कानपुर में व्यापारियों की समस्याओं को लेकर उठी आवाज, तुरंत पढ़िए GST कार्रवाई और स्टॉक सीज करने के नियमों क्या रखी मांग?
रिपोर्ट – अनुग्रह देवी
कानपुर: व्यापारियों की समस्याओं, कर संबंधी प्रक्रियाओं और विभागीय कार्रवाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर भारतीय उद्योग व्यापार के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने प्रतिनिधि मंडल के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। संगठन की ओर से तैयार ज्ञापन में व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं से राहत देने, जीएसटी से जुड़ी कार्रवाई में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने और विभागीय निर्णय समयबद्ध तरीके से करने की मांग की गई है। इसके साथ ही, अपीलों के निस्तारण, बैंक खातों को फ्रीज करने, व्यापारिक स्टॉक सीज करने और माल परिवहन के दौरान वाहनों को रोकने जैसी प्रक्रियाओं में सुधार पर जोर दिया गया है।
संगठन का कहना है कि व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने के लिए जरूरी है कि कार्रवाई नियमानुसार हो और व्यापारियों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। वहीं, उपलब्ध ज्ञापन में इन मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
अपील संबंधी मामलों में एमनेस्टी योजना लागू करने की मांग
ज्ञापन में अपील संबंधी मामलों के निस्तारण के लिए विशेष एमनेस्टी योजना लागू करने पर विचार करने की मांग की गई है। संगठन के अनुसार, कुछ मामलों में तकनीकी कारणों से अपील निरस्त हो जाती है, जबकि कुछ मामलों में आदेश की सूचना समय पर नहीं मिलने के कारण व्यापारी निर्धारित अवधि में अपील दाखिल नहीं कर पाते।
ऐसी परिस्थितियों में व्यापारियों को राहत देने के लिए पात्र मामलों में सरल और समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था किए जाने की जरूरत बताई गई है। संगठन का मानना है कि इससे लंबे समय से लंबित विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिलने की संभावना रहेगी।
हालांकि, इस तरह की योजना लागू करने का निर्णय संबंधित सरकार और सक्षम विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए संगठन ने इस मांग पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।
कुर्की और बैंक खाते फ्रीज करने की कार्रवाई में पारदर्शिता जरूरी
ज्ञापन में कुर्की, सीजिंग और बैंक खाते फ्रीज करने जैसी कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई गई है। संगठन का कहना है कि कुछ मामलों में अभिलेखीय त्रुटियों, कर जमा होने की जानकारी उपलब्ध नहीं होने अथवा तकनीकी विसंगतियों के कारण बकाया राशि प्रदर्शित होती रहती है।
ऐसी स्थिति में यदि वास्तविक बकाया राशि और संबंधित अभिलेखों का सत्यापन किए बिना कठोर कार्रवाई की जाती है, तो व्यापारियों के कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बैंक खाते फ्रीज होने या संपत्ति सीज होने से दैनिक लेनदेन, कर्मचारियों के भुगतान और व्यापारिक गतिविधियों में बाधा आने की आशंका रहती है।
इसीलिए संगठन ने मांग की है कि किसी भी कठोर कार्रवाई से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार संबंधित अभिलेखों और वास्तविक बकाया राशि का सत्यापन किया जाए। इसके अलावा, व्यापारियों को अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।
स्टॉक सीज करने से पहले नोटिस और स्पष्टीकरण की व्यवस्था हो
व्यापारिक स्टॉक सीज करने की कार्रवाई को लेकर भी ज्ञापन में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। संगठन के मुताबिक, सर्वे या जांच के दौरान व्यापारिक स्टॉक सीज किए जाने से माल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे ग्राहकों को समय पर सामान उपलब्ध कराने और कारोबार की नियमित गतिविधियों को बनाए रखने में कठिनाई होती है।
व्यापारियों का पक्ष रखते हुए संगठन ने कहा है कि केवल संदेह अथवा सामान्य विसंगति के आधार पर स्टॉक सीज करने के बजाय नियमानुसार नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेज प्राप्त किए जाने चाहिए। इसके साथ ही, जांच के दौरान कर जमा कराने के लिए अनुचित दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
