कानपुर में 18.31 लाख रुपये की साइबर ठगी का खुलासा, पढ़िए इंदौर से इन तीन आरोपियों को किया गया गिरफ्तार

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रिपोर्ट – सुहैल अंसारी 

कानपुर: कानपुर में केमिकल की आपूर्ति के नाम पर कारोबारी से 18 लाख 31 हजार रुपये की कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया है। कानपुर साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की जांच करते हुए मध्य प्रदेश के इंदौर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस धोखाधड़ी में फर्जी फर्म और कूटरचित टैक्स इनवॉइस का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि कारोबारी से भुगतान लेने के बावजूद तय मात्रा में केमिकल की आपूर्ति नहीं की गई और न ही रकम वापस लौटाई गई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राहुल सूर्यवंशी, वीरेंद्र फुलपगारे और सुनील मोहे के रूप में हुई है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद तीनों को न्यायालय में पेश किया। वहीं, मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है।

केमिकल की सप्लाई के नाम पर हुआ सौदा

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला कानपुर की नियति एंटरप्राइजेज फर्म से जुड़ा है। फर्म के संचालक विनीत कुमार माहेश्वरी ने 31 मार्च 2026 को हरियाणा की एन.एस. केमिकल्स नामक फर्म के प्रतिनिधि से एसिड स्लरी खरीदने का सौदा किया था। इस सौदे के तहत कुल 11 हजार किलोग्राम केमिकल की आपूर्ति की जानी थी।

बताया गया है कि सौदे के लिए कारोबारी को दो टैक्स इनवॉइस भेजे गए। पहले इनवॉइस में पांच हजार किलोग्राम एसिड स्लरी की कीमत 11 लाख 21 हजार रुपये दर्शाई गई थी। वहीं, दूसरे इनवॉइस में छह हजार किलोग्राम माल की कीमत 12 लाख 74 हजार रुपये बताई गई।

इस प्रकार, दोनों बिलों में कुल 23 लाख 95 हजार रुपये का मूल्य दर्शाया गया। हालांकि, कारोबारी की फर्म ने अलग-अलग तारीखों में कुल 18 लाख 31 हजार रुपये का भुगतान किया। इसके बावजूद आरोप है कि तय सौदे के अनुसार माल की आपूर्ति नहीं की गई।

भुगतान के बाद भी नहीं मिला माल

पुलिस के मुताबिक, कारोबारी ने केमिकल की आपूर्ति के भरोसे संबंधित फर्म के साथ व्यापारिक लेन-देन किया था। इसके लिए बिलों के आधार पर अलग-अलग तारीखों में रकम ट्रांसफर की गई। लेकिन भुगतान के बाद भी जब तय मात्रा में माल नहीं पहुंचा, तो कारोबारी को धोखाधड़ी की आशंका हुई।

आरोप है कि रकम प्राप्त करने के बाद भी संबंधित पक्ष ने न तो केमिकल की आपूर्ति की और न ही भुगतान की गई राशि वापस की। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची और साइबर क्राइम टीम ने जांच शुरू की।

व्यापारिक लेन-देन में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की। जांच के दौरान आरोपियों की पहचान और उनके कथित नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटाई गई।

साइबर क्राइम टीम ने इंदौर से तीन आरोपियों को पकड़ा

मामले की जांच कानपुर साइबर क्राइम पुलिस ने की। पुलिस के अनुसार, जांच के क्रम में मध्य प्रदेश के इंदौर तक पहुंच बनाई गई, जहां से राहुल सूर्यवंशी, वीरेंद्र फुलपगारे और सुनील मोहे को गिरफ्तार किया गया।

इस कार्रवाई का नेतृत्व साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक अभय प्रताप सिंह ने किया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उप निरीक्षक सद्दाम खान, रवि शंकर, हेड कांस्टेबल शरीफ खान और कांस्टेबल सौरभ पांडेय व नितिन कुमार शामिल रहे।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। मामले में आरोपियों की भूमिका और कथित धोखाधड़ी से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी।

बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में केवल गिरफ्तारी तक जांच सीमित नहीं है। संबंधित बैंक खातों, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है। इसका उद्देश्य कथित लेन-देन की पूरी कड़ी को समझना और यह पता लगाना है कि धोखाधड़ी में अन्य व्यक्ति भी शामिल थे या नहीं।

इसके साथ ही, भुगतान की गई रकम किन खातों में पहुंची और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों की जांच से आरोपियों के बीच संपर्क और कथित व्यापारिक गतिविधियों के संबंध में भी अहम जानकारी मिलने की संभावना है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित फर्म और बिलों का इस्तेमाल किस तरह किया गया तथा क्या इसी तरीके से अन्य कारोबारियों को भी निशाना बनाया गया है। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अतिरिक्त तथ्यों का खुलासा हो सकता है।

कारोबारियों के लिए साइबर क्राइम पुलिस की सलाह

इस घटना के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने कारोबारियों से ऑनलाइन व्यापारिक लेन-देन में सतर्कता बरतने की अपील की है। पुलिस के अनुसार, किसी भी नई फर्म के साथ बड़ा सौदा करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करना जरूरी है।

कारोबारियों को भुगतान से पहले फर्म का जीएसटी विवरण, बैंक खाते का स्वामित्व, आधिकारिक संपर्क नंबर और पते की पुष्टि करनी चाहिए। इसके अलावा, केवल टैक्स इनवॉइस या ऑनलाइन बातचीत के आधार पर बड़ी रकम ट्रांसफर करने से बचना चाहिए। माल की आपूर्ति, भुगतान की शर्तों और संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।

यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

फिलहाल कानपुर के इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बैंकिंग और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि कथित ठगी में रकम का लेन-देन किस तरह हुआ और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।

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