कानपुर: चकरपुर मंडी में दुकान पर कब्जे का आरोप, पीड़ित ने सीएम योगी से लगाई न्याय की गुहार

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रिपोर्ट – रामेश्वर सिंह

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में सचेंडी थाना क्षेत्र स्थित चकरपुर फल एवं सब्जी मंडी में एक व्यापारी की दुकान पर कथित रूप से कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित वेद प्रकाश सिंह ने सुनील कुमार गुप्ता और उनके कई साथियों पर दुकान पर कब्जा करने, पुलिस कार्रवाई को प्रभावित कराने और अब मुकदमे में लगाई गई अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पीड़ित का यह भी कहना है कि उसे जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

पीड़ित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा न्याय दिलाने की मांग की है। मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि चकरपुर फल एवं सब्जी मंडी मंडी परिषद से जुड़ी व्यवस्था के अंतर्गत आती है। ऐसे में मंडी परिसर में व्यापारियों की दुकानों और उनके अधिकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

व्यापार के नाम पर जगह मांगने से शुरू हुआ विवाद

वेद प्रकाश सिंह के आरोपों के अनुसार, विवाद की शुरुआत उस समय हुई, जब कुछ लोगों ने उनके पिता से व्यापार करने के उद्देश्य से दुकान में थोड़ी जगह देने का अनुरोध किया था। पीड़ित का दावा है कि शुरुआत में सीमित जगह देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में संबंधित लोगों ने कथित तौर पर पूरी दुकान पर कब्जा कर लिया।

पीड़ित का कहना है कि दुकान उनके परिवार के व्यापार से जुड़ी हुई है और इस विवाद के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि जिस स्थान पर सीमित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जगह दी गई थी, वहां धीरे-धीरे दूसरे पक्ष ने अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया।

हालांकि, दुकान के स्वामित्व, आवंटन, कब्जे की प्रकृति और दोनों पक्षों के बीच हुए कथित समझौते से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन तथ्यों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों और प्रशासनिक जांच के आधार पर ही हो सकेगी।

वर्ष 2024 में दर्ज कराया था मुकदमा

वेद प्रकाश सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस मामले में वर्ष 2024 में मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़ित का दावा है कि मामले में आरोपित पक्ष के प्रभाव और रसूख के कारण जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई।

पीड़ित का कहना है कि वह इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें आशंका है कि उनके मामले में निष्पक्षता से कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने के पीछे जांच अधिकारी की क्या वजह रही, विवेचना में कौन-कौन से साक्ष्य सामने आए और पुलिस ने किन तथ्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

किसी मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाया जाना अपने आप में आरोपों के गलत या सही होने का अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं माना जा सकता। संबंधित मामले में आगे की प्रक्रिया और अंतिम रिपोर्ट की स्थिति का निर्धारण उपलब्ध अभिलेखों तथा सक्षम न्यायालय के आदेशों के आधार पर किया जा सकता है।

अंतिम रिपोर्ट स्वीकार करने के लिए दबाव बनाने का आरोप

पीड़ित वेद प्रकाश सिंह का आरोप है कि अब उन पर अंतिम रिपोर्ट स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने सुनील कुमार गुप्ता और उनके कई साथियों पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

पीड़ित के मुताबिक, वह चाहते हैं कि मामले की दोबारा निष्पक्षता से जांच हो और दुकान से संबंधित विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाए। उनका आरोप है कि न्याय की मांग करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली है।

हालांकि, कथित धमकियों के संबंध में किसी स्वतंत्र साक्ष्य, संबंधित पक्ष का बयान या पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से न्याय की मांग

मामले को लेकर पीड़ित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दुकान से संबंधित दस्तावेजों की जांच हो और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा, पीड़ित ने कथित धमकियों के मामले में भी उचित कार्रवाई और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वह कानूनी तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं और उन्हें प्रशासन से न्याय मिलने की उम्मीद है।

इस मामले में पुलिस और मंडी परिषद के संबंधित अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। दुकान के आवंटन या स्वामित्व से संबंधित रिकॉर्ड, पूर्व में दर्ज मुकदमे की विवेचना, अंतिम रिपोर्ट तथा उससे जुड़े न्यायिक अभिलेखों की जांच से विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

निष्पक्ष जांच से सामने आ सकेगी वास्तविक स्थिति

चकरपुर फल एवं सब्जी मंडी से जुड़े इस विवाद में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पुलिस अधिकारी पीड़ित की शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं। साथ ही, मंडी परिषद के अधिकारी दुकान से जुड़े दस्तावेजों और परिसर में कब्जे की स्थिति की जांच करते हैं या नहीं, यह भी अहम रहेगा।

यदि पीड़ित के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, दूसरे पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच हो सके।

फिलहाल, वेद प्रकाश सिंह ने मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से न्याय की अपील की है। अब संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

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