बिजनौर में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों ने निकाली की न्याय यात्रा, बैरिकेडिंग पार कर पहुंचे कलेक्ट्रेट
रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा
बिजनौर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर बिजनौर में अधिवक्ताओं ने न्याय यात्रा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। जजी परिसर से कलेक्ट्रेट तक निकाली गई इस यात्रा के दौरान पुलिस ने नुमाइश ग्राउंड के पास बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, अधिवक्ताओं ने बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ना जारी रखा और प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने अपनी आवाज बुलंद की।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का मुद्दा लंबे समय से अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है। वकीलों का कहना है कि क्षेत्र में हाईकोर्ट बेंच स्थापित होने से लोगों को न्याय पाने के लिए दूर की यात्रा करने की परेशानी कम हो सकती है। इसी मांग को लेकर बिजनौर में आयोजित न्याय यात्रा के जरिए अधिवक्ताओं ने सरकार और संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
जजी परिसर से कलेक्ट्रेट तक निकाली न्याय यात्रा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिजनौर में अधिवक्ताओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर जजी परिसर से न्याय यात्रा शुरू की। यात्रा का उद्देश्य अपनी मांग को प्रशासन तक पहुंचाना और इस विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।
न्याय यात्रा में शामिल अधिवक्ता प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। रास्ते में नुमाइश ग्राउंड के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया। इसके बाद मौके पर स्थिति उस समय बदल गई, जब अधिवक्ताओं ने बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ना शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारी वकील बैरिकेडिंग पार करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस घटनाक्रम के दौरान पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच रास्ता रोकने को लेकर स्थिति बनी रही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी के घायल होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं की गई है।
नुमाइश ग्राउंड पर पुलिस ने लगाई बैरिकेडिंग
न्याय यात्रा के दौरान नुमाइश ग्राउंड के पास पुलिस की ओर से बैरिकेडिंग लगाए जाने की बात सामने आई। इसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकना बताया गया। दूसरी ओर, अधिवक्ता अपनी मांग को लेकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचना चाहते थे।
इसी क्रम में वकीलों ने बैरिकेडिंग पार की और प्रदर्शन जारी रखते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए। इस घटनाक्रम ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।
ऐसे प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है, ताकि लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो और प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके। वहीं, अधिवक्ताओं की मांग पर संबंधित स्तर पर संवाद और विचार-विमर्श भी इस मुद्दे के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग क्यों उठती रही है?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग का प्रमुख आधार न्याय तक पहुंच को आसान बनाना है। अधिवक्ताओं और इस मांग का समर्थन करने वाले लोगों का तर्क है कि क्षेत्र में बड़ी आबादी को कानूनी मामलों के सिलसिले में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर हाईकोर्ट बेंच स्थापित होने से समय और यात्रा संबंधी परेशानियों में कमी आने की उम्मीद जताई जाती है।
इसके अलावा, क्षेत्र में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार और मुकदमों से जुड़े लोगों की सहूलियत का मुद्दा भी इस मांग से जुड़ा है। अधिवक्ता समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों, सभाओं और आंदोलनों के माध्यम से इस विषय को उठाते रहे हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट बेंच की स्थापना एक नीतिगत और संस्थागत विषय है। इसके लिए संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श तथा आवश्यक प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी होता है। बिजनौर में निकाली गई न्याय यात्रा भी इसी व्यापक मांग के समर्थन में आयोजित की गई।
अधिवक्ता राजेंद्र सिंह ने उठाई मांग
इस मामले में अधिवक्ता राजेंद्र सिंह की बाइट भी सामने आई है। न्याय यात्रा में शामिल अधिवक्ताओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
अधिवक्ताओं का मानना है कि इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाने से सरकार और संबंधित संस्थाओं तक उनकी मांग पहुंचाने में मदद मिलेगी। हालांकि, न्याय यात्रा के बाद प्रशासन की ओर से किसी ज्ञापन को स्वीकार किए जाने, मांग पर कोई आधिकारिक निर्णय होने या आगे की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए फिलहाल इस प्रदर्शन को हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं की ओर से किए गए विरोध और जनध्यान आकर्षित करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
न्यायिक सुविधाओं के विस्तार पर फिर केंद्रित हुई चर्चा
बिजनौर में निकाली गई न्याय यात्रा के दौरान बैरिकेडिंग पार कर कलेक्ट्रेट पहुंचने की घटना ने हाईकोर्ट बेंच की मांग को फिर से स्थानीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अधिवक्ता चाहते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार के मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए।
आने वाले समय में इस मांग को लेकर अधिवक्ताओं की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और संबंधित स्तर पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल न्याय यात्रा के माध्यम से वकीलों ने अपनी मांग को सार्वजनिक रूप से उठाया है।
निष्कर्ष: बिजनौर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने जजी परिसर से कलेक्ट्रेट तक न्याय यात्रा निकाली। नुमाइश ग्राउंड पर पुलिस की बैरिकेडिंग के बावजूद वकील उसे पार कर कलेक्ट्रेट पहुंचे। अधिवक्ताओं की मांग है कि क्षेत्र में न्यायिक सुविधाओं का विस्तार किया जाए, ताकि लोगों को न्याय पाने में होने वाली दूरी और यात्रा संबंधी परेशानियों से राहत मिल सके।

