धौरहरा की राजनीति का एक युग समाप्त, चार बार विधायक रहे पंडित बाला प्रसाद अवस्थी का निधन
रिपोर्ट- शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता और चार बार विधायक रहे पंडित बाला प्रसाद अवस्थी का शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। उन्होंने शाम करीब 4:30 बजे अंतिम सांस ली। वह 76 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से धौरहरा, बेलतुआ, रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों और स्थानीय नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके राजनीतिक योगदान और जनसंपर्क को याद किया।
क्षेत्र में स्नेहपूर्वक ‘दद्दू’ के नाम से लोकप्रिय बाला प्रसाद अवस्थी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक चला। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा), दोनों के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। उनके निधन को धौरहरा की राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है।
रायपुर गांव में जन्म, जिला पंचायत सदस्य से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
पंडित बाला प्रसाद अवस्थी का जन्म 20 जून 1950 को लखीमपुर खीरी जिले के रायपुर गांव में हुआ था। उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने स्थानीय राजनीति के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। जिला पंचायत सदस्य के रूप में उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और धीरे-धीरे क्षेत्र में जनाधार मजबूत किया।
स्थानीय स्तर पर लोगों से संपर्क और उनकी समस्याओं से जुड़ाव ने उन्हें विधानसभा की राजनीति तक पहुंचाया। इसी क्रम में उन्होंने धौरहरा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। आगे चलकर वह जिले की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।
1991 में पहली बार भाजपा के टिकट पर बने विधायक
बाला प्रसाद अवस्थी ने वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया। यह उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव था। इसके बाद वर्ष 1993 में उन्हें भाजपा का जिलाध्यक्ष बनाया गया। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में भी भागीदारी निभाई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह राम मंदिर आंदोलन के दौरान भी सक्रिय रहे। इस प्रकार उनका राजनीतिक जीवन केवल चुनाव लड़ने और जीतने तक सीमित नहीं था, बल्कि संगठनात्मक गतिविधियों और स्थानीय जनसंपर्क से भी जुड़ा रहा।
भाजपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए, 2007 और 2012 में मिली जीत
राजनीतिक परिस्थितियों के बीच वर्ष 2005 में बाला प्रसाद अवस्थी ने भाजपा छोड़कर बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसके बाद वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के टिकट पर धौरहरा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की।
इसके बाद वर्ष 2012 में उन्होंने मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए। इस जीत के साथ उन्होंने धौरहरा के अलावा मोहम्मदी क्षेत्र में भी अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई।
लगातार अलग-अलग क्षेत्रों से चुनाव जीतना उनके राजनीतिक सफर का उल्लेखनीय हिस्सा रहा। वहीं, उनकी राजनीतिक सक्रियता ने उन्हें स्थानीय स्तर पर एक परिचित और प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित किया।
2017 में भाजपा में वापसी, चौथी बार बने विधायक
वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बाला प्रसाद अवस्थी ने फिर से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद भाजपा ने उन्हें धौरहरा विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। चुनाव में जीत हासिल कर वह चौथी बार विधायक बने।
इस तरह उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में दो बार भाजपा और दो बार बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उनकी राजनीतिक यात्रा दलों में बदलाव और अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनावी सफलता के कारण भी चर्चा में रही।
‘दद्दू’ के नाम से लोकप्रिय थे बाला प्रसाद अवस्थी
धौरहरा क्षेत्र में बाला प्रसाद अवस्थी को लोग प्यार से ‘दद्दू’ कहकर बुलाते थे। समर्थकों और परिचितों के बीच उनकी पहचान सहज व्यवहार और व्यक्तिगत संपर्क बनाए रखने वाले नेता के रूप में थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह लोगों की समस्याएं सुनने और उनसे सीधे संवाद करने को महत्व देते थे।
उनके समर्थक उनके एक कथन को आज भी याद करते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था, “आपने मुझे अपना नेता बनाया है, मैं आपका नौकर हूं। आप जो कहेंगे, उसे मैं सहन करूंगा।”
समर्थकों के अनुसार, यह कथन जनता के प्रति उनकी जवाबदेही और उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता था। उनके निधन के बाद लोगों ने उनके साथ बिताए समय और उनसे जुड़े अनुभवों को साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
बेलतुआ स्थित फार्म हाउस में बनाया था निवास
पंडित बाला प्रसाद अवस्थी ने अपने पैतृक गांव रायपुर के निकट बेलतुआ स्थित फार्म हाउस को अपना निवास बनाया था। पारिवारिक संबंधों और सामाजिक मेलजोल को महत्व देने वाले अवस्थी परिवार के क्षेत्र में लंबे समय से परिचित संबंध रहे हैं।
उनके परिवार में तीन पुत्र हैं—राजीव अवस्थी, जिन्हें लालू के नाम से भी जाना जाता है, संजीव अवस्थी और विनीत अवस्थी। राजीव अवस्थी भाजपा नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं।
उनके निधन की खबर मिलने के बाद परिवार के सदस्यों, समर्थकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और परिचितों ने शोक व्यक्त किया। क्षेत्र में उनके साथ जुड़े लोगों ने उनके सार्वजनिक जीवन और व्यक्तिगत संबंधों को याद किया।
अंतिम विदाई में शामिल हुए समर्थक और परिचित
बाला प्रसाद अवस्थी की अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, राजनीतिक कार्यकर्ता और पुराने परिचित उपस्थित रहे। लोगों ने उनके निवास से अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। दूर-दराज से आए परिचितों और सहपाठियों ने भी उनके साथ बिताए समय को याद किया।
इस दौरान समर्थकों ने उनके राजनीतिक योगदान और जनता के साथ बनाए गए व्यक्तिगत संबंधों को स्मरण किया। उनके निधन से क्षेत्र के उन लोगों में भी शोक देखा गया, जो लंबे समय से उनके राजनीतिक जीवन और जनसंपर्क से जुड़े रहे थे।
धौरहरा की राजनीति में याद किया जाएगा योगदान
चार बार विधायक रहे पंडित बाला प्रसाद अवस्थी का राजनीतिक जीवन कई दशकों में फैला रहा। उन्होंने भाजपा और बसपा के साथ रहते हुए अलग-अलग चुनावों में सफलता हासिल की और धौरहरा तथा मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया।

