वृंदावन में श्री कृष्ण नेशनल आर्ट वर्कशॉप-2026 शुरू, 20 चित्रकार कैनवास पर उकेर रहे राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाएं

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रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज

वृंदावन। श्रीकृष्णोत्सव-2026 के अंतिम आयोजन के रूप में वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं को कला के माध्यम से साकार करने का अनूठा प्रयास शुरू हुआ है। जन्माष्टमी के बाद अब देशभर से आए ख्याति प्राप्त चित्रकार रंगों और तूलिका के जरिए राधा-कृष्ण के प्रेम, ब्रज की संस्कृति और श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं को कैनवास पर उकेर रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान में तीन दिवसीय ‘श्री कृष्ण राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर-2026’ यानी ‘श्री कृष्ण नेशनल आर्ट वर्कशॉप-2026’ का शुभारंभ किया गया।

यह कला शिविर 9 सितंबर तक चलेगा। शिविर में देश के अलग-अलग राज्यों से आए कुल 20 प्रसिद्ध चित्रकार भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े विभिन्न प्रसंगों और ब्रज की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक विरासत को अपनी विशिष्ट कला शैलियों में प्रस्तुत कर रहे हैं। इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें पद्मश्री, राष्ट्रपति सम्मान और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल कर चुके कलाकार भी हिस्सा ले रहे हैं।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कला शिविर का शुभारंभ

गीता शोध संस्थान में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र, गीता शोध संस्थान के निवर्तमान निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना और डॉ. उमेश चंद्र शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर शिविर का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए चित्रकारों का स्वागत किया और आयोजन की शुरुआत की।

शुभारंभ के बाद प्रतिभागी कलाकारों को कैनवास, रंगों की किट और चित्रांकन के लिए आवश्यक अन्य कला सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही कलाकारों ने अपनी-अपनी कल्पना, अनुभव और कला दृष्टि के अनुसार श्रीकृष्ण की लीलाओं को कैनवास पर आकार देना शुरू किया।

कला के साथ भक्ति और साधना का माध्यम है चित्रांकन

इस अवसर पर गीता शोध संस्थान के महेश चंद्र शर्मा ने भारतीय कला परंपरा और धार्मिक-सांस्कृतिक जीवन में चित्रांकन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का चित्रण केवल कला की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह भक्ति, साधना और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ने का भी माध्यम है।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाओं में प्रेम, करुणा, संगीत, लोकजीवन, प्रकृति और आध्यात्मिकता के अनेक आयाम दिखाई देते हैं। इसलिए जब कलाकार इन्हें अपनी कला शैली में प्रस्तुत करते हैं तो एक ही विषय के अलग-अलग भाव और रंग सामने आते हैं। यही विविधता इस राष्ट्रीय कला शिविर को विशेष बनाती है।

20 प्रसिद्ध चित्रकार कर रहे श्रीकृष्ण की लीलाओं का चित्रांकन

राष्ट्रीय स्तर के इस कला शिविर में 20 ख्याति प्राप्त चित्रकार भाग ले रहे हैं। इनमें 16 महिला और चार पुरुष चित्रकार शामिल हैं। देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों से आए कलाकार अपनी विशिष्ट कला शैलियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण, राधा-कृष्ण के प्रेम और ब्रज की विभिन्न लीलाओं को चित्रों में अभिव्यक्त कर रहे हैं।

शिविर में शामिल कई कलाकार देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों और कला संस्थानों में प्रोफेसर के रूप में कार्य कर चुके हैं। वहीं कुछ कलाकार ललित कला अकादमी, एनसीईआरटी और विभिन्न मंत्रालयों के लिए कला एवं डिजाइन से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य कर चुके हैं।

शिविर में पद्मश्री शांति देवी (मधुबनी), डॉ. अलका झा (इंदौर), डॉ. बंदना जोशी (नाथद्वारा), डॉ. पूनम रानी (अलीगढ़), नीतिक्षा डावर (दिल्ली), डॉ. खुशबू उपाध्याय (गाजियाबाद), सुश्री नेहा (लखनऊ), मनजीत कौर (चंडीगढ़), डॉ. अलका मनीष पाठक (सीहोर), सोमा आनंद (पटना), विनीता सिंह (पटना), विनीता शर्मा (जयपुर), कंचन प्रकाश (ग्रेटर नोएडा), सुमित्रा अहलावत (दिल्ली), सुमन डोंगरे (उज्जैन), प्रिंस राज (मेरठ), विनोद कुमार सिंह (लखनऊ), जयेश त्रिवेदी (उज्जैन) और ललित कला अकादमी, आगरा के निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिंह सहित अन्य कलाकार शामिल हैं।

