इटावा: स्वतंत्रता सेनानी कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के परिवार के छह सदस्यों के वोट कटने पर उठे सवाल
रिपोर्ट – रोहित सिंह चौहान
इटावा :देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व सांसद कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से गायब होने का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से हट गए। इसके बाद नाम दोबारा जुड़वाने के लिए परिवार ने करीब तीन महीने तक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और तहसील निर्वाचन कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
मामले के सोशल मीडिया पर पहुंचने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। सदर एसडीएम मनोज पाठक ने बताया कि परिवार के सदस्यों के फॉर्म सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुए हैं और उनके नाम मतदाता सूची में अपडेट कराने की प्रक्रिया की जाएगी। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और आम नागरिकों की शिकायतों के निस्तारण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले परिवार के नाम सूची से गायब
कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया का नाम देश के स्वतंत्रता संग्राम और समाजवादी राजनीति से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों में लिया जाता है। उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इटावा के चंबल क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने उस दौर में पांच हजार सशस्त्र लड़ाकों की सेना का नेतृत्व किया था।
आजादी के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और वर्ष 1957 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद 1962 और 1977 में भी उन्होंने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की। उनकी पत्नी स्वर्गीय सरला भदौरिया भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहीं। वह इटावा की पहली महिला राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं और उत्तर प्रदेश में महिला एवं बाल कल्याण विभाग की अध्यक्ष भी रहीं।
इस ऐतिहासिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची में नहीं मिलने से मामला चर्चा में आ गया है। परिवार का कहना है कि उनका परिवार लगभग 150 वर्षों से इटावा में रह रहा है। इसके बावजूद उन्हें अपने मताधिकार से संबंधित समस्या के समाधान के लिए लंबे समय तक अधिकारियों से संपर्क करना पड़ा।
तीन महीने तक बीएलओ और निर्वाचन कार्यालय के चक्कर लगाने का आरोप
कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के पौत्र राघवेंद्र सिंह के अनुसार, एसआईआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में परिवार के छह सदस्यों के नाम नहीं मिले। इनमें रंजना भदौरिया, राहुल भदौरिया, स्मिता भदौरिया, सिद्धार्थ भदौरिया, सुषमा भदौरिया और बोम सिंह के नाम शामिल हैं।
राघवेंद्र सिंह का कहना है कि नाम जुड़वाने के लिए परिवार ने पिछले तीन महीनों से लगातार प्रयास किए। उन्होंने लड़ेती भवन के बीएलओ सौरभ और तहसील निर्वाचन कार्यालय से कई बार संपर्क किया। परिवार के मुताबिक, फोन करने के साथ ही संबंधित कार्यालयों में जाकर भी अपनी समस्या बताई गई, लेकिन उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला।
परिवार ने आरोप लगाया कि कभी आवश्यक दस्तावेजों की कमी तो कभी समय का अभाव बताकर उन्हें वापस भेज दिया जाता था। इससे नाम जुड़वाने की प्रक्रिया लंबी होती चली गई। राघवेंद्र सिंह ने नाम हटाए जाने के पीछे साजिश की आशंका भी जताई है। हालांकि, इस आशंका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नाम हटने के वास्तविक कारणों का स्पष्ट होना प्रशासनिक जांच तथा अभिलेखों के परीक्षण पर निर्भर करेगा।
बसपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीन्द्र भदौरिया ने सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा
मामले को लेकर परिवार के सदस्य और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीन्द्र भदौरिया ने भी आवाज उठाई। उन्होंने जरूरी दस्तावेजों और संबंधित फॉर्म के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर निर्वाचन अधिकारियों से परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की अपील की।
सुधीन्द्र भदौरिया ने परिवार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि लंबे समय से इटावा में रह रहे परिवार के सदस्यों के नाम आखिर किन परिस्थितियों में सूची से हट गए। उन्होंने यह भी कहा कि नाम जुड़वाने के लिए परिवार को इतनी लंबी प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ा।
उनका कहना है कि जिस परिवार का देश की आजादी के संघर्ष और सार्वजनिक जीवन में योगदान रहा है, उसे अपने मतदाता अधिकार से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ना निराशाजनक है। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद निर्वाचन अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया।
एसडीएम ने बताया, फॉर्म जमा नहीं होने से सूची में नहीं आए नाम
इस प्रकरण पर सदर एसडीएम मनोज पाठक ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान परिवार के सदस्यों के फॉर्म जमा नहीं हुए थे। उनके अनुसार, परिवार के कुछ सदस्य लंबे समय से दिल्ली में रह रहे हैं। बीएलओ ने घर जाकर संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय परिवार का कोई सदस्य उपलब्ध नहीं मिला।
एसडीएम के मुताबिक, सोशल मीडिया के माध्यम से फॉर्म प्राप्त हुए हैं और अब परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में अपडेट कराने की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद परिवार को उम्मीद है कि उनके नाम दोबारा सूची में दर्ज हो सकेंगे।
हालांकि, परिवार के आरोपों और प्रशासन के स्पष्टीकरण के बीच यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित नामों को हटाने तथा निर्धारित समय पर फॉर्म जमा नहीं हो पाने की परिस्थितियां क्या थीं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह सुनिश्चित हो सकेगा कि सभी छह सदस्यों के नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में बहाल हो गए हैं।
मतदाता सूची की शुद्धता और शिकायतों के निस्तारण पर चर्चा
यह मामला मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नागरिकों तक सूचना पहुंचाने और उनकी शिकायतों का समय पर समाधान करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर संबंधित व्यक्ति को मतदान के अधिकार के इस्तेमाल में परेशानी हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि नामों की जांच, दस्तावेजों की पुष्टि और सुधार की प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से पूरी हो।
इटावा में सामने आए इस मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। परिवार ने जहां तीन महीने तक परेशान होने का आरोप लगाया है, वहीं एसडीएम ने नाम अपडेट कराने का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि निर्वाचन विभाग कब तक सभी छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची में दर्ज करता है और परिवार की शिकायत का अंतिम समाधान किस प्रकार होता है।

