बांदा में 13 सूत्रीय मांगों को लेकर नर्सिंग कर्मचारियों का विरोध जारी, 20 अक्टूबर तक काला फीता बांधकर करेंगे ड्यूटी
रिपोर्ट – शानू वर्मा
बांदा। उत्तर प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नर्सिंग कर्मचारी अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में बांदा स्थित रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कर्मचारी 9 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक काला फीता बांधकर ड्यूटी कर रहे हैं। इसके माध्यम से कर्मचारी अपनी लंबित मांगों के प्रति शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। मंगलवार को आंदोलन का पांचवां दिन रहा। संघ का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
13 सूत्रीय मांगों को लेकर नर्सिंग कर्मचारियों का आंदोलन
राजकीय नर्सेज संघ, उत्तर प्रदेश की शाखा चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के अंतर्गत आने वाले मेडिकल कॉलेजों में यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष बीना त्रिपाठी के अनुसार, नर्सिंग संवर्ग की 13 सूत्रीय मांगों के संबंध में शासन और प्रशासन को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद मांगों के निस्तारण के लिए आवश्यक शासनादेश जारी नहीं किए गए हैं।
ऐसी स्थिति में संघ ने अपने सदस्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए आंदोलन का निर्णय लिया। आंदोलन की रूपरेखा 26 सितंबर 2026 को आयोजित संघ की कार्यकारिणी बैठक में सर्वसम्मति से निर्धारित की गई थी। इसके बाद तय कार्यक्रम के अनुसार 9 अक्टूबर से विरोध शुरू किया गया।
संघ का कहना है कि नर्सिंग कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इसलिए कर्मचारियों को उम्मीद है कि शासन उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगा और जल्द आवश्यक निर्णय लेगा।
समान भत्ता, एसीपी और पदोन्नति प्रमुख मांगें
नर्सिंग कर्मचारियों की 13 सूत्रीय मांगों में कई ऐसे मुद्दे शामिल हैं, जिनका संबंध कर्मचारियों की सेवा शर्तों, आर्थिक लाभ और भविष्य की संभावनाओं से है। संघ ने समान कार्य के लिए समान भत्ते देने की मांग उठाई है। इसके साथ ही कर्मचारियों को एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) का लाभ उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त नर्सिंग संवर्ग में लंबे समय से लंबित पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की गई है। संघ का मानना है कि समय पर पदोन्नति और निर्धारित सेवा लाभ मिलने से कर्मचारियों को अपने कार्य के प्रति प्रोत्साहन मिलता है। वहीं, संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
इन मांगों के अलावा संघ ने अन्य लंबित समस्याओं का समाधान करने और संबंधित विषयों पर आवश्यक शासनादेश जारी करने की अपील की है। हालांकि, सभी मांगों के निस्तारण को लेकर शासन की ओर से किसी नए निर्णय की जानकारी इस बयान में नहीं दी गई है।
20 अक्टूबर तक काला फीता बांधकर करेंगे ड्यूटी
संघ की ओर से घोषित कार्यक्रम के तहत 20 अक्टूबर 2026 तक नर्सिंग कर्मचारी काला फीता बांधकर अपने कार्यस्थल पर नियमित ड्यूटी करते हुए विरोध दर्ज कराएंगे। इस तरीके से कर्मचारी अपनी मांगों को सामने रखते हुए मरीजों की देखभाल और निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन जारी रखेंगे।
काला फीता बांधकर विरोध जताना आंदोलन के पहले चरण का हिस्सा है। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर विरोध को आगे बढ़ाने की तैयारी की गई है। संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा।
21 अक्टूबर को दो घंटे का कार्य बहिष्कार
आंदोलन के अगले चरण में 21 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे से 10 बजे तक दो घंटे का कार्य बहिष्कार प्रस्तावित है। इस दौरान नर्सिंग कर्मचारी मेडिकल कॉलेज परिसर में एकत्रित होकर अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इसके बाद 22 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय पर धरना-प्रदर्शन करने की योजना है। संघ के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य शासन तक कर्मचारियों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाना और लंबित मांगों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
हालांकि, कार्य बहिष्कार के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में संबंधित संस्थानों में मरीजों की देखभाल और आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो रोजाना कार्य बहिष्कार की चेतावनी
राजकीय नर्सेज संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 13 सूत्रीय मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो 22 अक्टूबर से प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 10 बजे तक कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इस घोषणा से स्पष्ट है कि संघ फिलहाल चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
प्रदेश अध्यक्ष बीना त्रिपाठी ने शासन से अपील की है कि नर्सिंग कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि उनकी समस्याओं पर सकारात्मक पहल की जाए।
शासन से जल्द समाधान की उम्मीद
नर्सिंग कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। मरीजों की देखभाल, उपचार के दौरान सहायता और अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं का समय पर समाधान करना आवश्यक माना जाता है।
संघ ने शासन और प्रशासन से अपील की है कि 13 सूत्रीय मांगों पर विचार कर आवश्यक शासनादेश जारी किए जाएं, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके और आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत न पड़े।
फिलहाल, बांदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कर्मचारियों का विरोध निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है। अब देखना होगा कि शासन की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या कर्मचारियों को आंदोलन के अगले चरण में जाने से पहले कोई राहत मिलती है।

