मथुरा: जीएसटी काउंसिल के फैसलों से व्यापारियों को राहत, एक ट्रेड में एक टैक्स लागू करने की मांग

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा, 10 अक्टूबर। जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिए गए निर्णयों की समीक्षा के लिए नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल की कोर कमेटी की बैठक आयोजित की गई। स्थानीय व्यापार मंडल कार्यालय व्यापार भवन में हुई इस बैठक की अध्यक्षता नगर अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने की। बैठक में जीएसटी से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, व्यापारियों ने कई फैसलों का स्वागत करते हुए सरकार से जीएसटी व्यवस्था को और अधिक सरल बनाने की मांग की।

बैठक में उपस्थित व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में समय-समय पर किए जा रहे सुधारों से छोटे और मध्यम व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक ही ट्रेड में अलग-अलग टैक्स दरें लागू होने से व्यापारियों को कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए एक ही ट्रेड में टैक्स की विभिन्न दरों के स्थान पर एक समान टैक्स दर लागू करने पर विचार करना चाहिए।

जीएसटी काउंसिल के फैसलों को बताया व्यापारी हित में

नगर अध्यक्ष सुनील अग्रवाल और महामंत्री शशिभानु गर्ग ने बैठक में जीएसटी काउंसिल के फैसलों की समीक्षा करते हुए कहा कि व्यापार मंडल लंबे समय से जीएसटी प्रक्रिया को सरल बनाने और छोटे व्यापारियों पर अनुपालन का बोझ कम करने की मांग करता रहा है। उनके अनुसार, जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों में बदलाव, सामान्य मामलों में न्यूनतम जुर्माने को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने तथा छोटे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई का बोझ कम करने जैसे कदम व्यापारियों के लिए राहतकारी साबित हो सकते हैं।

पदाधिकारियों ने कहा कि छोटे व्यापारियों के लिए नियमों का पालन करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में यदि कर संबंधी प्रक्रियाएं सरल हों और मामूली त्रुटियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े, तो व्यापारियों को अपना कारोबार सुचारु रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, इससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और कर व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत करने में भी सहायता मिल सकती है।

जीएसटी रजिस्ट्रेशन और रिफंड प्रक्रिया सरल करने पर जोर

नगर उपाध्यक्ष रामचंद्र खत्री और गुरमुख दास ने जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंजीकरण में अनावश्यक देरी होने से कारोबारियों को कई बार व्यावसायिक गतिविधियों में परेशानी होती है। इसलिए आवेदन प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और समयबद्ध बनाया जाना चाहिए।

इसके साथ ही, जीएसटी रिफंड प्रक्रिया में सुधार को भी महत्वपूर्ण बताया गया। पदाधिकारियों का कहना था कि व्यापारियों की जमा राशि समय पर वापस मिलने से उनकी कार्यशील पूंजी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विशेष रूप से छोटे और मझोले कारोबारियों को इससे लाभ मिल सकता है, क्योंकि उन्हें कारोबार चलाने के लिए पूंजी की लगातार आवश्यकता रहती है।

उन्होंने कहा कि जब कर संबंधी प्रक्रियाएं आसान होंगी, तो व्यापारियों को नियमों का पालन करने में सुविधा मिलेगी। परिणामस्वरूप, कर अनुपालन बेहतर हो सकता है और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि की संभावना बनेगी।

आईटीसी और छोटे कर मामलों में राहत का स्वागत

बैठक में महामंत्री सुनील साहनी और वरिष्ठ मंत्री विकास जिंदल ने भी जीएसटी काउंसिल के फैसलों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सही दस्तावेज रखने वाले खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हितों की सुरक्षा के लिए सप्लायर की चूक से जुड़े मामलों पर समिति गठित करने का निर्णय महत्वपूर्ण है।

उनका कहना था कि कई बार खरीदार अपनी ओर से आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी कर देते हैं, लेकिन सप्लायर की गलती या चूक के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में उचित व्यवस्था होने से नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, 10,000 रुपये से कम के मामलों में नोटिस संबंधी राहत तथा आपराधिक अभियोजन के लिए निर्धारित मौद्रिक सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये किए जाने जैसे प्रावधानों का भी स्वागत किया गया। पदाधिकारियों के अनुसार, ऐसे सुधारों से छोटे मामलों में अनावश्यक कानूनी उलझनों को कम करने और कारोबार के अनुकूल वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है।

रिफंड की समय सीमा घटाने को बताया महत्वपूर्ण कदम

नगर कोषाध्यक्ष मीनालाल अग्रवाल और सहमहामंत्री भगवान चतुर्वेदी ने जीएसटी रिफंड से संबंधित प्रावधानों पर चर्चा करते हुए कहा कि रिफंड स्वीकार करने की समय सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन किए जाने का निर्णय व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे करदाताओं के मामलों का निस्तारण तेजी से होने और प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम करने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि रिफंड में देरी होने से व्यापारियों की पूंजी लंबे समय तक अटकी रह सकती है। इसलिए समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था लागू होने से कारोबारियों को आर्थिक प्रबंधन में सहूलियत मिल सकती है। साथ ही, अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में भी सहायता मिल सकती है।

हालांकि, उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि जीएसटी व्यवस्था को वास्तव में सरल बनाने के लिए एक ही ट्रेड में अलग-अलग टैक्स दरों की समस्या का समाधान जरूरी है। व्यापारियों के अनुसार, अलग-अलग दरों के कारण वस्तुओं की श्रेणी निर्धारित करने, बिलिंग करने और कर संबंधी रिकॉर्ड रखने में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए इस विषय पर सरकार को व्यापारियों के सुझावों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

व्यापार मंडल ने सरकार को दिया धन्यवाद

बैठक के अंत में उपस्थित व्यापारियों ने जीएसटी सरलीकरण और व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से किए गए प्रावधानों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्यापार मंडल लंबे समय से कर प्रक्रिया को आसान बनाने, छोटे कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ घटाने और व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की मांग करता रहा है।

व्यापारियों ने सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि जीएसटी व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया लगातार जारी रहनी चाहिए। साथ ही, व्यापारियों की समस्याओं को समझकर ऐसे नियम बनाए जाने चाहिए, जिनसे कारोबार करना आसान हो और कर व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

बैठक का संचालन नगर महामंत्री शशिभानु गर्ग ने किया। इस अवसर पर नगर उपाध्यक्ष राकेश अग्रवाल, दिलीप पांडे, राज नारायण गौड़, मंत्री नागेंद्र वर्मा, प्रेम शंकर अग्रवाल और युवा नगर अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

 

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