सोनभद्र में मशाल जुलूस से गूंजा नशामुक्ति का संदेश, ग्रामीणों ने लिया स्वस्थ समाज बनाने का संकल्प
रिपोर्ट: ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी
सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में नशामुक्त समाज के निर्माण और युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से नशा मुक्ति संकल्प यात्रा के तहत व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया। इस दौरान गांव-गांव पहुंचकर लोगों को नशे से दूर रहने, परिवार की खुशहाली बनाए रखने और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के अंतर्गत बिछिया गांव में मशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लेकर नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया। साथ ही, कार्यक्रम में दिव्यांगजनों के सम्मान, अधिकारों और आत्मनिर्भरता का संदेश भी प्रमुखता से उठाया गया।
गांव-गांव पहुंची नशा मुक्ति संकल्प यात्रा
नशामुक्ति को जनआंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से निकाली जा रही यह संकल्प यात्रा मडरा, बिसुंधरी, सेंधुरी, रैपुरा, बराक, बरौली और सोनवट सहित विभिन्न गांवों से होते हुए बिछिया पहुंची। यात्रा के दौरान ग्रामीणों को नशे के सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी गई।
इसके अलावा, लोगों से अपील की गई कि वे अपने परिवार और आसपास के युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। अभियान का उद्देश्य केवल नशे के नुकसान बताना ही नहीं, बल्कि समाज में ऐसी सकारात्मक सोच विकसित करना भी है, जिससे युवा शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ सकें।
बिछिया गांव में आयोजित मशाल जुलूस के दौरान ग्रामीणों ने एकजुट होकर नशे से दूर रहने और अपने गांव को स्वस्थ एवं जागरूक बनाने का संकल्प लिया। इस आयोजन में महिलाओं, युवाओं और अन्य ग्रामीणों की भागीदारी ने सामाजिक जागरूकता के संदेश को और मजबूत किया।
स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि जिला समाज कल्याण अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया ने मशाल प्रज्वलित कर अभियान के नेतृत्वकर्ता एवं हास्य कलाकार अभय कुमार शर्मा को सौंपी।
इस अवसर पर ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया ने नशामुक्ति अभियान में महिलाओं और युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। जब परिवार, युवा और समाज के जिम्मेदार लोग मिलकर प्रयास करते हैं, तभी किसी अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाया जा सकता है।
उन्होंने अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नशे पर खर्च होने वाला पैसा बच्चों के भविष्य में लगाएं: अभय कुमार शर्मा
अभियान के नेतृत्वकर्ता अभय कुमार शर्मा ने कहा कि नशे की लत केवल व्यक्ति को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसका असर पूरे परिवार की खुशहाली और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। नशे के कारण परिवार की आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा और भविष्य की योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि शराब और अन्य नशीले पदार्थों पर खर्च होने वाली रकम को बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य के निर्माण में लगाया जाए। उनके अनुसार, परिवार के सदस्यों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना और युवाओं को सही दिशा दिखाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही उन्होंने चुनाव के दौरान नशे और अन्य प्रलोभनों से दूर रहकर विवेकपूर्ण निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही स्वस्थ लोकतंत्र और मजबूत समाज के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
अभय कुमार शर्मा ने दिव्यांगजनों के अधिकारों पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को दया की दृष्टि से देखने के बजाय उन्हें सम्मान, समान अवसर और आत्मनिर्भर बनने के लिए आवश्यक सहयोग मिलना चाहिए। समाज में उनकी प्रतिभा और क्षमताओं को पहचानना जरूरी है, ताकि वे भी अपने सपनों को पूरा कर सकें।
नशे से प्रभावित लोगों को सहयोग देने की अपील
गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट के संस्थापक रवि प्रकाश चौबे ने कहा कि नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के प्रति तिरस्कार का भाव रखने के बजाय उन्हें सहयोग और उचित मार्गदर्शन देना चाहिए। परिवार और समाज का सकारात्मक व्यवहार नशे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए सहायक हो सकता है।
वहीं, अभियान के ब्रांड एंबेसडर अरुण शंकर पाठक ने कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, पारिवारिक सहयोग और सही मार्गदर्शन से नशे की लत से बाहर निकलने की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नशे की समस्या को केवल व्यक्तिगत कमजोरी मानकर नजरअंदाज न करें, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित व्यक्ति को उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित करें।
इस दौरान पांच दिव्यांगजनों को सम्मानित किया गया। इस पहल के माध्यम से उनके आत्मसम्मान, सामाजिक भागीदारी और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
सोनभद्र के गांवों और शहरों तक पहुंचेगा अभियान
यात्रा के संयोजक एवं यूथ आइकॉन सौरभ कांत पति तिवारी ने कहा कि नशामुक्ति का संदेश सोनभद्र के गांवों और शहरों तक पहुंचाने के लिए अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने जनभागीदारी को इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
उनके अनुसार, नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को अपने व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव लाना होगा। विशेष रूप से युवाओं को शिक्षा, खेल, रोजगार और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
कार्यक्रम का संचालन प्रभात सिंह चंदेल ने किया। आयोजन में ग्राम प्रधान राजेंद्र मौर्य सहित आयोजन मंडल के सदस्य और सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
सामाजिक बदलाव के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
सोनभद्र में आयोजित नशा मुक्ति संकल्प यात्रा और मशाल जुलूस ने नशे के खिलाफ जागरूकता के साथ दिव्यांगजनों के सम्मान और समान अधिकारों का महत्वपूर्ण संदेश दिया। अभियान के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि स्वस्थ परिवार, जागरूक युवा और समावेशी समाज ही बेहतर भविष्य की नींव हैं।

