संतकबीरनगर: नवोदय विद्यालय हरिहरपुर में बाल सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक हुए विद्यार्थी
रिपोर्ट: शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी
संतकबीरनगर, 13 अक्टूबर 2026। जनपद संतकबीरनगर के नवोदय विद्यालय, हरिहरपुर में विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा, लैंगिक हिंसा, पॉक्सो एक्ट और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कबीर सूफी फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और ऑनलाइन सतर्कता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। साथ ही, उन्हें सुरक्षित व्यवहार अपनाने और किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर सही समय पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना, उन्हें संभावित जोखिमों को पहचानने में सक्षम करना तथा विद्यालय में सुरक्षित, संवेदनशील और बाल-अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि जागरूकता और सही जानकारी के माध्यम से वे स्वयं को सुरक्षित रखने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बाल सुरक्षा और पॉक्सो एक्ट के बारे में दी गई जानकारी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराधों की रोकथाम तथा बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी गई। विशेष रूप से पॉक्सो एक्ट यानी लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के महत्व को समझाया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
इसके साथ ही, बच्चों को अपनी व्यक्तिगत सीमाओं को समझने, असहज महसूस कराने वाले व्यवहार को पहचानने और जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद व्यक्ति से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें यह भी समझाया गया कि किसी भी अनुचित व्यवहार को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी जानकारी अभिभावक, शिक्षक, काउंसलर या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना जरूरी है।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बाल सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विद्यालय, समाज और संबंधित संस्थाओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए बच्चों के आसपास ऐसा वातावरण होना चाहिए, जिसमें वे बिना डर के अपनी बात रख सकें और जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त कर सकें।
लैंगिक हिंसा की पहचान और सुरक्षित व्यवहार पर जोर
कार्यक्रम के दूसरे महत्वपूर्ण हिस्से में विद्यार्थियों को लैंगिक हिंसा की पहचान और उससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि सम्मानजनक व्यवहार, आपसी सहमति, व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान और दूसरों की गरिमा बनाए रखना एक सुरक्षित समाज की बुनियादी आवश्यकताएं हैं।
इसके अलावा, विद्यार्थियों को सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार के बीच अंतर समझाया गया। उन्हें बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति ऐसा व्यवहार करता है जिससे उन्हें असहजता, डर या असुरक्षा महसूस होती है, तो वे अपनी बात स्पष्ट रूप से रख सकते हैं और किसी विश्वसनीय वयस्क की मदद ले सकते हैं।
वहीं, शिक्षकों और काउंसलर की भूमिका पर भी चर्चा की गई। विद्यालय में बच्चों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना और उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेना आवश्यक है। इससे विद्यार्थियों में विश्वास बढ़ता है और वे कठिन परिस्थितियों में मदद मांगने के लिए आगे आ सकते हैं।
साइबर सुरक्षा के प्रति विद्यार्थियों को किया गया सतर्क
आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए साइबर सुरक्षा की जानकारी होना भी बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में ऑनलाइन सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के उपायों पर विशेष चर्चा की गई।
विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी तथा अन्य संवेदनशील विवरण अनजान लोगों के साथ साझा न करें। इसके अलावा, अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध संदेशों पर भरोसा करने और इंटरनेट पर अपरिचित व्यक्तियों से निजी जानकारी साझा करने से बचने की सलाह दी गई।
साथ ही, विद्यार्थियों को बताया गया कि यदि उन्हें ऑनलाइन धमकी, परेशान करने वाले संदेश, साइबर उत्पीड़न या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि का सामना करना पड़े, तो वे संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखें और अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दें। समय रहते शिकायत करने से समस्या का समाधान करने और आगे होने वाली परेशानी को रोकने में मदद मिल सकती है।
बाल संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी बल दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता के साथ-साथ संवेदनशीलता और सहयोग की भावना आवश्यक है। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न या असुरक्षित स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित सहायता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
इसके अतिरिक्त, विद्यालयों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने से बच्चों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिलता है। ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करने में सहायक हो सकते हैं।
कबीर सूफी फाउंडेशन की इस पहल का उद्देश्य भी विद्यार्थियों को सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम ने बाल संरक्षण, लैंगिक संवेदनशीलता और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को विद्यार्थियों के बीच चर्चा का हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।
कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित
नवोदय विद्यालय, हरिहरपुर में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य डॉ. अजय कुमार पांडेय, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रीकांत तिवारी, विद्यालय की काउंसलर डॉ. कामेश्वरी मिश्रा, कबीर सूफी फाउंडेशन की काउंसलर अस्मिता त्रिपाठी और आउटरीच कार्यकर्ता सूर्य प्रकाश ओझा उपस्थित रहे।
इसके अलावा, विद्यालय के शिक्षकगण तथा कक्षा 9वीं और 11वीं के विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा, कानूनी अधिकारों, लैंगिक हिंसा की पहचान और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
कुल मिलाकर, नवोदय विद्यालय हरिहरपुर में आयोजित यह पहल विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण रही। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों को सही निर्णय लेने, जरूरत पड़ने पर सहायता मांगने और डिजिटल दुनिया में जिम्मेदारी से व्यवहार करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

