मेरठ दुर्गाबाड़ी में महाअष्टमी पर दृष्टि बनर्जी के धुनुची नृत्य का जलवा, सोशल मीडिया पर छाईं वायरल गर्ल

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रिपोर्ट – मनीष पराशर

मेरठ: बंगाली संस्कृति, भक्ति और पारंपरिक कला के अनूठे संगम के रूप में मेरठ की बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति में आयोजित 220वां दुर्गा पूजा महोत्सव श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। महाअष्टमी के पावन अवसर पर मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच 14 वर्षीय दृष्टि बनर्जी ने अपने धुनुची नृत्य से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उनके नृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद से ही दृष्टि को शहर में एक नई पहचान मिल रही है।

दृष्टि का प्रदर्शन केवल नृत्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें बंगाली परंपरा, पारिवारिक संस्कार और मां दुर्गा के प्रति गहरी आस्था की झलक भी दिखाई दी। खास बात यह है कि दृष्टि बचपन से ही दुर्गाबाड़ी के धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण में पली-बढ़ी हैं। उनके परिवार का इस पारंपरिक नृत्य से पुराना जुड़ाव रहा है।

महाअष्टमी पर विशेष पूजा-अर्चना से भक्तिमय हुआ दुर्गाबाड़ी परिसर

220वें दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतर्गत महाअष्टमी पर दुर्गाबाड़ी समिति में विशेष पूजा का आयोजन किया गया। दिन की शुरुआत मां दुर्गा की भव्य सुबह की पूजा से हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की।

इस वर्ष पंचांग के अनुसार अतिरिक्त तिथि होने के कारण महाअष्टमी से जुड़े धार्मिक आयोजन दो दिनों तक विशेष भक्ति भाव के साथ मनाए जा रहे हैं। ऐसे में दुर्गाबाड़ी परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही और धार्मिक गतिविधियों का माहौल बना रहा।

वहीं, शाम को आयोजित धुनुची नृत्य ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। पारंपरिक धाक की गूंज, धुनुची से उठता सुगंधित धुआं और नृत्य की लय ने बंगाली संस्कृति की खूबसूरत तस्वीर पेश की। इसी दौरान दृष्टि बनर्जी का प्रदर्शन लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया।

14 वर्षीय दृष्टि बनर्जी के धुनुची नृत्य ने खींचा लोगों का ध्यान

दृष्टि बनर्जी महज 14 वर्ष की हैं और सातवीं कक्षा में पढ़ती हैं। इतनी कम उम्र में पारंपरिक धुनुची नृत्य के प्रति उनका समर्पण लोगों को प्रभावित कर रहा है। महाअष्टमी के कार्यक्रम में उन्होंने धुनुची के साथ नृत्य प्रस्तुत किया। उनके प्रदर्शन के दौरान हाथों और मुंह में धुनुची रखने की शैली ने दर्शकों का ध्यान खींचा। हालांकि, आग और अंगारों से जुड़े ऐसे करतब जोखिमपूर्ण हो सकते हैं, इसलिए इन्हें प्रशिक्षित मार्गदर्शन और उचित सुरक्षा के बिना दोहराना उचित नहीं है।

दृष्टि के नृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनकी कला की चर्चा मेरठ के साथ-साथ अन्य स्थानों पर भी हो रही है। लोग उनकी नृत्य शैली, आत्मविश्वास और पारंपरिक संस्कृति से जुड़ाव की सराहना कर रहे हैं।

दृष्टि बताती हैं कि उनका बचपन दुर्गाबाड़ी समिति के वातावरण में बीता है। उन्हें धुनुची नृत्य की प्रेरणा सबसे पहले अपने पिता से मिली। इसके अलावा उनकी दादी और मां भी यह नृत्य करती रही हैं। परिवार के सदस्यों को देखकर ही उनके मन में इस कला के प्रति रुचि विकसित हुई।

