संतकबीरनगर में पराली जलाने पर लगेगा 15 हजार तक जुर्माना, बिना स्ट्रॉ रीपर कंबाइन से कटाई प्रतिबंधित
रिपोर्ट – शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी
संतकबीरनगर: फसल कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और पर्यावरण के साथ मिट्टी की उर्वरता सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है। जिलाधिकारी अनुज मलिक ने जनपद के सभी किसान भाइयों से कहा है कि वे फसल अवशेषों को खेतों में न जलाएं। इसके साथ ही बिना स्ट्रॉ रीपर के कंबाइन हार्वेस्टिंग मशीन से फसल कटाई को प्रतिबंधित किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों और कंबाइन मशीन संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
जिलाधिकारी ने किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। साथ ही, खेतों में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे आगामी फसल की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने और उन्हें जलाने के बजाय उपयोगी विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान
फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को जलाना मिट्टी और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। जिलाधिकारी के अनुसार, पराली जलाने से भूमि में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। ये सूक्ष्म जीव मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और पोषक तत्वों के चक्र को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा, फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। धुएं के कारण आसपास के क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता प्रभावित होती है। वहीं, आग फैलने की स्थिति में खेतों, आसपास की संपत्ति और पशुओं को नुकसान पहुंचने का खतरा भी रहता है।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने से बचें और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उनका प्रबंधन करें। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कृषि भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
पराली खेत में रखने से मिट्टी को मिल सकते हैं लाभ
जिलाधिकारी ने पराली न जलाने के फायदे भी बताए। फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या और जल धारण क्षमता में सुधार हो सकता है।
विशेष रूप से, दलहनी फसलों के अवशेष मिट्टी में नाइट्रोजन सहित अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। इससे खेत की मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, फसल अवशेषों का लाभ इस बात पर भी निर्भर करता है कि उनका प्रबंधन किस तरीके से किया जा रहा है।
इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय स्ट्रॉ रीपर और अन्य उपयुक्त कृषि उपकरणों की मदद से उसका उपयोग करें। इससे कृषि अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और खेतों में आग लगाने की जरूरत भी कम होगी।
पराली जलाने पर क्षेत्रफल के अनुसार जुर्माना
जिलाधिकारी अनुज मलिक ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), नई दिल्ली के निर्देशों के तहत फसल अवशेष जलाने पर खेत के क्षेत्रफल के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई है। प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन पर प्रति घटना निम्नलिखित राशि वसूल किए जाने का प्रावधान बताया गया है।
- दो एकड़ से कम भूमि: 2,500 रुपये।
- दो से पांच एकड़ तक भूमि: 5,000 रुपये।
- पांच एकड़ से अधिक भूमि: 15,000 रुपये।
प्रशासन ने किसानों को आगाह किया है कि वे फसल अवशेष जलाने से बचें और निर्धारित नियमों का पालन करें। इसके अतिरिक्त, दोषी पाए जाने पर नियमानुसार अन्य दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान बताया गया है।
किसानों के लिए जरूरी है कि वे पराली प्रबंधन से जुड़े नियमों और अपने क्षेत्र में उपलब्ध कृषि सुविधाओं की जानकारी संबंधित विभाग से प्राप्त करें। इससे अनावश्यक आर्थिक दंड से बचने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा सकता है।
बिना स्ट्रॉ रीपर के कंबाइन से कटाई पर रोक
जिला प्रशासन ने कंबाइन हार्वेस्टिंग मशीन से फसल कटाई को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन के अनुसार, कंबाइन मशीन से कटाई के दौरान खेत में फसल के अवशेष और डंठल बच जाते हैं। कई बार किसान अगली फसल की बुवाई के लिए खेत साफ करने के उद्देश्य से इन अवशेषों को जला देते हैं।
इसी समस्या को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश शासन के कृषि अनुभाग-2 के निर्देशों के तहत जनपद में कंबाइन हार्वेस्टिंग मशीन के साथ स्ट्रॉ रीपर विद बाइंडर अथवा स्ट्रॉ रीपर का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य फसल कटाई के बाद बचने वाले अवशेषों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है। इससे किसानों को पराली जलाने की आवश्यकता कम करने और खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
कंबाइन संचालकों को भी प्रशासन की चेतावनी
जिलाधिकारी ने सभी कंबाइन मशीन मालिकों और संचालकों को निर्देशों का पालन करने की चेतावनी दी है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बिना स्ट्रॉ रीपर के कंबाइन मशीन से फसल कटाई प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने वाले कंबाइन मालिकों के विरुद्ध सिविल दायित्व निर्धारित किए जाने के साथ विधिक कार्रवाई की जा सकती है।
इसलिए कंबाइन मशीन संचालकों को फसल कटाई शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि मशीन में निर्धारित रीपर की व्यवस्था उपलब्ध हो। वहीं, किसानों को भी फसल कटाई के लिए मशीन बुक करते समय इस नियम की जानकारी रखनी चाहिए, ताकि कटाई के दौरान किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
किसानों से नियमों का पालन करने की अपील
संतकबीरनगर जिला प्रशासन ने किसानों और कंबाइन मशीन मालिकों से पराली प्रबंधन के नियमों का पालन करने की अपील की है। प्रशासन का जोर है कि फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किसान, मशीन संचालक और कृषि विभाग मिलकर काम करें।
कुल मिलाकर, पराली न जलाना केवल दंड से बचने का उपाय नहीं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। किसान यदि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन अपनाते हैं और कंबाइन मशीनों में निर्धारित स्ट्रॉ रीपर का इस्तेमाल सुनिश्चित करते हैं, तो इससे खेती और पर्यावरण दोनों को लाभ पहुंच सकता है।