संगठन ने यह भी कहा है कि प्रत्येक मामले में कानूनी प्रावधानों और निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन होना जरूरी है। इससे एक ओर विभागीय जांच प्रभावी हो सकेगी, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों के नियमित कारोबार पर अनावश्यक असर पड़ने से बचाया जा सकेगा।
जीएसटी की धारा 129 के मामलों में राहत की मांग
माल परिवहन के दौरान वाहनों को रोकने और जब्त करने की कार्रवाई को लेकर भी संगठन ने अपनी मांग रखी है। ज्ञापन में जीएसटी अधिनियम की धारा 129 के अंतर्गत छोटी त्रुटियों के मामलों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की गई है।
संगठन के अनुसार, माल परिवहन के दौरान दस्तावेजों में मामूली गलती या तकनीकी विसंगति होने पर व्यापारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे माल की समय पर डिलीवरी प्रभावित होती है और व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आती है।
इसलिए संगठन ने मांग की है कि जहां वास्तविक कर चोरी का ठोस आधार न हो, वहां छोटी दस्तावेजी त्रुटियों के मामलों में नियमानुसार राहत देने पर विचार किया जाए। यदि किसी वाहन को जांच के लिए रोका जाता है, तो आवश्यक कानूनी प्रक्रिया यथासंभव शीघ्र पूरी की जाए।
ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया है कि आवश्यक जांच पूरी होने के बाद वाहन को छोड़ने की प्रक्रिया समयबद्ध होनी चाहिए। इससे माल की आपूर्ति बाधित होने से बच सकती है और व्यापारियों को होने वाली आर्थिक परेशानी कम हो सकती है।
ऑडिट और अपील के मामलों में समयबद्ध निर्णय पर जोर
ज्ञापन के अंतिम बिंदु में ऑडिट और अपीलीय प्राधिकरणों के स्तर पर निष्पक्ष एवं समयबद्ध निर्णय लेने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि कई मामलों में व्यापारी पर्याप्त साक्ष्य, अभिलेख और दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद अनावश्यक विलंब या विवाद की स्थिति का सामना करते हैं।
ऐसे में संबंधित अधिकारियों और अपीलीय प्राधिकरणों को उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों तथा लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता बताई गई है। संगठन का मानना है कि पारदर्शी प्रक्रिया से व्यापारियों को राहत मिलेगी और विभागीय व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास मजबूत होगा।
ज्ञापन पर प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र, जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता गोरे और जिला वरिष्ठ महामंत्री मनीष गुप्ता सलोने के नाम दर्ज हैं। संगठन ने संबंधित अधिकारियों से सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने और व्यापारियों की समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया है।
फिलहाल, उपलब्ध दस्तावेज में संगठन की मांगें दर्ज हैं। इन मांगों पर संबंधित विभाग की ओर से किसी निर्णय या कार्रवाई की पुष्टि इस दस्तावेज से नहीं होती है।
व्यापारी संगठन की प्रमुख अपेक्षा यही है कि कर संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें जांच निष्पक्ष हो, कानूनी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और वास्तविक त्रुटियों तथा कर चोरी के मामलों के बीच उचित अंतर किया जा सके। इससे व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु रखने और व्यापारियों की समस्याओं के समाधान में मदद मिल सकती है।
इस मौके पर जिला संयोजक राजे गुप्ता, जिला अध्यक्ष विजय गुप्ता उर्फ़ गोर, कोषाध्यक्ष मनोज गुप्ता उर्फ़ कुक्कू, वरिष्ठ महामंत्री मनीष गुप्ता उर्फ़ सलोने, महामंत्री राजकुमार भगतानी, संगठन महामंत्री चंद्राकर दीक्षित, बर्रा उधोग व्यापार मंडल चेयरमैन नितिन अग्निहोत्री, बर्रा उधोग व्यापार मंडल अध्यक्ष आसुतोष सिंह भदौरिया, कार्यवाहक अध्यक्ष बबलू शुक्ला, सयुंक्त महामंत्री संजय मिश्रा, नवीन तुलसानी, के.के. गुप्ता, मनीष कोहली, रुमीत सिंह सागरी समेत अन्य व्यापारी साथी उपस्थित थे।

