जालौन में ABVP का देशव्यापी आंदोलन, छात्रों में सकारात्मक सोच विकसित करने की उठाई मांग

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रिपोर्ट – नवजीत सिंह

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक सोच विकसित करने, शैक्षणिक संस्थानों में अनुकूल वातावरण बनाए रखने और कथित देशविरोधी नैरेटिव के विरोध में देशव्यापी आंदोलन शुरू किया है। इसी क्रम में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई में डीवीसी कॉलेज के सामने एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों से राष्ट्रहित, सामाजिक जिम्मेदारी और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की अपील की।

एबीवीपी के प्रांतीय संयोजक चित्रांशु सिंह ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कहा कि देशभर के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए सकारात्मक वातावरण बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, युवाओं को ऐसी गतिविधियों से दूर रहना चाहिए, जो उनकी शिक्षा, भविष्य और सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। हालांकि, संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों को संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी तरह परखा जा सकता है।

जालौन में डीवीसी कॉलेज के सामने ABVP का प्रदर्शन

जालौन के उरई स्थित डीवीसी कॉलेज के सामने आयोजित इस प्रदर्शन में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक विचारधारा को बढ़ावा देने की मांग उठाई। संगठन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यहां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, सामाजिक दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता का भी विकास होता है।

इसी वजह से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां छात्र स्वतंत्र रूप से विचार कर सकें और अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इसके साथ ही विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जानी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों से विद्यार्थियों के बीच ऐसी विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, जो युवाओं की सोच को प्रभावित कर सकती है। संगठन ने इस तरह की गतिविधियों पर चिंता व्यक्त करते हुए शैक्षणिक संस्थानों में सकारात्मक संवाद और रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई।

चित्रांशु सिंह ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों पर दिया जोर

एबीवीपी के प्रांतीय संयोजक चित्रांशु सिंह ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां संविधान, न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक प्रक्रियाओं की समझ विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी और कुछ अन्य राजनीतिक संगठनों की ओर से किए जा रहे प्रदर्शनों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यह आरोप एबीवीपी के पदाधिकारी ने प्रदर्शन के दौरान लगाया है। इस संबंध में संबंधित संगठनों का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

चित्रांशु सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को प्राप्त है। हालांकि, उनके अनुसार विद्यार्थियों को किसी भी गतिविधि में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य, प्रभाव और परिणामों को समझना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि छात्र जीवन भविष्य की नींव तैयार करने का महत्वपूर्ण समय होता है। इसलिए विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई, कौशल विकास और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहना चाहिए। साथ ही, किसी भी विषय पर राय बनाने से पहले तथ्यों और विभिन्न पक्षों को समझना भी आवश्यक है।

विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच विकसित करने की मांग

एबीवीपी ने अपने आंदोलन के माध्यम से विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, राष्ट्रहित और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने की अपील की। संगठन का कहना है कि युवाओं को देश के विकास में रचनात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

दरअसल, शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों का वैचारिक विकास एक महत्वपूर्ण विषय है। कॉलेज और विश्वविद्यालय युवाओं को केवल रोजगार के लिए तैयार नहीं करते, बल्कि उन्हें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी देते हैं।

ऐसे में विद्यार्थियों के बीच संवाद, विचार-विमर्श, वाद-विवाद और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देना उपयोगी हो सकता है। इसके अतिरिक्त, युवाओं को संविधान, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी देना भी जरूरी है।

एबीवीपी का मानना है कि विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। संगठन ने शिक्षा और सामाजिक विकास से संबंधित मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक कार्यों में होना चाहिए।

विरोध-प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी उठी चर्चा

इस आंदोलन के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों और विद्यार्थियों की भूमिका का मुद्दा भी सामने आया। एबीवीपी ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन के साथ-साथ संवैधानिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना भी जरूरी है।

वहीं, लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध, असहमति व्यक्त करने और नीतियों पर सवाल उठाने का अधिकार भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में किसी विषय पर अलग-अलग विचार रखने वाले विद्यार्थियों के बीच संवाद और तथ्यों पर आधारित चर्चा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही, किसी भी संगठन या विचारधारा के संबंध में लगाए गए आरोपों का मूल्यांकन प्रमाणों और संबंधित पक्षों के दृष्टिकोण के आधार पर किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने में मदद मिल सकती है।

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर

जालौन में आयोजित इस प्रदर्शन के जरिए एबीवीपी ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि शिक्षा, राष्ट्र निर्माण और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। संगठन ने युवाओं से सकारात्मक विचारधारा अपनाने और समाज के विकास में योगदान देने की अपील की।

कुल मिलाकर, उरई में डीवीसी कॉलेज के सामने हुआ यह प्रदर्शन विद्यार्थियों के वैचारिक वातावरण और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका से जुड़े मुद्दों को सामने लाता है। अब इस आंदोलन का आगे क्या प्रभाव पड़ता है और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में संगठन की ओर से क्या गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, इस पर नजर रहेगी।

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