कानपुर देहात में मिशन शक्ति फेज-6.0: चार स्वर्ण पदक विजेता बालिकाओं ने दिया सुरक्षा और सशक्तिकरण का संदेश
रिपोर्ट – विशाल मिश्रा
कानपुर देहात: महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा सशक्तिकरण को लेकर कानपुर देहात पुलिस की ओर से मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेन्द्र पाण्डेय के नेतृत्व में पुलिस कार्यालय में बालिका सुरक्षा एवं सशक्तिकरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में चार स्वर्ण पदक जीतने वाली बालिकाओं ने सहभागिता की। ये चारों बालिकाएं जनपद में मिशन शक्ति अभियान की शुभंकर और एम्बेसडर हैं।
कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाओं को आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया। साथ ही, उन्हें किसी भी परेशानी की स्थिति में जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय परिवार, शिक्षकों और महिला पुलिसकर्मियों से बातचीत करने के लिए प्रेरित किया गया।
चार स्वर्ण पदक विजेता बालिकाओं ने बढ़ाया आत्मविश्वास
मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की चार स्वर्ण पदक विजेता बालिकाओं की उपलब्धियों को सामने रखा गया। पुलिस अधीक्षक ने उनका उत्साहवर्धन करते हुए उनकी सफलता को बालिका सशक्तिकरण का प्रेरणादायी उदाहरण बताया।
दरअसल, खेल और अन्य गतिविधियों में बालिकाओं की उपलब्धियां समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन खिलाड़ियों की उपलब्धियों के माध्यम से जनपद की अन्य बालिकाओं को भी अपने लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया गया।
इसके अलावा, कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बालिकाओं को सुरक्षित और सहयोगात्मक वातावरण मिलना चाहिए। परिवार और समाज का सहयोग मिलने पर वे अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से निखार सकती हैं तथा शिक्षा, खेल और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ सकती हैं।
‘रुको, एक बार सोचो; घर छोड़ने से पहले एक बार बात करो’ का संदेश
कार्यक्रम का प्रमुख संदेश था—“रुको, एक बार सोचो; घर छोड़ने से पहले एक बार बात करो।” इसके माध्यम से बालिकाओं को भावनात्मक तनाव, पारिवारिक विवाद या किसी अन्य परेशानी के दौरान धैर्य बनाए रखने और अपनी बात किसी भरोसेमंद व्यक्ति के सामने रखने के लिए जागरूक किया गया।
पुलिस की ओर से बताया गया कि परेशानी की स्थिति में जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय अभिभावकों, शिक्षकों अथवा नजदीकी मिशन शक्ति केंद्र पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों से संपर्क करना चाहिए। बातचीत और उचित मार्गदर्शन के जरिए समस्या का समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है।
वहीं, अभिभावकों और समाज के अन्य लोगों को भी बालिकाओं की समस्याओं को संवेदनशीलता से समझने के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों और किशोरियों की बात धैर्यपूर्वक सुनना, उनकी परेशानियों को गंभीरता से लेना तथा उन्हें भरोसे का माहौल देना जरूरी है। इससे वे अपनी समस्याएं साझा करने में अधिक सहज महसूस कर सकती हैं।
2026 में 278 बालिकाओं के लौटने का आंकड़ा चर्चा में
कार्यक्रम के दौरान आईआईटी कानपुर और कानपुर देहात पुलिस के सामूहिक विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 2026 में अब तक जनपद में घर छोड़कर गईं कुल 278 बालिकाएं वापस लौटकर आई हैं।
इस आंकड़े के संदर्भ में बालिकाओं को भावनात्मक तनाव और पारिवारिक समस्याओं के समय संवाद तथा सहयोग का रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन मामलों के कारणों, समयावधि के विस्तृत वर्गीकरण या व्यक्तिगत परिस्थितियों का ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए इस आंकड़े को उसके बताए गए संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
पुलिस का संदेश है कि किसी भी परेशानी को अकेले झेलने के बजाय विश्वसनीय लोगों से बात करना और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेना महत्वपूर्ण है। साथ ही, परिवार के सदस्यों को भी ऐसा वातावरण बनाने की जरूरत है, जहां बालिकाएं बिना डर अपनी बात कह सकें।
पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेन्द्र पाण्डेय ने मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन तथा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि बालिकाओं की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें परिवार और समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसी उद्देश्य से अभियान की एम्बेसडर बनीं चारों खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों के जरिए अन्य बालिकाओं को प्रेरित कर रही हैं। उनके माध्यम से यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है कि आत्मविश्वास, निरंतर मेहनत और सही मार्गदर्शन से बालिकाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकती हैं।
इसके साथ ही, मिशन शक्ति अभियान के तहत सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने और महिलाओं तथा बालिकाओं को सहायता के उपलब्ध माध्यमों के प्रति जागरूक करने पर भी बल दिया गया।
जरूरत पड़ने पर इन हेल्पलाइन नंबरों पर लें सहायता
कानपुर देहात पुलिस ने महिलाओं और बालिकाओं को जरूरत के समय उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी लेने के लिए भी जागरूक किया। पुलिस की ओर से साझा किए गए प्रमुख नंबर इस प्रकार हैं:
- 1090: महिला हेल्पलाइन
- 112: पुलिस आपातकालीन सेवा
- 1098: चाइल्ड हेल्पलाइन
- 1076: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन
- 181: महिला सहायता हेल्पलाइन
किसी भी समस्या या आपातकालीन स्थिति में संबंधित सेवा से संपर्क कर सहायता मांगी जा सकती है। जरूरत के अनुसार सही हेल्पलाइन का इस्तेमाल करना और अपनी स्थिति की स्पष्ट जानकारी देना उपयोगी होता है।
संवाद और सहयोग से मजबूत होगा बालिका सशक्तिकरण
कानपुर देहात में मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत आयोजित यह कार्यक्रम बालिकाओं को अपनी समस्याएं साझा करने, सही मार्गदर्शन प्राप्त करने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश देता है। राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की चार स्वर्ण पदक विजेता बालिकाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम में आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण का पहलू भी जोड़ा।
कुल मिलाकर, अभियान का उद्देश्य बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने, उनकी बात सुनने और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता पहुंचाने के लिए पुलिस, परिवार तथा समाज के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। जागरूकता के साथ संवाद और संवेदनशील व्यवहार अपनाकर बालिकाओं के लिए अधिक सहयोगपूर्ण माहौल तैयार किया जा सकता है।

