दिशा सालियान केस पर नसीम सिद्दीकी के सवाल, UPI MDR को लेकर केंद्र पर निशाना, जरांगे के फैसले का स्वागत
Digital UP News Desk
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की ओर से दायर 500 करोड़ रुपये के मानहानि मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दिशा सालियान के परिवार को न्याय पाने का अधिकार है, लेकिन बेटी की मौत से जुड़े मामले में इतनी बड़ी मानहानि राशि की मांग पर भी सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों और दावों पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
इसके साथ ही नसीम सिद्दीकी ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब लोगों और कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वहीं, उन्होंने महाराष्ट्र में गणेश महोत्सव के दौरान मराठा आरक्षण आंदोलन को स्थगित करने के मनोज जरांगे पाटिल के फैसले का स्वागत किया।
गणेश उत्सव के दौरान आंदोलन स्थगित करने का स्वागत
नसीम सिद्दीकी ने महाराष्ट्र में गणेश उत्सव के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि मुंबई में दस दिनों तक गणेश महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोग घरों और सार्वजनिक पंडालों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस अवधि के दौरान किसी बड़े आंदोलन के कारण आम लोगों को परेशानी हो सकती थी।
उन्होंने मनोज जरांगे पाटिल की ओर से आंदोलन स्थगित किए जाने के निर्णय को अच्छा कदम बताया। सिद्दीकी के मुताबिक, इससे लाखों मुंबईवासियों को राहत मिलेगी और लोग बिना किसी अतिरिक्त व्यवधान के गणेश उत्सव मना सकेंगे।
उन्होंने कहा कि अब 26 सितंबर के बाद आंदोलन कब और किस रूप में आयोजित किया जाएगा, इसका निर्णय मनोज जरांगे पाटिल की ओर से लिया जाएगा। इस तरह, फिलहाल गणेश महोत्सव के दौरान आंदोलन से जुड़े संभावित व्यवधान को टाल दिया गया है।
दिशा सालियान मामले पर नसीम सिद्दीकी ने उठाए सवाल
दिशा सालियान मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नसीम सिद्दीकी ने कहा कि दिशा के पिता और परिवार लंबे समय से अपनी बेटी को न्याय दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में अलग-अलग तरह की आशंकाएं और दावे सामने आते रहे हैं।
सिद्दीकी ने कहा कि एक तरफ परिवार न्याय की मांग करता रहा है, जबकि दूसरी ओर ऐसी आशंकाएं भी व्यक्त की गई हैं कि मामले का इस्तेमाल आदित्य ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि या अंतिम निष्कर्ष के बजाय, उन्होंने इसे राजनीतिक और कानूनी विवाद के संदर्भ में उठाया।
उन्होंने मीडिया में सामने आई 500 करोड़ रुपये की मानहानि राशि की खबर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें यह बात परेशान करने वाली लगी। सिद्दीकी ने भावनात्मक सवाल उठाया कि क्या किसी बेटी के निधन के दुख की भरपाई इतनी बड़ी धनराशि से की जा सकती है।
‘क्या 500 करोड़ रुपये का दावा उचित है?’
नसीम सिद्दीकी ने दिशा सालियान के पिता से सवाल करते हुए कहा कि बेटी के निधन के बाद न्याय की लड़ाई को आर्थिक मुआवजे से जोड़ना उन्हें उचित नहीं लगता। उन्होंने कहा कि वह स्वयं दो बेटियों के पिता हैं और किसी परिवार के लिए बेटी को खोने का दर्द समझ सकते हैं।
उन्होंने आगे यह भी सवाल उठाया कि कहीं सत्ता पक्ष के साथ मिलकर या अदालत की प्रक्रिया के जरिए इस मामले से आर्थिक लाभ हासिल करने की कोई कोशिश तो नहीं हो रही है। हालांकि, यह सिद्दीकी द्वारा उठाई गई आशंका है और इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मानहानि के मामले में अदालत में क्या दावे किए गए हैं और संबंधित पक्षों का क्या पक्ष है, इसका अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना है। इसलिए इस पूरे विवाद को लेकर सामने आ रहे राजनीतिक बयानों और कानूनी तथ्यों को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है।
UPI और MDR को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना
नसीम सिद्दीकी ने UPI से जुड़े MDR के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शुरुआत में लोगों को डिजिटल भुगतान के फायदे बताती है और बिना अतिरिक्त शुल्क के UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है। इसके बाद, उनके अनुसार, जब लोग डिजिटल भुगतान के आदी हो जाते हैं तो शुल्क या कर से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा शुरू होती है।
सिद्दीकी ने सरकार पर विभिन्न क्षेत्रों में टैक्स का बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, खान-पान, होटल और पर्यटन समेत कई क्षेत्रों में लोगों को करों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए इसे ‘टैक्स वाली सरकार’ बताया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को जहां से भी राजस्व जुटाने का अवसर मिलता है, वह वहां से पैसा वसूलने की कोशिश करती है।
व्यापारियों और किसानों को लेकर भी सरकार पर आरोप
एनसीपी-एसपी प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी नीतियां आम जनता और किसानों के हितों के बजाय व्यापारियों के पक्ष में अधिक दिखाई देती हैं। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है और सरकार की नीतियों का मूल्यांकन अलग-अलग आर्थिक आंकड़ों तथा आधिकारिक नीतिगत दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, नसीम सिद्दीकी के बयान में महाराष्ट्र के तीन अहम मुद्दे सामने आए—गणेश उत्सव के दौरान मनोज जरांगे पाटिल का आंदोलन स्थगित करना, दिशा सालियान मामले से जुड़ा 500 करोड़ रुपये का मानहानि विवाद और UPI के MDR को लेकर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां। इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों के अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष के लिए न्यायिक प्रक्रिया, आधिकारिक निर्णय और संबंधित पक्षों के प्रमाणित बयानों को देखना महत्वपूर्ण होगा।