पद्मश्री शांति देवी बनीं प्रमुख आकर्षण

शिविर में पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध मधुबनी चित्रकार शांति देवी की मौजूदगी विशेष आकर्षण का केंद्र है। मधुबनी शैली की कला को देश और विदेश में पहचान दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी कला यात्रा भारतीय लोककला की समृद्ध परंपरा और उसकी व्यापक संभावनाओं को दर्शाती है।

कार्यक्रम में पद्मश्री शांति देवी ने अपने कला अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन कला को समर्पित किया है। उनके अनुसार चित्रकला उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह जीवनभर चित्रकला से जुड़ी रहना चाहती हैं और अगले जन्म में भी चित्रकार बनना पसंद करेंगी।

उनकी उपस्थिति से शिविर में युवा और वरिष्ठ कलाकारों के बीच कला अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर भी बन रहा है।

राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनी लगा चुकी हैं कंचन प्रकाश

शिविर में शामिल कलाकारों में कंचन प्रकाश भी महत्वपूर्ण नाम हैं। वह राष्ट्रपति भवन में अपनी चित्र प्रदर्शनी लगा चुकी हैं। उनकी कला यात्रा राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चित्रकला की विभिन्न शैलियों और प्रयोगों को सामने लाती है।

इस प्रकार शिविर में एक ओर मधुबनी जैसी पारंपरिक लोककला का प्रतिनिधित्व दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर समकालीन कला और विभिन्न क्षेत्रीय कला शैलियों का संगम भी देखने को मिल रहा है।

अलग-अलग कला शैलियों में एक ही विषय की अलग अभिव्यक्ति

श्री कृष्ण नेशनल आर्ट वर्कशॉप की सबसे खास विशेषता यह है कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकार एक ही विषय को अपनी अलग-अलग दृष्टि और तकनीक से प्रस्तुत कर रहे हैं। कोई कलाकार राधा-कृष्ण के प्रेम को केंद्र में रख रहा है तो कोई बाल कृष्ण की लीलाओं, ब्रज के लोकजीवन और प्राकृतिक परिवेश को अपने चित्रों का आधार बना रहा है।

इसके अलावा श्रीकृष्ण की बांसुरी, गोप-गोपियों के साथ उनकी लीलाएं, यमुना तट, ब्रज की गलियां और राधा-कृष्ण की भक्ति से जुड़े प्रसंग भी कलाकारों की कल्पना का हिस्सा बन रहे हैं।

इससे एक ही कैनवास पर नहीं, बल्कि अलग-अलग कलाकारों के माध्यम से श्रीकृष्ण के अनेक भाव और स्वरूप सामने आने की संभावना है। साथ ही भारतीय कला की विविधता भी इस आयोजन के माध्यम से प्रदर्शित हो रही है।

ब्रज की सांस्कृतिक एकता का संदेश

गीता शोध संस्थान के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने कार्यक्रम का संचालन किया और सभी चित्रकारों का परिचय कराया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों और कला परंपराओं से आए कलाकार जब एक ही विषय यानी श्रीकृष्ण को अपनी दृष्टि और शैली में चित्रित करते हैं, तो भारतीय कला की विविधता और ब्रज की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम सामने आता है।

उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजन कलाकारों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी देते हैं।

कला और संस्कृति से जुड़े लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें दीपक, रामवीर, मोहिनी कृष्णदासी, विक्रम दिवाकर, मनीष, बच्चू सिंह और सुनील सहित अन्य लोग शामिल रहे।

श्री कृष्णोत्सव-2026 के अंतिम आयोजन के रूप में आयोजित यह कला शिविर वृंदावन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को कला के माध्यम से सामने ला रहा है। अगले तीन दिनों में तैयार होने वाले चित्रों में कलाकारों की व्यक्तिगत कला दृष्टि के साथ-साथ ब्रज की परंपरा, श्रीकृष्ण भक्ति और भारतीय संस्कृति की विविध छवियां देखने को मिलेंगी।

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