कानपुर के शास्त्री नगर में भव्य दशहरा मेला, सेठ मुरारी लाल अग्रवाल ने किया रावण दहन
रिपोर्ट- हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर नगर। विजयदशमी के पावन अवसर पर कानपुर के शास्त्री नगर में भव्य दशहरा मेले का आयोजन किया गया। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और उत्साह से सराबोर इस आयोजन में रामलीला मंचन, भगवान श्रीराम की आरती, आकर्षक आतिशबाजी और रावण दहन प्रमुख आकर्षण रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ उद्योगपति एवं समाजसेवी सेठ मुरारी लाल अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। इस दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
शास्त्री नगर में विजयदशमी पर दिखा उत्साह
विजयदशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार सत्य, धर्म और सदाचार की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कानपुर के शास्त्री नगर में दशहरा मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और धार्मिक उत्सव का आनंद उठाया।
मेले के दौरान क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। लोगों ने परिवार और परिचितों के साथ कार्यक्रम में पहुंचकर रामलीला का मंचन देखा। वहीं, आयोजन में शामिल बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के बीच भी खासा उत्साह दिखाई दिया। इस प्रकार दशहरा मेला धार्मिक आयोजन के साथ-साथ लोगों को आपस में जोड़ने का माध्यम भी बना।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे वरिष्ठ उद्योगपति एवं समाजसेवी सेठ मुरारी लाल अग्रवाल का आयोजक सर्वेश शुक्ला ने जोरदार स्वागत किया। इसके बाद आयोजन से जुड़े कार्यक्रमों का सिलसिला आगे बढ़ा। मुख्य अतिथि की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
रामलीला मंचन ने दिया मर्यादा और आदर्शों का संदेश
दशहरा मेले का प्रमुख आकर्षण भव्य रामलीला मंचन रहा। भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों पर आधारित इस प्रस्तुति को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक एकत्र हुए। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
रामलीला भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से समाज को मर्यादा, कर्तव्य, सत्य, धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। भगवान श्रीराम का जीवन आदर्श आचरण और लोककल्याण की भावना का प्रतीक माना जाता है। वहीं, रावण का प्रसंग यह समझाता है कि ज्ञान और शक्ति होने के बावजूद अहंकार तथा अनुचित आचरण व्यक्ति के पतन का कारण बन सकते हैं।
इसी क्रम में मुख्य अतिथि सेठ मुरारी लाल अग्रवाल ने रामलीला में अभिनय करने वाले कलाकारों को भेंट देकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कलाकारों के योगदान की सराहना करते हुए इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों के महत्व को रेखांकित किया। कलाकारों को सम्मानित करने से कार्यक्रम में शामिल लोगों का उत्साह भी बढ़ा।
भगवान श्रीराम की आरती कर लिया आशीर्वाद
रामलीला मंचन के बाद मुख्य अतिथि सेठ मुरारी लाल अग्रवाल ने भगवान श्रीराम की आरती की। इस दौरान धार्मिक श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। आरती के माध्यम से उन्होंने भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया।
विजयदशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की पूजा और आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व व्यक्ति को अपने जीवन में सत्य, न्याय और सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है। इसके साथ ही यह संदेश भी देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सही मार्ग का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
शास्त्री नगर में आयोजित कार्यक्रम में रामलीला और आरती ने लोगों को भारतीय संस्कृति तथा धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। इस तरह आयोजन में मनोरंजन के साथ-साथ आध्यात्मिक और नैतिक संदेश भी देखने को मिला।
रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने मोहा दर्शकों का मन
दशहरा मेले में आकर्षक आतिशबाजी ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी की छटा ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। आतिशबाजी के दौरान लोगों ने कार्यक्रम का आनंद लिया और मेले की रौनक देखते ही बनी।
विजयदशमी पर आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रमों में रामलीला, आतिशबाजी और रावण दहन लोगों के लिए विशेष आकर्षण होते हैं। हालांकि, उत्सव के दौरान सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी सावधानियों का पालन करना भी आवश्यक है। सामूहिक आयोजनों में जिम्मेदारी के साथ भागीदारी करने से त्योहार की खुशियां और भी बेहतर तरीके से साझा की जा सकती हैं।
शास्त्री नगर के दशहरा मेले में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनोरंजक गतिविधियों ने भी लोगों को आकर्षित किया। इससे आयोजन में शामिल दर्शकों को एक ही स्थान पर सांस्कृतिक प्रस्तुति और उत्सव का अनुभव मिला।
सेठ मुरारी लाल अग्रवाल ने किया रावण दहन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुख्य अतिथि सेठ मुरारी लाल अग्रवाल ने रावण के पुतले का दहन किया। जैसे ही रावण दहन हुआ, पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। उपस्थित लोगों ने उत्साह के साथ इस परंपरागत आयोजन को देखा।
रावण दहन विजयदशमी का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक आयोजन माना जाता है। यह भगवान श्रीराम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत की याद दिलाता है। इसके साथ ही यह संदेश देता है कि व्यक्ति को अपने जीवन में अहंकार, अन्याय और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहना चाहिए।
दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। यह पर्व लोगों को अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने, दूसरों के प्रति सम्मान रखने और समाज में सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। रावण दहन के माध्यम से यही संदेश दिया गया कि अंततः सत्य और सदाचार का मार्ग ही समाज को सही दिशा प्रदान करता है।
धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बना मेला
शास्त्री नगर में आयोजित भव्य दशहरा मेले ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश दिया। रामलीला मंचन, भगवान श्रीराम की आरती, कलाकारों का सम्मान, रंग-बिरंगी आतिशबाजी और रावण दहन ने कार्यक्रम को विशेष बनाया।
इसके अलावा, इस तरह के आयोजन स्थानीय लोगों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर देते हैं। नई पीढ़ी भी इनके माध्यम से भारतीय त्योहारों के महत्व और उनसे मिलने वाली सीख को समझ सकती है।

