कानपुर में मेडिकल स्टोरों पर CCTV अनिवार्यता का विरोध, केमिस्टों ने प्रस्ताव वापस लेने की उठाई मांग

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रिपोर्ट – हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर। मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी रिकॉर्डिंग तीन महीने तक सुरक्षित रखने की अनिवार्यता के प्रस्ताव को लेकर दवा व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है। इसी के विरोध में रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को कानपुर के सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में ‘केमिस्ट आक्रोश सम्मेलन (अस्तित्व की लड़ाई)’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में दवा कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग उठाई। साथ ही, छोटे दवा व्यापारियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ और नियमों के अनुपालन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को लेकर अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं।

रिटेल केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन (रजि.), उत्तर प्रदेश, दि दवा व्यापार मंडल (थोक) तथा फुटकर दवा व्यापार मंडल, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में दवा कारोबार से जुड़े विभिन्न संगठनों ने अपनी बात रखी। व्यापारियों का कहना है कि दवा दुकानों पर निगरानी व्यवस्था लागू करने से पहले छोटे और बड़े प्रतिष्ठानों की आर्थिक स्थिति, तकनीकी सुविधाओं तथा मरीजों की निजता जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

सीसीटीवी और तीन महीने की रिकॉर्डिंग को लेकर विरोध

संगठन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 8 सितंबर 2026 को एक प्रस्ताव जारी किया था। इसमें फुटकर दवा दुकानों पर सीसीटीवी निगरानी प्रणाली लगाने और उसकी रिकॉर्डिंग तीन महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान शामिल बताया गया है। इसी प्रस्ताव को लेकर दवा व्यापारियों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

व्यापारियों का तर्क है कि दवा की दुकानों पर सीसीटीवी लगाने का खर्च केवल कैमरे खरीदने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके लिए आवश्यक उपकरण, पर्याप्त स्टोरेज क्षमता, हार्ड डिस्क, सर्वर और नियमित रखरखाव की व्यवस्था भी करनी होगी। इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी संसाधनों की जरूरत पड़ेगी।

ऐसे में छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए इन व्यवस्थाओं को लागू करना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेषकर कम बिक्री और सीमित संसाधनों वाले दुकानदारों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। इसलिए व्यापारियों ने मांग की कि किसी भी नियम को लागू करने से पहले उसके आर्थिक प्रभाव का आकलन किया जाए।

तकनीकी खराबी और बिजली की समस्या पर जताई चिंता

सम्मेलन में दवा व्यापारियों ने सीसीटीवी व्यवस्था के संचालन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने, कैमरे खराब होने, हार्ड डिस्क में तकनीकी समस्या आने या रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं रह पाने की स्थिति में दुकानदारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

इसके अलावा, यदि रिकॉर्डिंग निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है, तो उपकरणों की नियमित जांच और रखरखाव भी जरूरी होगा। व्यापारियों के अनुसार, तकनीकी खराबी जैसी परिस्थितियों में नियमों के अनुपालन को लेकर विवाद उत्पन्न होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, इन आशंकाओं के समाधान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश, तकनीकी सहायता और व्यावहारिक छूट जैसी व्यवस्थाओं पर विचार किया जा सकता है। व्यापारियों का जोर है कि नियम बनाते समय जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि सुरक्षा संबंधी उद्देश्यों और कारोबार की जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे।

मरीजों की निजता और उत्पीड़न की आशंका का मुद्दा

दवा व्यापारियों ने मरीजों की निजता को लेकर भी चिंता जताई। मेडिकल स्टोरों पर आने वाले लोगों को दवाएं खरीदने के लिए कई बार अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की जानकारी देनी पड़ती है। ऐसे में व्यापारियों का मानना है कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल, उसके सुरक्षित भंडारण और उस तक पहुंच के संबंध में स्पष्ट नियम होने चाहिए।

उनका कहना है कि रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए हो तथा उसकी सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने या नियमों के अनुपालन से संबंधित प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

व्यापारियों ने यह आशंका भी जताई कि नियमों की अस्पष्टता के कारण निरीक्षण के दौरान अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मांग की कि किसी भी प्रावधान को अंतिम रूप देने से पहले दवा व्यापार संगठनों के साथ संवाद किया जाए और उनकी आपत्तियों पर विचार किया जाए।

45 से अधिक जिलों के व्यापारियों ने भेजीं आपत्तियां

संगठन के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 45 से अधिक जिलों के दवा व्यापारियों ने ईमेल और डाक के माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को अपनी आपत्तियां भेजी हैं। वहीं, कानपुर से भी सैकड़ों विरोध पत्र भेजे जाने का दावा किया गया है।

सम्मेलन में आयोजकों ने कानपुर के लगभग 6,500 फुटकर और 2,000 से अधिक थोक दवा व्यापारियों की भागीदारी का दावा करते हुए संगठनात्मक एकजुटता प्रदर्शित की। इस दौरान व्यापारियों ने अपनी मांगों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने और प्रस्ताव पर पुनर्विचार कराने की जरूरत पर जोर दिया।

कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारियों और दवा कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि दवा व्यापार आम लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसलिए इससे संबंधित किसी भी नए नियम को लागू करते समय व्यापारियों की समस्याओं और आम उपभोक्ताओं के हितों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

सुमित पावा ने रखी व्यापारियों की बात

सम्मेलन के दौरान संगठन के मीडिया प्रभारी सुमित पावा ने दवा व्यापारियों की चिंताओं और प्रस्ताव के विरोध से जुड़े मुद्दों को सामने रखा। व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा तीन महीने तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की प्रस्तावित अनिवार्यता पर दोबारा विचार किया जाए।

दवा व्यापारियों का कहना है कि वे सुरक्षा और नियमों के पालन के विरोध में नहीं हैं, लेकिन किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उसकी लागत, तकनीकी व्यवहार्यता और गोपनीयता संबंधी पहलुओं का समाधान जरूरी है।

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