पिता के प्रोत्साहन और परिवार के सहयोग से बढ़ा आत्मविश्वास

दृष्टि के अनुसार, शुरुआत में उन्हें थोड़ी घबराहट जरूर हुई थी, लेकिन पिता के प्रोत्साहन ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। उनके पिता हमेशा उन्हें आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित करते हैं। दृष्टि बताती हैं कि उनके पिता उनसे कहते हैं कि उन्हें अपनी कला के माध्यम से आगे बढ़ना है और अपनी अलग पहचान बनानी है।

धुनुची नृत्य के दौरान डर लगने के सवाल पर दृष्टि ने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उनका मानना है कि मां का आशीर्वाद उन्हें हिम्मत देता है। हालांकि, उनकी यह भावना धार्मिक विश्वास को दर्शाती है, जबकि आग से जुड़े प्रदर्शन में सुरक्षा उपायों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है।

दृष्टि कहती हैं कि दुर्गाबाड़ी समिति ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतरीन मंच दिया है। वह पूरे साल दुर्गा पूजा के इन पांच दिनों का इंतजार करती हैं। उनके लिए यह आयोजन केवल नृत्य करने का अवसर नहीं, बल्कि सेवा, प्रसाद वितरण, पूजा-अर्चना और मां दुर्गा की विदाई तक हर गतिविधि में शामिल होने का अनुभव है।

मां प्रीति बनर्जी बोलीं- मां दुर्गा का आशीर्वाद और गॉड गिफ्टेड है प्रतिभा

दृष्टि की मां प्रीति बनर्जी अपनी बेटी के प्रदर्शन से बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि दृष्टि को बचपन से ही नृत्य में गहरी रुचि रही है। उसमें कुछ अलग करने और आगे बढ़ने की इच्छा शुरुआती दिनों से दिखाई देने लगी थी।

प्रीति बनर्जी के मुताबिक, बेटी को इस तरह धुनुची नृत्य करते देखना उनके लिए भावुक कर देने वाला अनुभव है। उन्होंने कहा कि दृष्टि की प्रस्तुति देखकर उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं और वह एक पेशेवर नृत्यांगना की तरह प्रदर्शन करती है। उन्होंने अपनी बेटी की प्रतिभा को मां दुर्गा का आशीर्वाद और गॉड गिफ्टेड बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि परिवार में पिता, दादा-दादी सहित कई सदस्य इस पारंपरिक नृत्य से जुड़े रहे हैं। ऐसे में दृष्टि को बचपन से ही इस कला को देखने और सीखने का अवसर मिला। परिवार की इच्छा है कि वह नृत्य के क्षेत्र में आगे बढ़े और अपनी प्रतिभा से नाम रोशन करे।

दुर्गाबाड़ी समिति ने की दृष्टि के प्रदर्शन की सराहना

दुर्गाबाड़ी समिति के अध्यक्ष अमिताभ मुखर्जी और महासचिव अभय मुखर्जी ने बताया कि महाअष्टमी शक्ति, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस अवसर पर दृष्टि का सांस्कृतिक प्रदर्शन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कलाओं के माध्यम से नई पीढ़ी का अपनी संस्कृति से जुड़ना महत्वपूर्ण है।

दृष्टि की प्रस्तुति ने एक बार फिर यह दिखाया कि परिवार और सांस्कृतिक संस्थाओं का सहयोग बच्चों की प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही, पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाते समय कलाकारों की सुरक्षा और उचित प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता देना जरूरी है।

कुल मिलाकर, मेरठ की बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति का 220वां दुर्गा पूजा महोत्सव धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के कारण चर्चा में है। वहीं, दृष्टि बनर्जी का धुनुची नृत्य इस आयोजन की खास पहचान बन गया है। उनकी प्रतिभा, परिवार का समर्थन और बंगाली संस्कृति के प्रति लगाव ने उन्हें सोशल मीडिया पर नई पहचान दिलाई है।