कुशीनगर में राष्ट्रीय पोषण माह का समापन, कुपोषण मुक्त समाज बनाने पर दिया गया जोर

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र गुप्ता 

कुशीनगर: जिले में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का समापन हो गया। जिला मुख्यालय स्थित डीपीआरसी भवन के सभागार में आयोजित समापन समारोह में बच्चों को सुपोषित बनाने, मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाने और कुपोषण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांसद विजय कुमार दूबे ने कहा कि सुपोषित बचपन ही विकसित भारत की मजबूत नींव है। इसके लिए बच्चों को संतुलित आहार उपलब्ध कराने के साथ ही माताओं के स्वास्थ्य और परिवारों में पोषण संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देना जरूरी है।

बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ सांसद विजय कुमार दूबे और विशिष्ट अतिथि पडरौना सदर विधायक मनीष जायसवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि कुपोषण से बचाव केवल सरकारी योजनाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें परिवार, समाज और स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

सुपोषित बचपन से बनेगा स्वस्थ समाज

समारोह को संबोधित करते हुए सांसद विजय कुमार दूबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण के लिए मातृ स्वास्थ्य और शिशु पोषण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं, बच्चों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सुविधाओं का लाभ पहुंचाना है।

सांसद ने बच्चों के बेहतर विकास के लिए पौष्टिक आहार की उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, बचपन में उचित पोषण मिलने से बच्चों के शारीरिक विकास को सहारा मिलता है। इसके साथ ही उनके मानसिक विकास और सीखने की क्षमता के लिए भी पोषण का विशेष महत्व है।

उन्होंने कहा कि माताओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और परिवारों को पोषण के प्रति जागरूक बनाना स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में आवश्यक कदम हैं। इसलिए पोषण से जुड़ी जानकारी को केवल कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।

जनभागीदारी से मजबूत होगा पोषण अभियान

पडरौना सदर विधायक मनीष जायसवाल ने स्वस्थ मातृत्व, सुपोषित बचपन और बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ जनभागीदारी को भी आवश्यक बताया। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों से अपील की कि वे पोषण जागरूकता अभियान को जन-जन तक पहुंचाएं।

विधायक ने कहा कि जब परिवारों को संतुलित आहार, स्वच्छता और बच्चों की देखभाल से जुड़ी सही जानकारी मिलेगी, तब पोषण संबंधी व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना आसान होगा। इसके लिए गांवों और समुदायों में लगातार जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

दरअसल, पोषण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले परिवार के स्तर पर लिए जाते हैं। बच्चों को समय पर भोजन देना, उनकी उम्र और जरूरत के अनुसार आहार उपलब्ध कराना तथा मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर ध्यान देना इसमें अहम भूमिका निभाता है। इसलिए जागरूकता कार्यक्रमों में परिवारों की भागीदारी बढ़ाना भी जरूरी है।

संतुलित आहार और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान संतुलित एवं पौष्टिक आहार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, स्वच्छता और कुपोषण से बचाव के उपायों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के समुचित विकास के लिए परिवारों को पोषण संबंधी सही जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।

संतुलित आहार में शरीर की जरूरत के अनुसार विभिन्न पोषक तत्वों का शामिल होना महत्वपूर्ण है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही, बच्चों की उम्र और स्वास्थ्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भोजन संबंधी सलाह अपनानी चाहिए।

इसी तरह, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। मातृ स्वास्थ्य बेहतर होने से मां और बच्चे, दोनों की देखभाल में मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त, स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी अच्छी आदतों को अपनाने से भी परिवारों के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि पोषण संबंधी जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाए, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के परिवार इसे आसानी से समझ सकें और दैनिक जीवन में अपना सकें।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण

पोषण जागरूकता को समुदाय के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और संबंधित विभागीय कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वे परिवारों तक पोषण से जुड़ी जानकारी पहुंचाने, बच्चों की देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को लोगों तक पहुंचाने में सहयोग कर सकते हैं।

इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर नियमित संवाद और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से परिवारों को सही पोषण संबंधी व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। अभियान का उद्देश्य तभी व्यापक रूप से पूरा हो सकेगा, जब लोग पोषण को केवल किसी विशेष माह की गतिविधि न मानकर अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगे।

अभियान के बाद भी जारी रहनी चाहिए जागरूकता

कुशीनगर में राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के समापन समारोह के माध्यम से कुपोषण मुक्त समाज बनाने और बच्चों के बेहतर भविष्य का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर रहा कि स्वस्थ बचपन के लिए पौष्टिक आहार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और जनजागरूकता को साथ लेकर चलना जरूरी है।

हालांकि, पोषण संबंधी जागरूकता का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब अभियान के बाद भी परिवारों और समुदायों के बीच निरंतर संवाद बना रहे। इसके लिए सरकारी विभागों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के समन्वित प्रयास महत्वपूर्ण होंगे।

कुल मिलाकर, राष्ट्रीय पोषण माह का समापन कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सुपोषित पीढ़ी के निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाने का अवसर बना। जरूरत इस बात की है कि पोषण संबंधी सही जानकारी हर परिवार तक पहुंचे, माताओं को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें और बच्चों को बेहतर पोषण के साथ स्वस्थ भविष्य का अवसर प्राप्त हो।

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