हापुड़ में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, जंगल में चल रहे मावे के कारोबार पर छापा; 3.50 कुंतल माल बरामद

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रिपोर्ट – यतेंद्र भारद्वाज 

हापुड़: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने मावे के कारोबार से जुड़े एक ठिकाने पर छापेमारी की। थाना हाफिजपुर क्षेत्र में जंगल के बीच चल रहे मावे के कारोबार पर की गई इस कार्रवाई के दौरान करीब 3.50 कुंतल मावा और मिल्क पाउडर बरामद किया गया। कार्रवाई का नेतृत्व सहायक आयुक्त खाद्य चंद्रशेखर मिश्र ने अपनी टीम के साथ किया। विभाग की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मावे के कारोबार और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर यह कारोबार संचालित हो रहा था, वहां आसपास सैकड़ों पशुओं वाली डेयरियां भी मौजूद थीं। खाद्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की और मावे के साथ मिल्क पाउडर बरामद किया। हालांकि, बरामद सामग्री की गुणवत्ता, उसमें मिलावट की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई से संबंधित विस्तृत जानकारी विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

हापुड़ में जंगल के बीच चल रहा था मावे का कारोबार

हापुड़ जिले के हाफिजपुर थाना क्षेत्र में खाद्य विभाग की कार्रवाई उस समय चर्चा में आई, जब टीम ने जंगल के बीच संचालित मावे के कारोबार पर छापा मारा। मिली जानकारी के मुताबिक, संबंधित स्थान पर मावे का काम किया जा रहा था और आसपास बड़ी संख्या में पशुओं वाली डेयरियां मौजूद थीं।

खाद्य विभाग को इस कारोबार के संबंध में मिली जानकारी के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। छापेमारी के दौरान करीब 3.50 कुंतल मावा और मिल्क पाउडर बरामद होने की बात सामने आई है। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करना और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि बरामद मावे का निर्माण किन परिस्थितियों में किया जा रहा था और उसमें किसी तरह की मिलावट पाई गई है या नहीं। इसलिए जांच रिपोर्ट आने से पहले पूरे बरामद माल को मिलावटी घोषित करना उचित नहीं होगा।

सहायक आयुक्त खाद्य चंद्रशेखर मिश्र के नेतृत्व में छापा

इस कार्रवाई में सहायक आयुक्त खाद्य चंद्रशेखर मिश्र और विभागीय टीम शामिल रही। टीम ने मौके पर पहुंचकर मावे के कारोबार से संबंधित जांच-पड़ताल की। कार्रवाई के दौरान बरामद सामग्री को लेकर आवश्यक विभागीय प्रक्रिया अपनाए जाने की जानकारी सामने आई है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी करना और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में मावा, दूध, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इनका उपयोग बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन करते हैं।

त्योहारों और विशेष अवसरों पर मावे की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, हापुड़ की इस कार्रवाई का त्योहारों से कोई सीधा संबंध होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

करीब 3.50 कुंतल मावा और मिल्क पाउडर बरामद

छापेमारी की सबसे प्रमुख बात करीब 3.50 कुंतल मावा और मिल्क पाउडर की बरामदगी है। इतनी मात्रा में सामग्री मिलने के बाद उसके स्रोत, निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

मावा कई मिठाइयों को तैयार करने में इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसकी गुणवत्ता सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की सुरक्षा से जुड़ी होती है। यदि किसी खाद्य पदार्थ में निर्धारित मानकों के विपरीत सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे खाद्य सुरक्षा संबंधी नियमों का उल्लंघन हो सकता है। लेकिन किसी सामग्री में मिलावट की पुष्टि संबंधित नमूनों की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही की जानी चाहिए।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार छापेमारी में मावा और मिल्क पाउडर बरामद किए गए हैं। नमूनों की जांच कराई गई है या नहीं, जांच रिपोर्ट क्या है और विभाग ने आगे क्या कार्रवाई की है, इन बिंदुओं पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

डेयरियों के बीच कारोबार, जांच के दायरे में गुणवत्ता

बताया गया है कि जिस स्थान पर मावे का कारोबार चल रहा था, उसके आसपास सैकड़ों पशुओं वाली डेयरियां थीं। इस वजह से वहां दूध और दुग्ध उत्पादों से संबंधित गतिविधियों की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, केवल डेयरियों की मौजूदगी के आधार पर उनके संचालकों की किसी अनियमितता में संलिप्तता मान लेना सही नहीं होगा।

जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी होगा कि बरामद सामग्री कहां से लाई गई थी, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था और क्या कारोबार के लिए जरूरी नियमों का पालन किया जा रहा था। इन सवालों के जवाब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

खाद्य सुरक्षा को लेकर कार्रवाई अहम

हापुड़ के हाफिजपुर क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मावे और अन्य दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, नमूनों की जांच और नियमों का पालन आवश्यक है। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

अब इस मामले में बरामद मावे और मिल्क पाउडर की गुणवत्ता, कारोबार से जुड़े दस्तावेजों तथा विभाग की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। सहायक आयुक्त खाद्य चंद्रशेखर मिश्र और उनकी टीम की ओर से की गई कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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