यूपी में पेंशनर्स अब मोबाइल से जमा कर सकेंगे जीवन प्रमाणपत्र, 1 नवंबर से लगेंगे विशेष शिविर

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रिपोर्ट – अनुग्रह देवी 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पेंशन भोगियों को जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए डिजिटल सुविधा को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब पेंशनर्स आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के जरिए घर बैठे अपने स्मार्टफोन से डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें निर्धारित मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना होगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इस सुविधा के व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य पेंशनभोगियों को प्रमाणपत्र जमा करने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम करना और डिजिटल सेवाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाना है। खास तौर पर उन पेंशनर्स को जागरूक करने पर जोर दिया जाएगा, जो अभी तक मैन्युअल तरीके से जीवन प्रमाणपत्र जमा करते हैं। इसके अतिरिक्त, 1 नवंबर से 30 नवंबर तक पेंशनभोगियों के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया अपनाने में सहायता मिल सके।

मोबाइल से ऐसे जमा होगा डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र

डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से पेंशनभोगी स्मार्टफोन के कैमरे की मदद से अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं। इससे पात्र पेंशनर्स को घर बैठे प्रमाणपत्र जमा करने की सुविधा मिल सकती है।

इस प्रक्रिया के लिए मोबाइल फोन में ‘जीवन प्रमाण’ और ‘आधार फेस आरडी’ ऐप डाउनलोड करना होगा। इसके बाद संबंधित ऐप के निर्देशों के अनुसार पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। हालांकि, प्रक्रिया के दौरान आधार से जुड़ी जानकारी और अन्य आवश्यक विवरण सही होना जरूरी है।

डिजिटल सुविधा का लाभ लेने से पहले पेंशनभोगियों को आधिकारिक ऐप और निर्देशों की पुष्टि कर लेनी चाहिए। साथ ही, आधार से संबंधित गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा करने से बचना चाहिए।

मैन्युअल प्रक्रिया अपनाने वाले पेंशनर्स पर विशेष ध्यान

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की सुविधा का लाभ अधिक से अधिक पेंशनभोगियों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ लोगों को प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाएगी।

दरअसल, कई पेंशनभोगी अभी भी पारंपरिक तरीके से जीवन प्रमाणपत्र जमा करते हैं। ऐसे में डिजिटल प्रक्रिया के बारे में जानकारी और तकनीकी सहायता की कमी उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए प्रशासन का जोर ऐसे पेंशनर्स को सुविधा से परिचित कराने पर रहेगा।

इसके लिए नवंबर महीने में विशेष शिविर आयोजित करने की योजना है। इन शिविरों में पेंशनभोगियों को डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की प्रक्रिया समझाने और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, शिविरों के स्थान और समय से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना देखना जरूरी होगा।

डिजिटल सुविधा से पेंशनभोगियों को क्या लाभ होगा?

जीवन प्रमाणपत्र पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसके माध्यम से संबंधित पेंशन व्यवस्था में पेंशनर के जीवित होने की पुष्टि की जाती है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रमाणपत्र जमा करना जरूरी होता है, ताकि पेंशन भुगतान से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।

डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की सुविधा से पात्र पेंशनर्स को प्रक्रिया पूरी करने के लिए कार्यालय तक जाने की जरूरत कम हो सकती है। विशेष रूप से बुजुर्गों और उन लोगों को लाभ मिल सकता है, जिन्हें यात्रा करने में कठिनाई होती है या जो दूरदराज के क्षेत्रों में रहते हैं।

इसके अलावा, डिजिटल माध्यम से प्रमाणपत्र जमा करने की जानकारी और प्रक्रिया तक पहुंच आसान हो सकती है। फिर भी, जिन पेंशनभोगियों के पास स्मार्टफोन नहीं है या जिन्हें ऐप इस्तेमाल करने में परेशानी होती है, उनके लिए निर्धारित सहायता केंद्रों और शिविरों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

‘जल संचय जन भागीदारी–कैच द रेन 2026’ की भी समीक्षा

मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक के दौरान ‘जल संचय जन भागीदारी–कैच द रेन 2026’ अभियान को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए। इस अभियान के तहत जिलों में जल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों और निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति पर नजर रखी जाएगी।

निर्देशों के अनुसार, जिलाधिकारी (डीएम) और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभियान की नियमित समीक्षा करेंगे। साथ ही, निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को प्रोत्साहन राशि दिए जाने की भी जानकारी दी गई।

जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, पानी के स्रोतों का संरक्षण और स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी जैसी गतिविधियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसे प्रयासों से पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाने और भविष्य की जरूरतों के लिए जल संसाधनों के संरक्षण में मदद मिल सकती है।

हालांकि, अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के लिए निर्धारित लक्ष्यों, प्रगति के आंकड़ों और प्रोत्साहन राशि के विस्तृत मानकों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इन विवरणों की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना से की जा सकती है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की प्रगति पर भी नजर

समीक्षा बैठक में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की प्रगति पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिला स्वास्थ्य समिति की बैठकों में मिशन के कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए। इसके साथ ही पात्र नागरिकों की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता यानी एबीएचए (ABHA) आईडी बनाने के लिए अभियान चलाया जाए।

एबीएचए आईडी डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यक्ति की पहचान से जुड़ी सुविधा है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड के प्रबंधन और विभिन्न डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच को आसान बनाना है। पात्र नागरिकों को इसके लाभ और प्रक्रिया की जानकारी देना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

हालांकि, एबीएचए आईडी और आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ अलग-अलग विषय हैं। इसलिए नागरिकों को अपनी पात्रता और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में संबंधित आधिकारिक पोर्टल या स्वास्थ्य केंद्र से जानकारी लेनी चाहिए।

तीन प्रमुख अभियानों पर प्रशासन का जोर

उत्तर प्रदेश में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र, जल संरक्षण और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अभियानों की समीक्षा के जरिए प्रशासन ने इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया है। एक ओर पेंशनभोगियों को मोबाइल से जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की सुविधा के बारे में जागरूक किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर जल संचय अभियान के लक्ष्यों की नियमित निगरानी की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत पात्र लोगों की एबीएचए आईडी बनाने पर जोर रहेगा। इन पहलों का लाभ तभी अधिक लोगों तक पहुंचेगा, जब उन्हें सही जानकारी, जरूरी तकनीकी सहायता और संबंधित सेवाओं तक आसान पहुंच मिलेगी।

फिलहाल, पेंशनभोगियों के लिए 1 से 30 नवंबर तक विशेष शिविर आयोजित करने की योजना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में पेंशनर्स को सलाह है कि वे अपने संबंधित विभाग से शिविरों की तारीख, स्थान और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त करें, ताकि जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया समय पर पूरी कर सकें।

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