श्रावस्ती में फिर बदला मौसम, आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की बढ़ी चिंता – जानिए क्यों?
रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती: उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। बुधवार को अचानक आसमान में बादल छाने के बाद तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। जिले के कई इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि की भी सूचना है। मौसम में अचानक आए इस बदलाव से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में इस समय धान की फसल खड़ी है और तेज हवा व बारिश के कारण फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
इससे पहले 24 सितंबर को आई तेज आंधी और बारिश ने जिले के कई हिस्सों में किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। उस दौरान तेज हवाओं और बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई थी। ऐसे में कुछ ही दिनों बाद दोबारा मौसम खराब होने से किसान फसल की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं।
अचानक बदले मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता
बुधवार को सुबह से ही जिले के कई हिस्सों में मौसम में बदलाव दिखाई देने लगा। आसमान में काले बादल छाए रहे और इसके बाद तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी जानकारी सामने आई। मौसम के इस बदले मिजाज के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अचानक परेशानी का सामना करना पड़ा।
वहीं, खेतों में धान की फसल खड़ी होने के कारण किसानों की चिंता सबसे अधिक बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि लगातार बारिश और तेज हवाओं से तैयार हो रही फसल के गिरने की आशंका बनी हुई है। यदि फसल खेत में गिरती है तो उसकी कटाई और उपज दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
24 सितंबर की बारिश के बाद फिर मौसम ने ली करवट
गौरतलब है कि 24 सितंबर को श्रावस्ती में तेज आंधी और बारिश के कारण कई क्षेत्रों में मौसम का असर देखने को मिला था। किसानों के अनुसार, उस समय भी खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान की स्थिति बनी थी। कई किसान पहले से ही मौसम की मार से परेशान थे।
अब दोबारा तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बनने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि, फसलों को वास्तविक रूप से कितना नुकसान हुआ है, इसका आकलन प्रशासनिक सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल किसान अपने खेतों और फसल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
धान की फसल को लेकर सबसे ज्यादा चिंता
श्रावस्ती कृषि प्रधान जिला है और बड़ी संख्या में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। इस समय खेतों में धान की फसल खड़ी है। ऐसे में तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
किसानों का कहना है कि धान की फसल यदि तेज हवा के कारण खेत में गिर जाती है तो उसे संभालना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा लगातार बारिश होने से खेतों में पानी जमा होने की स्थिति भी बन सकती है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
वहीं, जिन क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है, वहां किसान फसलों की स्थिति को लेकर विशेष रूप से चिंतित हैं। ओले पड़ने से फसल को नुकसान की आशंका रहती है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक स्थिति स्थानीय स्तर पर निरीक्षण के बाद ही सामने आएगी।
किसानों ने प्रशासन से सर्वे और मुआवजे की मांग की
मौसम की दोबारा बिगड़ी स्थिति के बीच किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल को नुकसान हुआ है तो संबंधित विभाग की टीम गांवों और खेतों में पहुंचकर स्थिति का आकलन करे।
किसानों ने मांग की है कि सर्वे के आधार पर पात्र किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि मौसम की मार से हुए नुकसान की भरपाई में उन्हें कुछ राहत मिल सके।
इसके साथ ही किसानों का कहना है कि प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति की निगरानी करनी चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में फसल को अधिक नुकसान हुआ है तो वहां जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
मौसम को लेकर किसान सतर्क
बारिश शुरू होने के बाद किसान अपने स्तर पर भी खेतों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। कई किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खेतों में खड़ी फसल को संभालने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। हालांकि, लगातार बदलते मौसम के कारण किसानों के सामने चुनौती बनी हुई है।
मौसम में अचानक बदलाव के कारण ग्रामीण इलाकों में भी लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है। तेज हवाओं और बारिश के चलते किसान और ग्रामीण मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
फिलहाल श्रावस्ती में दोबारा बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। 24 सितंबर की आंधी-बारिश के बाद अब फिर तेज हवाओं, बारिश और कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की स्थिति सामने आई है। ऐसे में किसानों को फसल नुकसान का डर सता रहा है। अब सभी की नजर प्रशासन की ओर है कि प्रभावित क्षेत्रों में फसल का सर्वे कब शुरू होता है और किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

