संतकबीरनगर में ग्राम प्रहरियों को साइबर अपराधों से बचाव और डिजिटल सुरक्षा के प्रति किया गया जागरूक
रिपोर्ट- शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी
संतकबीरनगर। साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आमजन को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से संतकबीरनगर पुलिस ने महत्वपूर्ण पहल की है। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में पुलिस लाइन स्थित सभागार में जनपद के समस्त ग्राम प्रहरियों के लिए साइबर जागरूकता एवं सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान ग्राम प्रहरियों को साइबर ठगी के विभिन्न तरीकों, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित इस्तेमाल करने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह द्वारा क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय की उपस्थिति में आयोजित किया गया। साइबर क्राइम थाना की टीम ने ग्राम प्रहरियों को जागरूक करते हुए बताया कि वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधी भी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता, सही जानकारी और समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद आवश्यक है।
अज्ञात कॉल और संदिग्ध लिंक से रहें सावधान
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस टीम ने बताया कि साइबर ठग अज्ञात फोन कॉल, संदिग्ध लिंक, फर्जी ई-मेल, लॉटरी जीतने के संदेश और आकर्षक ऑफर के माध्यम से लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। इसके अलावा, क्यूआर कोड स्कैन कराने, फर्जी क्रेडिट सुविधा देने और वर्क फ्रॉम होम के नाम पर भी लोगों को निशाना बनाया जा सकता है।
पुलिस अधिकारियों ने ग्राम प्रहरियों को समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों में आकर जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। यदि किसी फोन कॉल या संदेश में इनाम मिलने, कम समय में अधिक कमाई करने अथवा किसी विशेष योजना का लाभ दिलाने का दावा किया जाता है, तो उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।
इसी क्रम में संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने और अज्ञात स्रोतों से प्राप्त फाइलों को डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी गई। विशेष रूप से संदिग्ध APK फाइलों को मोबाइल फोन में इंस्टॉल करने से होने वाले संभावित नुकसान के बारे में भी जागरूक किया गया।
बैंक खाते की जानकारी और ओटीपी किसी से साझा न करें
साइबर जागरूकता कार्यक्रम में बैंकिंग सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। ग्राम प्रहरियों को बताया गया कि बैंक खाते का विवरण, एटीएम या कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य निजी जानकारियां किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
अक्सर साइबर अपराधी बैंक कर्मचारी, पुलिस अधिकारी या सरकारी विभाग का प्रतिनिधि बनकर लोगों से संपर्क करते हैं। वे कभी खाते से संबंधित समस्या का हवाला देते हैं, तो कभी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर गोपनीय जानकारी हासिल करने या धनराशि हस्तांतरित कराने की कोशिश करते हैं। इसी तरह सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर भी ठगी की जा सकती है।
इसलिए पुलिस टीम ने ग्राम प्रहरियों को सलाह दी कि किसी भी व्यक्ति की पहचान और उसके दावे की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बताकर पैसे मांगता है, तो संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से जानकारी का सत्यापन करें। साथ ही, किसी भी प्रकार के दबाव या डर में आकर वित्तीय लेनदेन करने से बचें।
साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें शिकायत
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराध का शिकार होने की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी भी दी गई। पुलिस टीम ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल https://cybercrime.gov.in के माध्यम से भी ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी की घटना सामने आने पर समय पर शिकायत करना महत्वपूर्ण है। इसलिए पीड़ित व्यक्ति को लेनदेन से संबंधित संदेश, ट्रांजैक्शन आईडी, फोन नंबर, संदिग्ध लिंक और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना चाहिए। शिकायत दर्ज कराने में देरी करने के बजाय तुरंत संबंधित माध्यमों का उपयोग करना चाहिए।
इसके साथ ही, ग्राम प्रहरियों को बताया गया कि वे अपने गांवों में रहने वाले लोगों को भी इन सावधानियों के बारे में जानकारी दें, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
गांवों में डिजिटल सुरक्षा का संदेश पहुंचाने पर जोर
ग्राम प्रहरी ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस और आमजन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। ऐसे में उन्हें साइबर अपराधों की जानकारी देना गांवों में जागरूकता फैलाने की दिशा में उपयोगी कदम है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम प्रहरियों को साइबर अपराधों के प्रति सजग बनाना, डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने के लिए प्रेरित करना और ऑनलाइन ठगी की घटनाओं से बचाव के उपायों को आमजन तक पहुंचाना रहा।
पुलिस की इस पहल के माध्यम से ग्राम प्रहरी अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को संदिग्ध फोन कॉल, फर्जी संदेश, ऑनलाइन भुगतान और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के प्रति जागरूक कर सकते हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों को समझने और समय रहते सावधानी बरतने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में प्रतिसार निरीक्षक रामबली यादव, साइबर क्राइम थाना के उपनिरीक्षक जय प्रकाश यादव, कांस्टेबल राम प्रवेश मद्देशिया सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
संतकबीरनगर पुलिस की इस जागरूकता पहल का संदेश स्पष्ट है कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है। किसी भी अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल या लालच देने वाले संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच करें। वहीं, साइबर ठगी होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं और अपने आसपास के लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाएं।

