कानपुर में शारदीय नवरात्र की नवमी पर कन्या पूजन, हवन और भोज का आयोजन

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रिपोर्ट- विवेक कृष्णन दीक्षित

कानपुर। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर कानपुर में मां दुर्गा की आराधना श्रद्धा और भक्ति के साथ की जा रही है। मंदिरों से लेकर घरों तक भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। नवरात्र की नवमी तिथि पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से मां भगवती की पूजा-अर्चना की और हवन के माध्यम से सुख, समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना की। इसी क्रम में भक्त आलोक श्रीवास्तव के यहां कन्या पूजन, हवन और कन्या भोज का आयोजन किया गया। इस दौरान नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया और उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराकर उपहार भेंट किए गए।

मां वैष्णो देवी का कलश स्थापित कर किया पूजन

शारदीय नवरात्र में नवमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इसके साथ ही अनेक श्रद्धालु नवरात्र व्रत का समापन कन्या पूजन और हवन के साथ करते हैं। मान्यता है कि कन्याओं में देवी का स्वरूप देखकर उनकी सेवा और सम्मान करने से मां भगवती की कृपा प्राप्त होती है।

इसी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए कानपुर में भक्त आलोक श्रीवास्तव ने श्री मां वैष्णो देवी का कलश स्थापित कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। पूजा के दौरान मां भगवती का स्मरण किया गया और परिवार सहित सभी के सुख, शांति, समृद्धि तथा मंगलमय जीवन की कामना की गई। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन संपन्न कराया गया।

हवन के दौरान श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ पूजा में सहभागिता की। पूरे आयोजन में भक्ति और श्रद्धा का भाव देखने को मिला। वहीं, नवमी के अवसर पर कन्या पूजन को विशेष महत्व देते हुए नौ कन्याओं को आमंत्रित किया गया।

नौ कन्याओं का पूजन कर कराया गया भोज

पूजा और हवन के बाद नौ कन्याओं का पारंपरिक तरीके से पूजन किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र में कन्या पूजन को देवी शक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के साथ आलोक श्रीवास्तव ने कन्याओं का आदर-सत्कार किया और उन्हें भोजन कराया।

कन्या भोज के दौरान हलवा, चना, पूड़ी, सब्जी, दही और जलेबी सहित विभिन्न प्रसाद परोसे गए। कन्याओं को भोजन कराने के बाद उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया गया। इसके साथ ही उन्हें उपहार भी भेंट किए गए। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करने के साथ-साथ मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था प्रकट करना रहा।

इस अवसर पर परिवार और श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ मां भगवती का स्मरण किया। नवरात्र के अंतिम दिनों में कन्या पूजन और भोज के ऐसे आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सेवा, सम्मान और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देते हैं।

‘सच्चे मन से की गई पूजा मां भगवती स्वीकार करती हैं’

इस मौके पर भक्त आलोक श्रीवास्तव ने मां भगवती के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि मां भवानी की कृपा से ही जीवन चल रहा है। उनके अनुसार, जो भी भक्त सच्चे मन से मां का गुणगान करता है और उनके दर्शन कर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करता है, उसे आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ में दिखावे से अधिक महत्व सच्ची श्रद्धा और भाव का होता है। व्यक्ति के पास संसाधन कम हों, तब भी यदि वह पूरी आस्था के साथ मां भगवती का स्मरण करता है, तो उसकी भक्ति का अपना विशेष महत्व है। उन्होंने यह भी कहा कि मां के प्रति विश्वास भक्तों को कठिन परिस्थितियों में धैर्य और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

आलोक श्रीवास्तव ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मां दुर्गा का भजन-कीर्तन और पूजन करते रहें। साथ ही, धार्मिक अवसरों पर जरूरतमंदों की सहायता करने, दूसरों का सम्मान करने और समाज में सद्भाव बनाए रखने का प्रयास भी करें।

नवरात्र की परंपराओं में आस्था और सेवा का संदेश

शारदीय नवरात्र के दौरान देशभर में मां दुर्गा की उपासना की जाती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और घरों में पूजा-पाठ का आयोजन करते हैं। वहीं, अष्टमी और नवमी के अवसर पर कन्या पूजन, हवन तथा भोज की परंपरा विशेष रूप से देखने को मिलती है।

कानपुर में आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा। कन्याओं को भोजन कराने, उनका सम्मान करने और उपहार भेंट करने के माध्यम से भक्त आलोक श्रीवास्तव ने अपनी आस्था प्रकट की। धार्मिक आयोजनों का महत्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि वे परिवार और समाज में सेवा, सद्भाव तथा मानवीय मूल्यों को भी प्रोत्साहित करते हैं।