गोला गोकर्णनाथ में बजाज चीनी मिल के खिलाफ किसानों का सत्याग्रह, बकाया भुगतान समेत चार मांगें उठाईं
रिपोर्ट – शरद अवस्थी
गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ में बजाज हिन्दुस्थान शुगर लिमिटेड की चीनी मिल से बकाया गन्ना भुगतान समेत चार प्रमुख मांगों को लेकर राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया है। सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में शुरू हुए इस धरने में किसानों ने बकाया भुगतान, गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने, बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने तथा जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से फसलों की सुरक्षा की मांग उठाई।
सत्याग्रह के दौरान किसानों ने चीनी मिल प्रबंधन से बकाया गन्ना मूल्य का तत्काल भुगतान करने की मांग की। इस बीच, बजाज चीनी मिल के गन्ना प्रबंधक पीएस चतुर्वेदी और कारखाना प्रबंधक अजीत तिवारी धरनास्थल पर पहुंचे। किसानों के साथ भुगतान को लेकर बातचीत हुई, लेकिन तत्काल भुगतान की मांग पर सहमति नहीं बनने के बाद दोनों अधिकारियों को किसानों के बीच धरने पर बैठना पड़ा। संगठन के अनुसार, करीब दो घंटे बाद उन्हें रात तक का समय देकर वहां से जाने दिया गया। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
बकाया गन्ना भुगतान को लेकर किसानों में नाराजगी
राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि चीनी मिलों का नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन पिछले पेराई सत्र का गन्ना भुगतान अब तक पूरी तरह नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, किसानों का करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है, जिससे किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती में किसानों को बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में समय पर गन्ना मूल्य नहीं मिलने से खेती की अगली तैयारी प्रभावित होती है। इसके अलावा, किसानों को घरेलू जरूरतों और कृषि संबंधी खर्चों के लिए भी आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसानों को उनके गन्ने का भुगतान समय पर मिलना चाहिए, ताकि वे आगामी फसल की तैयारी कर सकें। उन्होंने चीनी मिल प्रबंधन से बकाया राशि के भुगतान के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की।
100 करोड़ रुपये तत्काल देने की मांग
धरने के दौरान किसानों ने बजाज चीनी मिल के अधिकारियों के सामने भुगतान का प्रस्ताव रखा। संगठन की ओर से मांग की गई कि बकाया गन्ना मूल्य में से 100 करोड़ रुपये का भुगतान तत्काल किया जाए और शेष 100 करोड़ रुपये दीपावली से पहले किसानों को दिए जाएं।
किसानों ने कहा कि लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इसलिए केवल आश्वासन देने के बजाय भुगतान की ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए।
संगठन के अनुसार, जब अधिकारियों की ओर से तत्काल भुगतान करने की मांग पर सहमति नहीं बनी, तो किसानों ने दोनों प्रबंधकों को धरनास्थल पर बैठा लिया। वे करीब दो घंटे तक किसानों के बीच बैठे रहे। इसके बाद उन्हें रात तक का समय दिया गया।
हालांकि, भुगतान की मांग पर आगे क्या निर्णय हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसानों और मिल प्रबंधन के बीच होने वाली अगली बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग
सत्याग्रह की दूसरी प्रमुख मांग गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की है। राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन का कहना है कि खेती की लागत बढ़ने के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना जरूरी है।
किसानों के मुताबिक, खाद, बीज, डीजल, सिंचाई और कृषि मजदूरी की लागत में बढ़ोतरी का असर उनकी आय पर पड़ता है। इसलिए गन्ने का मूल्य ऐसा होना चाहिए, जिससे खेती की लागत निकालने के बाद किसानों को उचित आमदनी मिल सके।
इसी क्रम में संगठन ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से गन्ना मूल्य के मुद्दे पर किसानों के हित में निर्णय लेने की मांग की। संगठन का कहना है कि गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए समय पर भुगतान और लाभकारी मूल्य, दोनों जरूरी हैं।
बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा मिले
धरने में बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को नुकसान होने पर उनकी पूरी मेहनत और खेती में लगाया गया पैसा प्रभावित होता है।
ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए नुकसान का उचित आकलन और नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराना आवश्यक है। संगठन ने मांग की कि प्रशासन प्रभावित किसानों की समस्याओं पर ध्यान दे और पात्र किसानों को राहत दिलाने की दिशा में कार्रवाई करे।
इसके साथ ही किसानों ने फसल नुकसान से जुड़े मामलों में प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि प्रभावित परिवारों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके।
जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से फसलों की सुरक्षा की मांग
सत्याग्रह की चौथी प्रमुख मांग किसानों और उनकी फसलों को जंगली जानवरों तथा छुट्टा पशुओं से सुरक्षा दिलाने की है। संगठन ने बाघ, तेंदुआ, हाथी, जंगली सूअर और छुट्टा पशुओं से होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया।
किसानों का कहना है कि खेतों में जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं की आवाजाही से फसलों को नुकसान पहुंचता है। इसके अतिरिक्त, खेतों में काम करने वाले किसानों को भी सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ता है।
इसलिए संबंधित विभागों और प्रशासन को मिलकर ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे किसानों की फसलों की सुरक्षा हो सके और वन्यजीवों से जुड़े मामलों में भी उचित सावधानी बरती जा सके।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उठाया मुद्दा
प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा ने अपने संबोधन में गन्ना भुगतान पर ब्याज के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी गन्ना भुगतान पर ब्याज से संबंधित आदेश दे चुका है, लेकिन किसानों को ब्याज दिलाने के मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने किसान संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों के हितों की बात करने वाले संगठनों को बकाया भुगतान और ब्याज के मुद्दे पर लगातार प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को ब्याज दिलाने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और उनके अनुपालन से संबंधित इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इस संबंध में संबंधित न्यायिक आदेशों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
धरना जारी, किसानों की मांगों पर निगाहें
राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के बैनर तले शुरू हुए इस सत्याग्रह में प्रदेश उपाध्यक्ष शिवदयाल वर्मा, संतोष सिंह भदौरिया, डेलीगेट अनिल कुमार, राधेश्याम, राजेश कुमार, जगदीश प्रसाद समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
किसानों ने स्पष्ट किया कि बकाया गन्ना भुगतान, 600 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को मुआवजा और फसलों की सुरक्षा उनकी प्रमुख मांगें हैं। संगठन ने इन मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
अब किसानों की नजर चीनी मिल प्रबंधन और संबंधित प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि भुगतान को लेकर ठोस निर्णय होता है, तो इससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, मांगों पर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में सत्याग्रह आगे भी जारी रह सकता है।

