सोनभद्र में रामलीला के दौरान श्रीराम-सीता विवाह का भव्य मंचन, मंगलगीतों और जयकारों से गूंजा मैदान
रिपोर्ट – ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी
सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज स्थित ऐतिहासिक श्री रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला के छठवें दिन भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। रामलीला की 125 वर्ष पुरानी परंपरा के तहत आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। विवाह के मंगलमय दृश्यों, पारंपरिक मंगलगीतों और भक्तिमय संगीत ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। इस दौरान ‘जय श्रीराम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से रामलीला मैदान गूंज उठा।
कार्यक्रम में ‘आदर्श श्री रामलीला मंडल पिपलेश्वर धाम (सिंगरौली)’ के कलाकारों ने अपनी अभिनय प्रतिभा के माध्यम से रामायण के विवाह प्रसंग को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। मंच पर प्रस्तुत दृश्यों को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वहीं, विवाह समारोह के दौरान दर्शकों ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीराम, माता सीता और चारों भाइयों के विवाह प्रसंग का स्वागत किया।
125 वर्षों से चली आ रही रामलीला की परंपरा
रॉबर्ट्सगंज का ऐतिहासिक श्री रामलीला मैदान धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। यहां आयोजित रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा से जुड़े प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। इस वर्ष भी रामलीला के विभिन्न कार्यक्रमों में श्रद्धालु उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।
आयोजन के छठवें दिन विशेष रूप से भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग को केंद्र में रखा गया। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, संवाद और अभिनय के माध्यम से मिथिलापुरी में हुए विवाह समारोह का दृश्य प्रस्तुत किया। इसके साथ ही मंच पर दिखाए गए धार्मिक और सांस्कृतिक प्रसंगों ने दर्शकों को रामायण की कथा से जोड़े रखा।
रामलीला जैसे आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय धार्मिक कथाओं, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित होने का अवसर मिलता है।
राजा जनक के संदेश से अयोध्या में शुरू हुई विवाह की तैयारियां
रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि मिथिलापुरी के राजा जनक अपनी पुत्री माता सीता के विवाह का शुभ संदेश अयोध्या के राजा दशरथ तक पहुंचाते हैं। संदेश मिलने के बाद अयोध्या में विवाह की तैयारियां शुरू होती हैं। इसके बाद राजा दशरथ भव्य बारात लेकर मिथिलापुरी पहुंचते हैं।
मिथिलापुरी में बारात के आगमन पर राजा जनक और वहां के निवासी उसका स्वागत करते हैं। मंच पर बारात के स्वागत और विवाह समारोह से जुड़े दृश्यों को पारंपरिक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की अदाकारी और संवादों ने इस प्रसंग को आकर्षक बनाया।
इसके बाद गुरु वशिष्ठ और महर्षि विश्वामित्र के मार्गदर्शन में विवाह की रस्में शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार संपन्न होती दिखाई गईं। विवाह के दौरान प्रस्तुत मंगलगीतों और बधाइयों ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया। दर्शक भी इस धार्मिक आयोजन में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल रहे।
चारों भाइयों के विवाह का भावपूर्ण मंचन
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह रहा। इसके साथ ही भगवान श्रीराम के तीनों भाइयों के विवाह प्रसंग भी मंचित किए गए। भगवान श्रीराम का माता सीता, लक्ष्मण का उर्मिला, भरत का माण्डवी और शत्रुघ्न का श्रुतकीर्ति के साथ विवाह दिखाया गया।
चारों भाइयों के विवाह के दृश्यों के दौरान रामलीला मैदान में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर नवविवाहित जोड़ों का अभिनंदन किया। इस दौरान मंगलगीतों, पारंपरिक बधाइयों और भक्ति संगीत की गूंज सुनाई देती रही।
विवाह प्रसंग के मंचन ने दर्शकों को रामायण की उस परंपरा की याद दिलाई, जिसमें पारिवारिक संबंधों, संस्कारों और सामाजिक समरसता को विशेष महत्व दिया गया है। कलाकारों ने प्रसंग की भावनाओं को अपने अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिससे श्रद्धालुओं को कथा से जुड़ने का अवसर मिला।
जय श्रीराम के जयकारों से भक्तिमय हुआ वातावरण
विवाह समारोह के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जैसे-जैसे विवाह से जुड़े दृश्य आगे बढ़े, वैसे-वैसे परिसर में भक्ति का माहौल और अधिक उत्साहपूर्ण होता गया। ‘जय श्रीराम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
इसके अलावा, मंगलगीतों और बधाइयों ने पारंपरिक विवाह समारोह जैसा वातावरण तैयार किया। पुष्पवर्षा के बीच मंच पर प्रस्तुत दृश्यों ने कार्यक्रम को यादगार बनाया। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ परिवार और समाज के साथ मिलकर सांस्कृतिक उत्सव मनाने का अवसर भी बना।
रामलीला के ऐसे मंचन में केवल कथा का प्रदर्शन ही नहीं होता, बल्कि लोकगीतों, पारंपरिक वेशभूषा, संवादों और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत भी सामने आती है।
सदर विधायक सहित कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सदर विधायक भूपेश चौबे उपस्थित रहे। उनके अलावा रामलीला समिति के अध्यक्ष पवन जैन, राकेश गुप्ता, प्रमोद गुप्ता, आनंद मिश्रा, डॉ. धर्मवीर तिवारी, अनिल द्विवेदी, विमल अग्रवाल, चंदन केसरी, राम प्रसाद यादव, चंद्र कुमार केजरीवाल, राजेश जायसवाल और विनय जायसवाल सहित अन्य गणमान्य लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने रामलीला के आयोजन और कलाकारों की प्रस्तुति का हिस्सा बनकर धार्मिक परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
निष्कर्ष: सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज स्थित ऐतिहासिक श्री रामलीला मैदान में रामलीला के छठवें दिन श्रीराम-सीता विवाह का मंचन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। चारों भाइयों के विवाह प्रसंग, मंगलगीतों, पुष्पवर्षा और जयकारों ने आयोजन को विशेष बना दिया। रामलीला की 125 वर्ष पुरानी परंपरा के तहत हो रहा यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बना हुआ है।

