ओमप्रकाश राजभर की प्रेस वार्ता: कई नेताओं ने सुभासपा की सदस्यता ली, पंचायत चुनाव पर भी दिया बयान
रिपोर्ट – डिजिटल उप्रन्यूज़
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने संगठन विस्तार की दिशा में गतिविधियां तेज कर दी हैं। लखनऊ में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर की प्रेस वार्ता के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े पदाधिकारियों, समाजसेवियों और अन्य लोगों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान पंचायत चुनाव, पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर भी राजभर ने अपनी बात रखी। इसके अलावा, उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर टिप्पणी करते हुए पीडीए के अर्थ को लेकर तंज कसा।
प्रेस वार्ता में दी गई जानकारी के मुताबिक, लोक जनशक्ति पार्टी के कई पदाधिकारी सुभासपा में शामिल हुए। वहीं, समाजवादी पार्टी से जुड़े मोहम्मद मुर्शिद खान के नेतृत्व में करीब 40 लोगों ने पार्टी की सदस्यता ली। इसके अतिरिक्त, कई समाजसेवियों ने भी सुभासपा का दामन थामा। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के जिलाध्यक्ष चंद्रकांत अवस्थी के पार्टी में शामिल होने की बात भी सामने आई।
पार्टी में शामिल होने वाले लोग गोंडा, बाराबंकी, वाराणसी, उन्नाव और लखनऊ समेत विभिन्न जिलों से जुड़े बताए गए। सुभासपा की ओर से इन लोगों के शामिल होने को संगठन के विस्तार के रूप में प्रस्तुत किया गया। हालांकि, नए सदस्यों के नाम और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने पर ही इस बदलाव का व्यापक आकलन किया जा सकेगा।
पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत
प्रेस वार्ता का एक प्रमुख मुद्दा उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव भी रहा। ओमप्रकाश राजभर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि चुनाव को लेकर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची पूरी तरह तैयार है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक तैयारियों और आरक्षण व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा है।
इस आदेश के बाद पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों पर नजरें टिकी हुई हैं।
राजभर ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया के संबंध में भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, आयोग की रिपोर्ट आने के बाद आरक्षण से संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और चुनाव कराने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने एक महीने के भीतर आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने की बात कही।
हालांकि, इस संबंध में अदालत के आदेश की स्थिति को समझना भी जरूरी है। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, हाईकोर्ट ने लंबित आयोग की जांच या रिपोर्ट को पंचायत चुनाव टालने का आधार नहीं मानते हुए मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत चुनाव कराने का निर्देश दिया है।
इसलिए आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर सरकार के अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे।
मतदाता सूची तैयार होने का राजभर ने किया दावा
पंचायत चुनाव की तैयारियों पर बोलते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मतदाता सूची पूरी तरह तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव कार्यक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव ग्रामीण स्तर पर स्थानीय विकास, जनप्रतिनिधित्व और प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसलिए चुनाव की तारीख, आरक्षण की स्थिति और मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी पर ग्रामीण मतदाताओं की नजर रहेगी।
इसके अलावा, निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां भी पूरी करनी होंगी। चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही मतदान की तारीखों और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
अखिलेश यादव पर राजभर की टिप्पणी
प्रेस वार्ता के दौरान ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने पीडीए की राजनीतिक अवधारणा पर टिप्पणी करते हुए कहा, “PDA में D का मतलब धनीराम।”
राजभर की यह टिप्पणी विपक्षी राजनीति और पीडीए के मुद्दे पर उनके राजनीतिक रुख को दर्शाती है। पीडीए का इस्तेमाल समाजवादी पार्टी की राजनीति में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के प्रतिनिधित्व से जुड़े विमर्श के लिए किया जाता रहा है। ऐसे में राजभर की टिप्पणी को इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता है।
हालांकि, इस बयान पर समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आने पर ही दोनों पक्षों का पूरा पक्ष स्पष्ट हो सकेगा। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न दल पंचायत चुनावों में सामाजिक समीकरणों, स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों के चयन को किस तरह प्राथमिकता देते हैं।
सुभासपा के संगठन विस्तार पर भी नजर
लखनऊ की प्रेस वार्ता में विभिन्न दलों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों के सुभासपा में शामिल होने की घोषणा भी महत्वपूर्ण रही। लोक जनशक्ति पार्टी के पदाधिकारियों, समाजवादी पार्टी से जुड़े मोहम्मद मुर्शिद खान के नेतृत्व में आए लोगों और समाजसेवियों की सदस्यता से पार्टी ने अपने संगठनात्मक विस्तार का संदेश दिया।
गोंडा, बाराबंकी, वाराणसी, उन्नाव और लखनऊ से आए लोगों की भागीदारी से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की कोशिश नजर आती है। वहीं, विश्व हिंदू रक्षा परिषद के जिलाध्यक्ष चंद्रकांत अवस्थी का सुभासपा में शामिल होना भी प्रेस वार्ता में उल्लेखित घटनाक्रमों में शामिल रहा।
कुल मिलाकर, ओमप्रकाश राजभर की प्रेस वार्ता में पार्टी की सदस्यता अभियान, पंचायत चुनाव और विपक्ष पर राजनीतिक टिप्पणी तीनों मुद्दे प्रमुख रहे। एक ओर सुभासपा ने नए सदस्यों के शामिल होने की जानकारी दी, वहीं दूसरी ओर पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के निर्देशों और आरक्षण प्रक्रिया पर चर्चा हुई। अब आगे की स्थिति राज्य निर्वाचन आयोग की चुनाव संबंधी घोषणा, आरक्षण व्यवस्था और संबंधित प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर करेगी।

