नासिक ढोल की थाप पर झूमा ब्रज, ब्रज डांडिया नाइट 2026 में गरबा और लोकनृत्यों ने बांधा समां

WhatsApp Image 2026-10-19 at 5.54.52 PM

रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा। धर्म और संस्कृति की नगरी मथुरा में रविवार की शाम संगीत, नृत्य और उल्लास के नाम रही। जवाहर बाग ओपन थिएटर में ब्रज कला चौपाल संस्था की ओर से आयोजित ‘ब्रज डांडिया नाइट 2026’ में नासिक ढोल की गूंज, डांडिया की खनक और गरबा की लय ने ऐसा माहौल बनाया कि पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग गया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने गरबा, डांडिया, बॉलीवुड संगीत और पारंपरिक लोकनृत्यों पर शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया।

‘गुजरात के रंग, ब्रज के संग’ थीम पर सजा सांस्कृतिक आयोजन

इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘गुजरात के रंग, ब्रज के संग’ रखी गई। इसके माध्यम से गुजरात की गरबा परंपरा, मेवाड़ की लोक संस्कृति और ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। परिणामस्वरूप, कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं और कलाओं का सुंदर संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने न केवल संगीत और नृत्य का आनंद लिया, बल्कि पारंपरिक भारतीय संस्कृति की विविधता को भी करीब से महसूस किया। वहीं, युवा प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। पारंपरिक परिधानों और रंगीन सजावट के बीच डांडिया की लय ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के सचिव आशीष कुमार सिंह, ब्रज स्टार ऐश्वर्या कौशिक, श्री डिवाइन ग्रुप के शेखर अग्रवाल, चरन दयाल, अशोका ट्रैवल्स के शरद अग्रवाल, जिला विकास अधिकारी गरिमा खरे, विनीत अग्रवाल, राजेश यादव, इंजीनियर बलबीर सिंह, परवेज, सुनील सोलंकी (ओमैक्स) तथा एमएस कंस्ट्रक्शन और संचीत कंस्ट्रक्शन के बलवीर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।

इस अवसर पर ब्रज कला चौपाल संस्था की संस्थापिका नम्रता सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद माता की आरती और भगवान गणेश की वंदना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। धार्मिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को आध्यात्मिक रंग दिया, जबकि इसके बाद हुई नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों में नया उत्साह भर दिया।

डाकला नृत्य से लेकर मेवाड़ की लोक संस्कृति तक दिखी विविधता

कार्यक्रम की शुरुआत में गुजरात की परंपरा पर आधारित डाकला नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और गुजरात की लोक संस्कृति की झलक दिखाई। इसके बाद बॉलीवुड डांडिया गीतों की धुन पर प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ नृत्य किया।

इसी क्रम में संस्था की संस्थापिका नम्रता सिंह ने कृष्ण भजन प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय हो गया और ब्रज की कृष्ण भक्ति की परंपरा का सुंदर अनुभव सामने आया। दूसरी ओर, मां काली और महिषासुर पर आधारित नृत्य प्रस्तुति ने शक्ति उपासना का संदेश दिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की विजय और शक्ति के महत्व को सांस्कृतिक रूप में दर्शाया गया।

इसके अतिरिक्त, मेवाड़ के पारंपरिक नृत्य ने राजस्थान की लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। कलाकारों की प्रस्तुति, पारंपरिक भाव-भंगिमाओं और संगीत ने कार्यक्रम को विविधतापूर्ण बनाया। इस तरह एक ही मंच पर गुजरात, राजस्थान और ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया।

नासिक ढोल की गूंज पर गरबा और डांडिया में झूमे प्रतिभागी

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा गरबा और डांडिया की प्रस्तुतियां रहीं। जैसे ही नासिक ढोल की गूंज तेज हुई, प्रतिभागियों का उत्साह और बढ़ गया। डांडिया की लय पर लोग समूह में थिरकते नजर आए। पारंपरिक संगीत के साथ बॉलीवुड डांडिया गीतों ने भी आयोजन में चार चांद लगा दिए।

इसके साथ ही मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगीत, नृत्य और खेलों के मेल ने कार्यक्रम को सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए मनोरंजक बनाया। देर शाम तक जवाहर बाग ओपन थिएटर में उत्सव का माहौल बना रहा।

विशेष बात यह रही कि कार्यक्रम में पारंपरिक संस्कृति के साथ आधुनिक मनोरंजन का भी संतुलित समावेश देखने को मिला। इससे प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला, वहीं दर्शकों को अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेने का मौका मिला।

नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ना आयोजन का उद्देश्य

ब्रज कला चौपाल संस्था की संस्थापिका नम्रता सिंह ने बताया कि ‘ब्रज डांडिया नाइट 2026’ आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाना और नई पीढ़ी को भारतीय लोक संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान बढ़ाने के साथ पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि संगीत और नृत्य लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने का अवसर देते हैं। इसलिए, इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और भारतीय परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

कार्यक्रम में जतिन प्रताप सिंह, राज विक्रम सिंह, पूजा सिसोदिया और हनी शर्मा इवेंट्स का विशेष सहयोग रहा। आयोजन के माध्यम से ब्रज की सांस्कृतिक धरती पर गुजरात, मेवाड़ और बॉलीवुड संगीत की रंगीन छटा देखने को मिली।

कुल मिलाकर, ‘ब्रज डांडिया नाइट 2026’ मथुरा में सांस्कृतिक एकता, लोक परंपराओं और सामूहिक उत्साह का यादगार उदाहरण बनी। नासिक ढोल की थाप, गरबा की लय और डांडिया की खनक ने उपस्थित लोगों को देर शाम तक उत्सव से जोड़े रखा। साथ ही, इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराएं एक मंच पर आकर आपसी सम्मान, सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत बना सकती हैं।