आईआईटी कानपुर में वाधवानी इनोवेशन सेंटर का शुभारंभ, मेडिकल टेक्नोलॉजी रिसर्च को मिलेगा नया मंच

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Digital UP News

कानपुर: स्वास्थ्य क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रयोगशाला से आगे बढ़ाकर उपयोगी उत्पादों और समाधानों में बदलने की दिशा में आईआईटी कानपुर में वाधवानी इनोवेशन सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज की स्थापना की गई है। यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के रूप में काम करेगा और लाइफ साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल टेक्नोलॉजी तथा एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा।

सेंटर को पांच वर्षों में 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता मिलने की जानकारी दी गई है। इसके माध्यम से संभावनाशील अनुसंधान को विकसित करने, उसकी जांच और वैलिडेशन करने तथा आगे चलकर व्यावसायीकरण तक पहुंचाने में शोधकर्ताओं को सहयोग मिलेगा। वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क (WIN) का व्यापक उद्देश्य भी अकादमिक अनुसंधान को उत्पादों, स्टार्टअप और व्यावहारिक समाधानों में बदलने की प्रक्रिया को गति देना है।

DRDO महानिदेशक की मौजूदगी में हुआ शुभारंभ

वाधवानी–आईआईटी कानपुर इनोवेशन सेंटर का शुभारंभ डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह, महानिदेशक, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), नई दिल्ली की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर आईआईटी कानपुर और वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क से जुड़े अधिकारियों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने अनुसंधान को वास्तविक स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़ने की दिशा में सेंटर की भूमिका पर चर्चा की।

सेंटर की स्थापना ऐसे समय में हुई है, जब अनुसंधान को केवल वैज्ञानिक प्रकाशनों तक सीमित रखने के बजाय उसके व्यावहारिक उपयोग और तकनीक हस्तांतरण पर भी जोर दिया जा रहा है। WIN पहले से ही आईआईटी कानपुर सहित प्रमुख संस्थानों के साथ अनुसंधान के व्यावसायीकरण के लिए काम कर रहा है।

इन क्षेत्रों में होगा अनुसंधान पर फोकस

नए सेंटर के माध्यम से थेरेप्यूटिक्स, रीजनरेटिव मेडिसिन, ड्रग डिलीवरी, वैक्सीन, मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्च क्षमता वाले अनुसंधान को सहयोग देने की योजना है। इसके अलावा न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों, मानसिक स्वास्थ्य, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए यह सेंटर प्रयोगशाला में विकसित विचारों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। इसके तहत किसी संभावित तकनीक की उपयोगिता, प्रभावशीलता और बाजार की जरूरतों को समझते हुए उसके अगले चरण की तैयारी में सहायता दी जाएगी।

रिसर्च से प्रोडक्ट तक पहुंचाने पर जोर

सेंटर की प्रमुख भूमिका अनुसंधान और वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं के बीच मौजूद अंतर को कम करना होगी। इसके लिए शोधकर्ताओं को वैलिडेशन, बौद्धिक संपदा (IP), नियामकीय प्रक्रियाओं, तकनीक हस्तांतरण और व्यावसायीकरण से संबंधित सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

इसके साथ ही, संभावनाशील तकनीकों को उद्योग जगत से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे वैज्ञानिकों को अपनी रिसर्च के व्यावहारिक उपयोग और संभावित बाजार की जरूरतों को समझने में मदद मिल सकती है।

वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क का मॉडल भी इसी दिशा में काम करता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार WIN प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों में Innovation Centres स्थापित कर translational funding, commercialization support, mentorship और industry partnerships के माध्यम से अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है।

आईआईटी कानपुर में पहले से मजबूत है बायोमेडिकल रिसर्च इकोसिस्टम

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने सेंटर की स्थापना का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान में रीजनरेटिव मेडिसिन, मॉलिक्यूलर मेडिसिन, न्यूरोसाइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित बायोमेडिकल रिसर्च का मजबूत इकोसिस्टम मौजूद है।

