मेरठ से हाईकोर्ट बेंच की मांग तेज, 22 जिलों में न्याय रथ यात्रा शुरू; 2 दिसंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित करने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने आंदोलन तेज कर दिया है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को मेरठ कचहरी परिसर से न्याय रथ यात्रा का शुभारंभ किया गया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ और ‘सस्ता व सुलभ न्याय हमारा अधिकार’ जैसे नारे लगाकर अपनी मांग को प्रमुखता से उठाया। इस अभियान के तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में जनसंपर्क किया जाएगा। वहीं, आंदोलन के अगले बड़े चरण में 2 दिसंबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की गई है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को हाईकोर्ट से संबंधित मामलों की पैरवी के लिए प्रयागराज तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे समय और धन दोनों खर्च होते हैं। इसलिए क्षेत्र में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित होने से लोगों को न्याय पाने में सुविधा मिल सकती है।
मेरठ कचहरी से न्याय रथ यात्रा का शुभारंभ
न्याय रथ यात्रा का शुभारंभ 14 अक्टूबर को सुबह करीब 10:30 बजे मेरठ कचहरी परिसर में किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्र हुए। कार्यक्रम की शुरुआत नारियल फोड़कर और रिबन काटकर की गई। इसके बाद शंखध्वनि और नारों के बीच न्याय रथ को रवाना किया गया।
यात्रा के शुभारंभ के दौरान अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। उनके अनुसार, पांच दशकों से अधिक समय बीतने के बावजूद इस मांग पर ठोस निर्णय नहीं हो सका है। अब इस मुद्दे को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए आंदोलन को आम नागरिकों तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।
इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने कहा कि न्याय तक पहुंच आसान बनाना केवल वकीलों का विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक से है।
शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा न्याय रथ
मेरठ कचहरी परिसर से रवाना होने के बाद न्याय रथ शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरा। इसमें बेगमपुल चौराहा, हापुड़ रोड, गढ़ रोड, दिल्ली रोड, बागपत रोड, रोहटा रोड, पल्लवपुरम, गंगानगर और मवाना रोड सहित अन्य क्षेत्रों को शामिल किया गया।
इस दौरान बेगमपुल पर अधिवक्ताओं ने रुककर करीब आधे घंटे तक जनसंपर्क किया। उन्होंने लोगों को हाईकोर्ट बेंच की मांग के पीछे के कारणों की जानकारी दी और अभियान से जुड़ने की अपील की।
अधिवक्ताओं ने दुकानदारों, व्यापारियों, रिक्शा चालकों, होटल संचालकों, सब्जी विक्रेताओं, ठेला लगाने वालों और अन्य नागरिकों से बातचीत की। उनका प्रयास है कि यह मुद्दा केवल न्यायिक समुदाय तक सीमित न रहे, बल्कि आम जनता भी इसकी आवश्यकता और संभावित लाभों को समझे।
22 जिलों में हर बुधवार और शनिवार को निकलेगी यात्रा
केंद्रीय संघर्ष समिति की 7 अक्टूबर को सहारनपुर में हुई बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में न्याय रथ यात्रा निकालने की रणनीति तय की गई थी। इसी निर्णय के तहत मेरठ से अभियान की शुरुआत की गई है।
आयोजकों के मुताबिक, इस अभियान के अंतर्गत हर बुधवार और शनिवार को अलग-अलग क्षेत्रों में न्याय रथ यात्राएं निकाली जाएंगी। इन यात्राओं के माध्यम से लोगों को हाईकोर्ट बेंच की मांग, मुकदमों की पैरवी में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और क्षेत्रीय स्तर पर न्यायिक सुविधा की जरूरत के बारे में जागरूक किया जाएगा।
इसके अलावा, तहसील स्तर की बार एसोसिएशनों और स्थानीय संगठनों को भी आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। अधिवक्ताओं की योजना है कि लगातार जनसंपर्क के माध्यम से 2 दिसंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
‘बेंच हमारा अधिकार, कोई भीख नहीं’
मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज कुमार शर्मा ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग लगभग 50 वर्षों से उठाई जा रही है। उन्होंने बताया कि सहारनपुर में हुई बैठक में तय रणनीति के अनुसार मेरठ की धरती से न्याय रथ यात्रा शुरू की गई है।
अनुज कुमार शर्मा के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को न्यायिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में क्षेत्र में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित होने से आम लोगों को सुविधा मिल सकती है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इस मांग पर निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी को न्यायिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ठोस पहल की जानी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब देश के अन्य क्षेत्रों में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित की जा सकती है, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मांग पर निर्णय क्यों नहीं लिया जा रहा है।
परवेज आलम बोले—जनता तक पहुंचाएंगे आंदोलन का संदेश
मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री और केंद्रीय संघर्ष समिति के संयोजक परवेज आलम ने बताया कि 7 अक्टूबर को सहारनपुर में हुई बैठक में 22 जिलों में न्याय रथ यात्रा निकालने का फैसला लिया गया था। उसी निर्णय के तहत मेरठ से अभियान की शुरुआत हुई है।
उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद किया जा रहा है, ताकि लोग समझ सकें कि हाईकोर्ट बेंच की मांग का संबंध आम नागरिकों की सुविधा और न्याय तक पहुंच से है।
परवेज आलम ने कहा कि अधिवक्ताओं का संदेश स्पष्ट है—‘बेंच दीजिए, वोट लीजिए; बेंच नहीं तो वोट नहीं।’ यह नारा आंदोलन की मांग को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता से उठाने के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि न्याय रथ यात्रा 2 दिसंबर तक जारी रहेगी और इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा।
2 दिसंबर को जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन
न्याय रथ यात्रा का अगला प्रमुख पड़ाव 2 दिसंबर 2026 को दिल्ली का जंतर-मंतर होगा। आयोजकों के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों और तहसील बार एसोसिएशनों से बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के दिल्ली पहुंचने की योजना है। वहां पैदल मार्च और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से हाईकोर्ट बेंच की मांग उठाई जाएगी।
इस आंदोलन का राजनीतिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ का नारा क्षेत्रीय मुद्दे को राजनीतिक चर्चा में ला सकता है। हालांकि, आंदोलन का अगला प्रभाव सरकार की प्रतिक्रिया, जनभागीदारी और विभिन्न संगठनों के समर्थन पर निर्भर करेगा।

