगवान श्रीराम को रावण की नाभि में अमृत होने की जानकारी दी।
इसके बाद भगवान श्रीराम ने रावण की नाभि पर बाण चलाया और उसका अंत हो गया। इस प्रसंग के साथ ही अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया। मंचन के दौरान दर्शकों ने भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए।
रावण के अंतिम उपदेश से मिला नीति का संदेश
रामलीला में रावण के अंतिम समय से जुड़ा प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण को रावण से ज्ञान प्राप्त करने के लिए उसके पास भेजा। रावण ने अपने अनुभवों के आधार पर नीति, ज्ञान और व्यवहार से जुड़ी बातें बताईं।
इस प्रसंग में यह संदेश दिया गया कि व्यक्ति को अहंकार, लालच, क्रोध और वैर से बचना चाहिए। साथ ही जीवन में ज्ञान, विवेक और नीति को महत्व देना चाहिए। रामलीला के माध्यम से दर्शकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि ज्ञान और सामर्थ्य होने के बावजूद अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बन सकता है।
60 फीट के रावण के पुतले का हुआ दहन
दशहरा कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन रहा। रावण दहन के साथ ही भगवान श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे। इस आयोजन ने विजयादशमी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित किया।
दशहरा पर्व को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसलिए रावण दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज को सत्य, मर्यादा और सदाचार का संदेश देने का अवसर भी है।
कार्यक्रम में ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
श्री सदर बाजार रामलीला कमेटी के आयोजन में कमेटी अध्यक्ष अलका उपमन्यु एडवोकेट, पूर्व पार्षद रवि यादव, केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला यादव, पार्षद विष्णु सैनी, भोले यादव, अनिल अग्रवाल, नरेंद्र भारद्वाज, बांकेलाल शर्मा, विनोद यादव, नवनीत सरन सक्सेना, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष घनश्याम लोधी, कैबिनेट मंत्री प्रतिनिधि मनोज फौजदार, रविंद्र भारद्वाज, गुंजन खत्री और राजवीर चौधरी शामिल रहे।
इसके अलावा भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष प्रतिमा सिंह, डॉ. एसपीएस चौहान, दीपक यादव, हरेश शर्मा, दीपक शर्मा, मोहन मीणा, बार एसोसिएशन अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह, सचिव मनोज शर्मा और विप्र नेता गौरव शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
इस प्रकार, सदर बाजार में आयोजित रामलीला और रावण दहन कार्यक्रम धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक परंपरा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने और जीवन में सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।