उन्होंने कहा कि WIN-CoE के माध्यम से संभावनाशील अनुसंधान को तकनीक विकास, तकनीक हस्तांतरण, उद्यमिता और व्यावसायीकरण की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इससे शोधकर्ताओं को अपने वैज्ञानिक कार्य को वास्तविक उपयोग वाले उत्पादों और समाधानों में बदलने के लिए आवश्यक सहयोग मिल सकेगा।

उद्योग और शोधकर्ताओं के बीच मजबूत होगा संपर्क

वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. शिरशेंदु मुखर्जी ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान की क्षमता मजबूत है, लेकिन प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि WIN के माध्यम से शोधकर्ताओं को विशेषज्ञता, उद्योग साझेदारी, पूंजी और व्यावसायीकरण से संबंधित सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में आईआईटी कानपुर में स्थापित यह सेंटर लाइफ साइंसेज और मेडिकल टेक्नोलॉजी से जुड़े अनुसंधान को आगे बढ़ाने में उपयोगी भूमिका निभा सकता है।

चिकित्सकीय जरूरतों को तकनीकी विशेषज्ञता से जोड़ने की पहल

आईआईटी कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं WIN-CoE के प्रोफेसर इन-चार्ज प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि सेंटर के माध्यम से संभावनाशील विचारों को प्रयोगशाला की सीमाओं से आगे ले जाने का प्रयास किया जाएगा।

वहीं, WIN-CoE के को-प्रोफेसर इन-चार्ज प्रो. संतोष मिश्रा ने कहा कि मेडिकल टेक्नोलॉजी में नवाचार को चिकित्सकीय जरूरतों से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए चिकित्सकीय आवश्यकताओं, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों को एक साथ लाने पर जोर दिया जाएगा।

ट्रांसलेशनल रिसर्च पर हुई कार्यशाला

सेंटर के शुभारंभ के बाद ‘ट्रांसलेशनल रिसर्च एंड रेगुलेटरी पाथवेज: ब्रिजिंग इनोवेशन टू हेल्थकेयर इम्पैक्ट’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें नियामक एजेंसियों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य क्षेत्र, उद्योग और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला में प्रयोगशाला में विकसित नवाचार को क्लिनिकल वैलिडेशन, नियामकीय मंजूरी और अंततः स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। इस दौरान शोध से लेकर उत्पाद विकास और बाजार तक पहुंचने के विभिन्न चरणों को समझने पर जोर दिया गया।

राष्ट्रीय स्तर पर इनोवेशन नेटवर्क का हिस्सा

वाधवानी–आईआईटी कानपुर इनोवेशन सेंटर, वाधवानी फाउंडेशन की प्रमुख पहल वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क (WIN) का हिस्सा है। WIN देश के प्रमुख शैक्षणिक और शोध संस्थानों में Innovation Centres का नेटवर्क विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग, उत्पाद विकास और व्यावसायीकरण तक पहुंचाने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।

इससे पहले भी वाधवानी फाउंडेशन ने आईआईटी कानपुर सहित प्रमुख संस्थानों के साथ WIN-CoE स्थापित करने के लिए साझेदारी की थी। आईआईटी कानपुर के लिए घोषित प्रमुख फोकस क्षेत्रों में सिंथेटिक बायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी (थेरेप्यूटिक्स) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल रहे हैं।

नया सेंटर लाइफ साइंसेज और मेडिकल टेक्नोलॉजी से जुड़े अनुसंधान को वैलिडेशन, नियामकीय प्रक्रिया, उद्योग साझेदारी और व्यावसायीकरण से जोड़ने के लिए एक संस्थागत मंच उपलब्ध कराएगा। इस प्रकार, आईआईटी कानपुर में स्थापित यह पहल वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य क्षेत्र में उसके व्यावहारिक उपयोग के बीच कड़ी मजबूत करने की दिशा में काम करेगी।

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