कानपुर देहात में साइबर ठगी के ₹6,800 वापस, राजपुर पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने दिलाई राहत
रिपोर्ट – विशाल मिश्रा
कानपुर देहात। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कानपुर देहात की राजपुर थाना पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के एक मामले में शिकायतकर्ता को राहत दिलाई है। साइबर ठग ने एपीके (.apk) फाइल भेजकर शिकायतकर्ता का मोबाइल फोन हैक कर लिया था और उसके खाते से ₹6,800 की धोखाधड़ी की थी। हालांकि, पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए राजपुर पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने ठगी की पूरी रकम वापस करा दी। अपनी धनराशि वापस मिलने पर शिकायतकर्ता ने पुलिस का आभार जताया।
एपीके फाइल भेजकर की गई थी साइबर ठगी
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर ठगी का यह मामला कानपुर देहात जिले के राजपुर थाना क्षेत्र का है। ग्राम खरका निवासी अंग्रेज बाबू पुत्र नरायन सिंह के साथ 3 मई 2026 को साइबर धोखाधड़ी हुई थी। आरोप है कि साइबर ठग ने उन्हें एक एपीके फाइल भेजी थी। इस फाइल के जरिए उनका मोबाइल फोन हैक कर लिया गया और उनके खाते से ₹6,800 की धनराशि निकाल ली गई।
आजकल साइबर अपराधी लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बना रहे हैं। कभी वे बैंक या सरकारी विभाग का कर्मचारी बनकर लोगों से संपर्क करते हैं, तो कभी आकर्षक ऑफर, नौकरी, केवाईसी अपडेट या अन्य जरूरी सेवाओं के नाम पर संदिग्ध लिंक और फाइल भेजते हैं। ऐसे में अनजान स्रोत से प्राप्त फाइल डाउनलोड करना मोबाइल फोन और निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
शिकायत के बाद राजपुर पुलिस ने की कार्रवाई
पीड़ित अंग्रेज बाबू ने घटना के दिन यानी 3 मई 2026 को राजपुर थाने की साइबर हेल्प डेस्क पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी धनराशि ₹6,800 वापस कराने में सफलता हासिल की। इस कार्रवाई से शिकायतकर्ता को आर्थिक राहत मिली। खास बात यह रही कि पीड़ित को उसकी पूरी रकम वापस मिल गई।
हालांकि, पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में साइबर ठग की पहचान, गिरफ्तारी या ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खाते के संबंध में विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से पुष्टि की गई प्रमुख उपलब्धि शिकायतकर्ता की पूरी धनराशि वापस कराया जाना है।
साइबर अपराध रोकने के लिए चलाया जा रहा विशेष अभियान
कानपुर देहात पुलिस के अनुसार, जिले में साइबर अपराध से जुड़ी घटनाओं की रोकथाम और उनके खुलासे के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत साइबर ठगी की शिकायतों पर कार्रवाई करने और पीड़ितों की रकम वापस कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्तमान समय में डिजिटल लेनदेन और स्मार्टफोन के इस्तेमाल में वृद्धि के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। समय पर शिकायत दर्ज कराने से संदिग्ध लेनदेन की जानकारी संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने और रकम वापस कराने की संभावना बढ़ सकती है।
इस मामले में भी शिकायतकर्ता ने घटना के दिन ही साइबर हेल्प डेस्क पर शिकायत की थी। इसके बाद की गई कार्रवाई से उन्हें पूरी धनराशि वापस मिल गई। यह घटना लोगों को साइबर ठगी के मामलों में देरी किए बिना शिकायत दर्ज कराने का संदेश देती है।
एपीके फाइल डाउनलोड करने से पहले बरतें सावधानी
साइबर ठगी से बचने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे पहले, किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजी गई एपीके फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। विशेष रूप से व्हाट्सऐप, एसएमएस या सोशल मीडिया के जरिए प्राप्त संदिग्ध फाइलों से सावधान रहें।
इसके अलावा, मोबाइल फोन में किसी भी एप्लीकेशन को इंस्टॉल करने से पहले उसके स्रोत की जांच करें। बैंकिंग से जुड़े पासवर्ड, ओटीपी, पिन और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी अन्य संस्थान का प्रतिनिधि बनकर ऐसी जानकारी मांगता है, तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें।
यदि मोबाइल फोन अचानक असामान्य तरीके से काम करने लगे, अनजान एप्लीकेशन दिखाई दे या खाते से बिना अनुमति के पैसे निकल जाएं, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें और आवश्यक सुरक्षा कदम उठाएं। जरूरत पड़ने पर मोबाइल फोन की जांच किसी विश्वसनीय तकनीकी विशेषज्ञ से कराएं।
साइबर ठगी होने पर कहां करें शिकायत?
यदि किसी व्यक्ति के बैंक खाते से ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए पैसे निकाल लिए जाते हैं, तो उसे बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। इसके साथ ही आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
शिकायत करते समय लेनदेन का विवरण, बैंक से प्राप्त संदेश, ट्रांजैक्शन आईडी और उपलब्ध अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखना उपयोगी होता है। समय पर सूचना देने से संबंधित एजेंसियों को धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन पर कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, धनराशि वापस मिलने की गारंटी नहीं होती और परिणाम मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
वहीं, यदि किसी का मोबाइल फोन खो जाता है या चोरी हो जाता है, तो वह सरकारी सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकता है। संचार साथी पोर्टल और उससे संबंधित सेवाओं के जरिए भी उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
पुलिस कार्रवाई से शिकायतकर्ता को मिली राहत
राजपुर थाना पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क की कार्रवाई से अंग्रेज बाबू को ठगी गई पूरी रकम वापस मिल गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस का धन्यवाद किया। यह मामला बताता है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराने के बजाय तुरंत शिकायत दर्ज कराना और संबंधित सुरक्षा उपाय अपनाना जरूरी है।

